केंद्र प्रायोजित योजनाओं के भुगतान को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का नया शासनादेश जारी, SNA-SPARSH 2.0 के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया हुई स्पष्ट।

केंद्र प्रायोजित योजनाओं के भुगतान को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का नया शासनादेश जारी, SNA-SPARSH 2.0 के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया हुई स्पष्ट।

लखनऊ, 29 जून 2026। उत्तर प्रदेश शासन के वित्त विभाग ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित भुगतान प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुचारु बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है। यह शासनादेश पत्र संख्या 17/2026/बी-1-1477/दस-2026 के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें उन परिस्थितियों के लिए विस्तृत व्यवस्था निर्धारित की गई है, जहाँ जनपद स्तर पर आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) उपलब्ध नहीं हैं।

📅 4 जुलाई 2026 ·👁 50 views

उत्तर प्रदेश शासन के वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1 ने 29 जून 2026 को एक शासनादेश जारी कर केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) के भुगतान से जुड़ी एक व्यावहारिक समस्या का समाधान निकाला है। यह आदेश सचिव संदीप कौर द्वारा जारी किया गया है और इसे प्रदेश के सभी विभागों तथा विभागाध्यक्षों को भेजा गया है।

यह आदेश सीधे आम जनता से नहीं, बल्कि उन सरकारी विभागों, कोषागारों और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को क्रियान्वित करने वाली नामित/प्राधिकृत संस्थाओं से जुड़ा है, जहां जनपद स्तर पर आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) उपलब्ध न होने के कारण भुगतान अटक रहे थे। इस आदेश के माध्यम से ऐसी संस्थाओं के लिए बिल भेजने और भुगतान स्वीकृत कराने की एक स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है।

नीचे इस आदेश को सरल भाषा में समझाया गया है ताकि संबंधित अधिकारी और संस्थाएं इस प्रक्रिया को आसानी से समझ सकें।


एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी

बिंदु

विवरण

आदेश का विषय

केंद्र प्रायोजित योजनाओं का SNA-SPARSH 2.0 के माध्यम से क्रियान्वयन — भुगतान प्रक्रिया का निर्धारण।

विभाग

वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन।

शासनादेश संख्या

पत्र सं0-17/2026/बी-1-1477/दस-2026

शासनादेश

29 जून 2026

लागू होने की तारीख

आदेश में स्पष्ट रूप से पृथक तिथि का उल्लेख नहीं है।

संबंधित लाभार्थी/संस्थाएं

केंद्र प्रायोजित योजनाओं की वे नामित/प्राधिकृत क्रियान्वयन संस्थाएं जिनकी जनपदीय इकाइयों में आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध नहीं है।

संदर्भित पूर्व शासनादेश

संख्या 8/2026/बी-1-1196/दस-2026, दिनांक 30 अप्रैल 2026

मुख्य बदलाव

ऐसी संस्थाओं के लिए बिल प्रस्तुतीकरण एवं भुगतान की पांच-चरणीय वैकल्पिक प्रक्रिया निर्धारित।

इस शासनादेश में क्या कहा गया है?

आदेश की शुरुआत में बताया गया है कि 30 अप्रैल 2026 के शासनादेश के जरिए पहले ही SNA-SPARSH मॉड्यूल को विकेंद्रीकृत किया जा चुका है। इसके तहत सामान्य व्यवस्था यह है कि विभागों के जनपदीय एडमिन कार्यालय बिल जनरेट करते हैं, जिन्हें जनपदीय आहरण एवं वितरण अधिकारी के माध्यम से जनपदीय कोषागार को भेजा जाता है और कोषागार द्वारा उन बिलों का पारण (पास) किया जाता है।

लेकिन शासन के संज्ञान में यह बात आई कि कुछ केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लागू करने वाली नामित/प्राधिकृत संस्थाओं की जनपदीय इकाइयों में आहरण एवं वितरण अधिकारी का पद ही उपलब्ध नहीं है। अब तक इन संस्थाओं का भुगतान मुख्यालय स्तर के आहरण एवं वितरण अधिकारी द्वारा किया जा रहा था, जिसके कारण SNA-SPARSH 2.0 की सामान्य प्रक्रिया (process flow) के जरिए भुगतान संभव नहीं हो पा रहे थे।

इसी समस्या को हल करने के लिए वित्त विभाग ने ऐसी संस्थाओं के लिए बिलों के प्रस्तुतीकरण और भुगतान की एक अलग, पांच-चरणों वाली प्रक्रिया तय की है, जो नीचे विस्तार से बताई गई है।


किसे लाभ मिलेगा?

यह व्यवस्था केवल उन्हीं केंद्र प्रायोजित योजनाओं की क्रियान्वयन संस्थाओं (Implementing Agencies) पर लागू होगी, जिनकी जनपदीय इकाइयों में आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसी संस्थाओं को अब अपने भुगतान अटकाए रखने की बजाय एक निर्धारित प्रक्रिया के जरिए मुख्यालय के माध्यम से भुगतान कराने का रास्ता मिल गया है।


किसे लाभ नहीं मिलेगा?

जिन विभागों/योजनाओं में जनपद स्तर पर पहले से आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध है, उन पर यह विशेष प्रक्रिया लागू नहीं होगी — वे 30 अप्रैल 2026 के शासनादेश के अनुसार SNA-SPARSH 2.0 की सामान्य प्रक्रिया से ही काम करते रहेंगे। यह नई व्यवस्था केवल अपवाद स्वरूप उन संस्थाओं के लिए है जहां जनपद स्तर पर DDO की अनुपलब्धता की समस्या है।


क्या बदलाव हुआ?

बिंदु

पहले की स्थिति

नई व्यवस्था

सामान्य प्रक्रिया (30 अप्रैल 2026 के आदेश अनुसार)

जनपदीय एडमिन बिल जनरेट करता है → जनपदीय DDO के माध्यम से जनपदीय कोषागार को भेजा जाता है → कोषागार बिल पारण करता है

यथावत लागू रहती है, जहां जनपद स्तर पर DDO उपलब्ध है

DDO न होने वाली संस्थाओं की स्थिति

भुगतान मुख्यालय के DDO द्वारा किया जा रहा था, परंतु SNA-SPARSH 2.0 की सामान्य प्रक्रिया से यह संभव नहीं हो पा रहा था

अब एक पृथक, स्पष्ट पांच-चरणीय प्रक्रिया निर्धारित की गई है (नीचे देखें)

कर्मचारियों/संस्थाओं पर क्या असर पड़ेगा?

इस आदेश से जुड़ी संस्थाओं के लिए सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा यह है कि उनके भुगतान अब बिना रुके प्रक्रिया में आगे बढ़ सकेंगे। पहले जनपद स्तर पर DDO न होने की वजह से बिल सिस्टम में अटक जाते थे। अब मुख्यालय स्तर के DDO और संबंधित संस्था के निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका स्पष्ट कर दी गई है, जिससे जिम्मेदारी और प्रक्रिया दोनों तय हो गई हैं।

साथ ही आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि भुगतान स्वीकृति आदेश में किसी त्रुटि के कारण होने वाले अनियमित भुगतान की जिम्मेदारी कोषागार की नहीं होगी — यानी सही और सत्यापित दस्तावेज भेजने की जिम्मेदारी संबंधित संस्था और मुख्यालय के अधिकारियों पर रहेगी।


नई भुगतान प्रक्रिया — चरण दर चरण

जिन संस्थाओं की जनपदीय इकाइयों में आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध नहीं है, उनके लिए निम्न प्रक्रिया अपनानी होगी:-

• बिल अग्रेषण: जनपद स्तरीय Implementing Agency का Admin समेकित बिलों को मुख्यालय के आहरण एवं वितरण अधिकारी को भेजेगा। मुख्यालय का DDO जनपदों से प्राप्त बिलों को आगे जवाहर भवन कोषागार, लखनऊ या साइबर ट्रेजरी, इंदिरा भवन, लखनऊ को भेजेगा — यह मुख्यालय के स्पष्ट आदेश पर निर्भर करेगा कि किस कोषागार को भेजा जाना है।

• प्रतिहस्ताक्षर: संबंधित संस्था के निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा मुख्यालय स्तर पर नामित अधिकारी बिलों के प्रिंट आउट (फॉर्म 103) पर प्रतिहस्ताक्षर करेगा और उसे संबंधित कोषागार को भेजेगा।

• भुगतान स्वीकृति आदेश: जनपद कार्यालय के Admin द्वारा भेजे गए बिलों के साथ संलग्न भुगतान स्वीकृति आदेश के आधार पर, संस्था के निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा नामित अधिकारी संबंधित कोषागार के लिए भुगतान स्वीकृति आदेश जारी करेगा, जिसे मुख्यालय का DDO फॉर्म 103 के प्रतिहस्ताक्षरित प्रिंट आउट के साथ कोषागार को भेजेगा।

• बिल पारण: फॉर्म 103 का प्रतिहस्ताक्षरित प्रिंट आउट और भुगतान स्वीकृति आदेश प्राप्त होने पर कोषागार द्वारा बिलों का पारण (पास) किया जाएगा।

• उत्तरदायित्व की सीमा: यदि भुगतान स्वीकृति आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि के कारण अनियमित भुगतान होता है, तो उसके प्रति कोषागार का कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।


उदाहरण से समझिए

मान लीजिए किसी केंद्र प्रायोजित योजना की क्रियान्वयन संस्था की एक जनपदीय इकाई है, लेकिन वहां आहरण एवं वितरण अधिकारी का पद खाली/अनुपलब्ध है। इस स्थिति में वह जनपदीय इकाई अपने बिल सीधे कोषागार को नहीं भेज सकती।

आदेश के अनुसार अब उस जनपदीय इकाई का Admin अपने बिल समेकित करके मुख्यालय के DDO को भेजेगा। मुख्यालय का DDO यह तय करेगा कि बिल जवाहर भवन कोषागार को भेजना है या साइबर ट्रेजरी, इंदिरा भवन को। इसके बाद संस्था के निदेशक/CEO द्वारा नामित अधिकारी फॉर्म 103 पर प्रतिहस्ताक्षर करके भुगतान स्वीकृति आदेश के साथ कोषागार भेजेंगे, और तभी कोषागार बिल पारित करेगा।


महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां

• यह वैकल्पिक प्रक्रिया केवल उन्हीं संस्थाओं पर लागू है जिनकी जनपदीय इकाइयों में आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध नहीं है।

• बिल किस कोषागार (जवाहर भवन या साइबर ट्रेजरी, इंदिरा भवन) को भेजे जाएंगे, यह मुख्यालय द्वारा जारी स्पष्ट आदेश पर निर्भर करेगा — यह निर्णय स्वयं जनपदीय इकाई नहीं ले सकती।

• फॉर्म 103 का प्रतिहस्ताक्षरित प्रिंट आउट और भुगतान स्वीकृति आदेश — दोनों दस्तावेज प्राप्त होने के बाद ही कोषागार बिल पारित करेगा।

• भुगतान स्वीकृति आदेश में कोई त्रुटि होने पर उससे उत्पन्न अनियमित भुगतान की जिम्मेदारी कोषागार की नहीं, बल्कि आदेश जारी करने वाली संस्था/मुख्यालय की होगी।


अब क्या करना होगा?

जिन क्रियान्वयन संस्थाओं की जनपदीय इकाइयों में आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध नहीं है, उन्हें उपरोक्त पांच-चरणीय प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करनी होगी:-

• जनपदीय Admin समेकित बिल मुख्यालय के DDO को भेजें।

• मुख्यालय के स्पष्ट आदेश के अनुसार बिल संबंधित कोषागार (जवाहर भवन/साइबर ट्रेजरी) को अग्रेषित हों।

• संस्था के नामित अधिकारी फॉर्म 103 पर प्रतिहस्ताक्षर करें और भुगतान स्वीकृति आदेश जारी करें।

• दोनों दस्तावेज कोषागार को भेजे जाने के बाद ही बिल पारण की प्रक्रिया पूरी होगी।


महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)

1. यह आदेश किन संस्थाओं पर लागू होगा?

उत्तर- यह केवल उन केंद्र प्रायोजित योजनाओं की नामित/प्राधिकृत क्रियान्वयन संस्थाओं पर लागू होगा जिनकी जनपदीय इकाइयों में आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध नहीं है।

2. क्या यह पूरे SNA-SPARSH 2.0 सिस्टम की सामान्य प्रक्रिया को बदल देता है?

उत्तर- नहीं, यह केवल उन विशेष मामलों के लिए एक वैकल्पिक प्रक्रिया है जहां जनपद स्तर पर DDO उपलब्ध नहीं है। सामान्य प्रक्रिया 30 अप्रैल 2026 के शासनादेश के अनुसार यथावत लागू रहेगी।

3. बिल किस कोषागार को भेजे जाएंगे — जवाहर भवन या साइबर ट्रेजरी?

उत्तर- यह मुख्यालय द्वारा प्रत्येक मामले में जारी किए जाने वाले स्पष्ट आदेश पर निर्भर करेगा।

4. फॉर्म 103 पर हस्ताक्षर कौन करेगा?

उत्तर- संबंधित संस्था के निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा मुख्यालय स्तर पर नामित अधिकारी फॉर्म 103 के प्रिंट आउट पर प्रतिहस्ताक्षर करेगा।

5. भुगतान में गड़बड़ी होने पर जिम्मेदार कौन होगा?

उत्तर- आदेश के अनुसार भुगतान स्वीकृति आदेश में त्रुटि के कारण होने वाले अनियमित भुगतान के लिए कोषागार उत्तरदायी नहीं होगा।

6. यह आदेश कब से लागू है?

उत्तर- आदेश दिनांक 29 जून 2026 को जारी हुआ है, हालांकि इसमें पृथक रूप से किसी "प्रभावी तिथि" का उल्लेख नहीं किया गया है।

7. इससे पहले किस शासनादेश के तहत SNA-SPARSH व्यवस्था लागू हुई थी?

उत्तर- इससे पहले 30 अप्रैल 2026 के शासनादेश (संख्या 8/2026/बी-1-1196/दस-2026) के जरिए SNA-SPARSH मॉड्यूल को विकेंद्रीकृत किया गया था।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश वित्त विभाग के इस आदेश (पत्र सं0-17/2026/बी-1-1477/दस-2026, दिनांक 29 जून 2026) का मुख्य उद्देश्य उन केंद्र प्रायोजित योजनाओं के भुगतान की समस्या को सुलझाना है, जिनकी क्रियान्वयन संस्थाओं में जनपद स्तर पर आहरण एवं वितरण अधिकारी उपलब्ध नहीं है। अब ऐसी संस्थाएं मुख्यालय के DDO और फॉर्म 103 पर प्रतिहस्ताक्षर की एक निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपने बिल पारित करा सकेंगी, जिससे भुगतान में होने वाली देरी कम होगी। सबसे जरूरी बात यह है कि भुगतान स्वीकृति आदेश में सटीकता बनाए रखनी होगी, क्योंकि किसी त्रुटि की जिम्मेदारी कोषागार नहीं लेगा।


आधिकारिक स्रोत

यह जानकारी वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दिनांक 29 जून 2026 को जारी पत्र संख्या-17/2026/बी-1-1477/दस-2026 पर आधारित है। इस शासनादेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट https://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।

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