उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों के अवकाश नियम: पूरी जानकारी एक जगह।
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उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों के अवकाश नियम: पूरी जानकारी एक जगह।

उत्तर प्रदेश सरकारी सेवकों के अवकाश दो श्रेणियों में बंटे हैं — वित्तीय हस्त पुस्तिका आधारित अवकाश (अर्जित, निजी कार्य, चिकित्सा, मातृत्व, बाल्य देखभाल, असाधारण, चिकित्सालय, अध्ययन एवं लघुकृत अवकाश) और आकस्मिक/विशेष/प्रतिकर अवकाश। अर्जित अवकाश अधिकतम 300 दिन तक जमा हो सकता है, मातृत्व अवकाश 180 दिन का है, और बाल्य देखभाल अवकाश पूरे सेवाकाल में 730 दिन तक अनुमन्य है। हर अवकाश की अपनी शर्तें, सीमाएं और वेतन-नियम हैं, और मूल नियम 67 के अनुसार कोई भी अवकाश कर्मचारी का स्वतः अधिकार नहीं है — यह सदैव सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के अधीन होता है।

📅 19 अगस्त 2026 ·👁 112 views

📑 विषय सूची (Table of Contents)

अवकाश नियम की मुख्य जानकारी

विवरण

जानकारी

स्रोत दस्तावेज़

वित्त-पथ 2011 (वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड-2, भाग 2 से 4 के मूल नियम एवं सहायक नियमों पर आधारित)

मूल नियम संदर्भ

मूल नियम 58 से 104, सहायक नियम 35 से 172

लागू

उत्तर प्रदेश सरकार के स्थायी एवं अस्थायी सरकारी सेवक

अवकाश की श्रेणियां

दो — (I) वित्तीय हस्त पुस्तिका आधारित अवकाश, (II) आकस्मिक/विशेष/प्रतिकर अवकाश

कुल अवकाश प्रकार

12 (9 + आकस्मिक + विशेष आकस्मिक + प्रतिकर)

अवकाश की दो श्रेणियां क्या हैं?

वित्त-पथ 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकारी सेवकों के अवकाशों को समझने के लिए इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है:

श्रेणी I: वे अवकाश जो वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड-दो (भाग 2 से 4) में वर्णित मूल एवं सहायक नियमों से संचालित होते हैं — जैसे अर्जित अवकाश, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश आदि।

श्रेणी II: वे अवकाश जो भिन्न प्रकार के हैं और Manual of Government Orders, उत्तर प्रदेश के अध्याय 142 के अंतर्गत आते हैं — जैसे आकस्मिक अवकाश, विशेष आकस्मिक अवकाश और प्रतिकर अवकाश।

ध्यान दें: आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) को मूल नियमों के अंतर्गत औपचारिक "अवकाश" की मान्यता नहीं दी गई है — इसे अलग व्यवस्था के तहत रखा गया है, जिसका ब्यौरा नीचे दिया गया है।


अवकाश स्वीकृति के अधिकार किसके पास हैं?

• विशेष विकलांगता अवकाश को छोड़कर, मूल नियमों के अंतर्गत देय अन्य अवकाश शासन के अधीनस्थ उन प्राधिकारियों द्वारा प्रदान किया जा सकता है जिन्हें राज्यपाल नियम या आदेश द्वारा निर्दिष्ट कर दें (मूल नियम 66)

• अराजपत्रित सरकारी सेवकों को अनुमन्य कोई भी अवकाश उस प्राधिकारी द्वारा, जिसका कर्तव्य उस पद को भरने का होता, या वित्तीय नियम संग्रह में उल्लिखित किसी अन्य निम्नतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रतिनिहित अधिकार सीमा के अधीन रहते हुए प्रदान किया जा सकता है (सहायक नियम 35)

• राजपत्रित अधिकारियों को अवकाश देने के लिए साधारणतया शासन की स्वीकृति आवश्यक है, किंतु प्रतिनिहित अधिकार सीमा के अधीन निम्नतर सक्षम प्राधिकारी भी दे सकते हैं (सहायक नियम 36)


वित्तीय हस्त पुस्तिका आधारित अवकाश (9 प्रकार) -

1. अर्जित अवकाश (Earned Leave)

अर्जित अवकाश स्थायी तथा अस्थायी दोनों प्रकार के सरकारी सेवकों द्वारा समान रूप से अर्जित किया जाता है और समान शर्तों के अधीन स्वीकृत होता है (मूल नियम 81-ख(1) )।

• जमा होने की दर: प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को 16 दिन तथा 1 जुलाई को 15 दिन (कुल 31 दिन प्रति वर्ष) जमा होता है

• अधिकतम संचय सीमा: अवकाश खाते में अधिकतम 300 दिन (शासनादेश सं. सा-4-392/दस-94-203-86, दिनांक 1 जुलाई 1999)

• एक बार में स्वीकृति की अधिकतम सीमा: भारत में पूरा अवकाश व्यतीत करने पर 120 दिन, भारत से बाहर पूरा अवकाश व्यतीत करने पर 180 दिन (मूल नियम 81-ख(10) )

• अवकाश वेतन: अवकाश पर प्रस्थान से ठीक पहले प्राप्त वेतन के बराबर (मूल नियम 87-क(1) )


2. निजी कार्य पर अवकाश (Leave on Private Affairs)

यह अवकाश भी अर्जित अवकाश की भांति प्रत्येक कैलेंडर वर्ष के लिए 31 दिन, दो छमाही किश्तों में जमा किया जाता है।

स्थायी सरकारी सेवक:-

• अधिकतम संचय सीमा: 365 दिन

• संपूर्ण सेवाकाल में कुल: 365 दिन

• एक बार में स्वीकृति सीमा: भारत में 90 दिन, भारत से बाहर 180 दिन (मूल नियम 81-ख(3) )

अस्थायी सरकारी सेवक (महत्वपूर्ण अंतर):-

• संपूर्ण अस्थायी सेवाकाल में कुल मिलाकर अधिकतम 120 दिन ही अनुमन्य है, स्थायी सेवकों जैसा 365 दिन का प्रावधान लागू नहीं होता।

• अवकाश खाते में किसी अवसर पर 60 दिन से अधिक जमा नहीं होगा।

• एक बार में स्वीकृति की अधिकतम अवधि 60 दिन।

• यह अवकाश तब तक स्वीकार नहीं होता जब तक कर्मचारी दो वर्ष की निरंतर सेवा पूरी न कर ले (सहायक नियम 157-क(3) )

अवकाश वेतन: अर्जित अवकाश के अनुमन्य अवकाश वेतन की राशि के आधे के बराबर (मूल नियम 87-क(2))


3. चिकित्सा प्रमाण-पत्र पर अवकाश (Leave on Medical Certificate)

• स्थायी सेवक: संपूर्ण सेवाकाल में 12 माह तक असाधारण मामलों में चिकित्सा परिषद की संस्तुति पर अतिरिक्त 6 माह तक (कुल अधिकतम 18 माह) (मूल नियम 81-ख(2) )

• अस्थायी सेवक: जो 3 वर्ष या अधिक समय से निरंतर कार्यरत हों: स्थायी सेवकों के समान 12 माह की सुविधा, लेकिन 12 माह के बाद वाला अतिरिक्त 6 माह का लाभ अनुमन्य नहीं।

• शेष सभी अस्थायी सेवक: संपूर्ण सेवाकाल में 4 माह तक।

अवकाश वेतन: प्रथम 4 माह (स्थायी/3+वर्ष अस्थायी हेतु 12 माह) तक पूर्ण अवकाश वेतन, शेष अवधि के लिए आधा अवकाश वेतन।


4. मातृत्व (प्रसूति) अवकाश

• प्रसूति के मामलों में: प्रसूतावस्था पर अवकाश प्रारंभ होने के दिनांक से 180 दिन तक।

• गर्भपात/गर्भस्राव के मामलों में: प्रत्येक अवसर पर 06 सप्ताह तक (अधिकतम 3 बार अनुमन्य)

• दो या अधिक जीवित बच्चे होने की स्थिति में प्रसूति अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता।

• पुनः प्रसूति अवकाश तभी स्वीकृत होगा जब अंतिम बार स्वीकृत अवकाश समाप्त होने के 2 वर्ष बाद हो।

• यह अवकाश खाते से घटाया नहीं जाता और अन्य अवकाश के साथ मिलाया जा सकता है (मूल नियम 101, सहायक नियम 153, 156)


5. बाल्य देखभाल अवकाश (Child Care Leave)

• संपूर्ण सेवाकाल में अधिकतम 730 दिन।

• संतान की आयु 18 वर्ष होने तक देय।

• एक कैलेंडर वर्ष में 3 बार से अधिक नहीं।

• एक बार में 15 दिन से कम के लिए नहीं दिया जाएगा।

• गोद ली गई संतान पर भी लागू।

• अर्जित अवकाश के समान माना जाता है और उसी प्रकार स्वीकृत होता है।

• सामान्यतः परिवीक्षा अवधि में नहीं दिया जाएगा (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर)


6. असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave)

यह तब स्वीकृत होता है जब अन्य कोई अवकाश देय न हो, या कर्मचारी अन्य अवकाश देय होने पर भी इसके लिए आवेदन करे। यह अवकाश खाते से नहीं घटाया जाता (मूल नियम 85)।

• स्थायी सेवक: एक बार में अधिकतम 5 वर्ष तक।

• अस्थायी सेवक:

परिस्थिति अनुसार सीमाएं अलग — सामान्यतः 3 माह,

3 वर्ष निरंतर सेवा और चिकित्सा प्रमाण-पत्र होने पर 6 माह

क्षय/कुष्ठ रोग के उपचार हेतु 1 वर्ष सेवा पूरी होने पर 18 माह

विदेश/भारत में अध्ययन हेतु (3 वर्ष सेवा पूरी होने पर) संपूर्ण अस्थायी सेवाकाल में अधिकतम 24 माह

• अवकाश वेतन: इस अवधि के लिए कोई अवकाश वेतन देय नहीं है।


7. चिकित्सालय अवकाश (Hospital Leave)

यह केवल उन कर्मचारियों को देय है जिनकी ड्यूटी में खतरनाक मशीनरी, विस्फोटक पदार्थ, जहरीली गैसों आदि से दुर्घटना या बीमारी का विशेष जोखिम हो, और वेतन ₹1180 प्रति माह से अधिक न हो (पुराने वेतनमान में)।

• किसी भी दशा में 3 वर्ष की कालावधि में 6 माह से अधिक स्वीकृत नहीं होगा

• अन्य अवकाश से संयोजित करने पर भी कुल अवधि 28 माह से अधिक नहीं होगी

• अवकाश वेतन: प्रथम 3 माह पूर्ण वेतन, शेष अवधि आधे वेतन पर


8. अध्ययन अवकाश (Study Leave)

जन स्वास्थ्य, चिकित्सा, अनुसंधान, कृषि, शिक्षा, लोक निर्माण तथा वन विभागों में कार्यरत स्थायी सरकारी सेवकों को जनहित में वैज्ञानिक/तकनीकी अध्ययन हेतु दिया जाता है।

• जिन्होंने 5 वर्ष से कम सेवा की हो, या जिन्हें सेवानिवृत्ति का विकल्प 3 वर्ष या उससे कम में अनुमन्य हो, उन्हें सामान्यतः यह अवकाश नहीं दिया जाता

• एक बार में सामान्यतः अधिकतम 12 माह उचित माना जाता है

• संपूर्ण सेवाकाल में कुल मिलाकर अधिकतम 02 वर्ष

• अवकाश वेतन: अर्द्ध वेतन (आधा वेतन) अनुमन्य


9. लघुकृत अवकाश (Commuted Leave)

यह अलग से कोई स्वतंत्र अवकाश नहीं है — मूल नियम 84 के अंतर्गत उच्चतर वैज्ञानिक/तकनीकी अर्हता प्राप्त करने हेतु अध्ययन अवकाश पर जाने वाले स्थायी सरकारी सेवकों के विकल्प पर, निजी कार्य पर अवकाश खाते में जमा अवकाश का आधा हिस्सा लघुकृत अवकाश के रूप में स्वीकृत किया जा सकता है।

• जितनी अवधि का लघुकृत अवकाश स्वीकृत होता है, उसकी दुगुनी अवधि निजी कार्य पर अवकाश खाते से घटाई जाती है

• एशिया में 45 दिन तथा एशिया के बाहर 90 दिन तक एक बार में स्वीकृत किया जा सकता है।

विशेष विकलांगता अवकाश: यह किसी दुर्घटना (कर्तव्य पालन के दौरान चोट लगने) के कारण अस्थायी रूप से विकलांग हुए सरकारी सेवक को दिया जाता है, राज्यपाल द्वारा स्वीकृत। यह चिकित्सा परिषद की संस्तुति पर निर्भर है और 24 माह से अधिक नहीं होगा — प्रथम 4 माह पूर्ण औसत वेतन, शेष अवधि अर्द्ध औसत वेतन पर।


आकस्मिक अवकाश और संबंधित प्रावधान

Manual of Government Orders, उत्तर प्रदेश के अध्याय 142 के अंतर्गत यह श्रेणी आती है।

• आकस्मिक अवकाश (Casual Leave)

मूल नियम के अंतर्गत इसे औपचारिक "अवकाश" की मान्यता नहीं है, इस अवधि में कर्मचारी सभी प्रयोजनों के लिए ड्यूटी पर ही माना जाता है और वेतन देय रहता है

• एक कैलेंडर वर्ष में सामान्यतः 14 दिन दिया जा सकता है

• एक समय में 10 दिन से अधिक केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए

• रविवार व अन्य छुट्टियां यदि आकस्मिक अवकाश के बीच में पड़ती हैं तो उन्हें जोड़ा नहीं जाता, लेकिन आकस्मिक अवकाश के ठीक पहले/बाद संलग्न किया जा सकता है


विशेष आकस्मिक अवकाश

विशेष परिस्थितियों में दिया जाता है और इसका प्रयोग बहुत सीमित रखा जाना चाहिए। कुछ उदाहरण:

• राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय खेलकूद में भाग लेने वाले चयनित खिलाड़ियों को 30 दिन तक।

• मान्यता प्राप्त सेवा संघों के अध्यक्ष/सचिव को वर्ष में अधिकतम 7 दिन, कार्यकारिणी सदस्यों को 4 दिन तक।

प्रतिकर अवकाश (Compensatory Leave)

छुट्टियों में अतिरिक्त कार्य हेतु बुलाए जाने पर अराजपत्रित कर्मचारी को दिया जाता है।

• आधे दिन काम करने पर दो आधे दिन मिलाकर एक प्रतिकर अवकाश मिलता है।

• देय तिथि से 1 माह के भीतर उपयोग करना आवश्यक है।

• एक साथ 2 दिन से अधिक नहीं दिया जाएगा।

• यह केवल अराजपत्रित कर्मचारियों को देय है।


एक महत्वपूर्ण नियम: अवकाश अधिकार नहीं है

मूल नियम 67 के अनुसार यह स्पष्ट है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी अवकाश को इस प्रकार दावे के रूप में नहीं मांग सकता जैसे कि वह उसका अधिकार हो। जनसेवा की आवश्यकता होने पर सक्षम प्राधिकारी किसी भी प्रकार के अवकाश को अस्वीकार या निरस्त करने के लिए पूर्णतः सक्षम है।

इसके अतिरिक्त:

• मूल नियम 69- बिना प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व स्वीकृति के कोई भी सरकारी सेवक अवकाश काल में कोई लाभप्रद व्यवसाय या नौकरी नहीं कर सकता

• मूल नियम 70- जनसेवा के हित में अवकाशाधीन सेवक को वापस बुलाया जा सकता है — 60 दिन से अधिक अवकाश पर गए होने पर कम से कम आधी अवधि, और 60 दिन या उससे कम पर कम से कम 30 दिन का अवकाश निरस्त कराया जाना आवश्यक है

• मूल नियम 73- अवकाश अवधि समाप्त होने के बाद भी अनुपस्थित रहने पर उस अवधि का अवकाश वेतन देय नहीं होगा, और यह गंभीर अनुशासनात्मक विषय बन सकता है

• मूल नियम 55 एवं सहायक नियम 101- निलंबन की अवधि में, या दुराचरण/अक्षमता के कारण सेवा से हटाए जाने की स्थिति लंबित होने पर अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता


अवकाश वेतन का सामान्य सिद्धांत

अवकाश वेतन अवकाश के प्रकार पर निर्भर करता है — यह एक ही दर पर सभी अवकाशों में लागू नहीं होता। सामान्य पैटर्न इस प्रकार है:-

अवकाश प्रकार

अवकाश वेतन

अर्जित अवकाश

पूर्ण वेतन (प्रस्थान से ठीक पूर्व की दर पर)

निजी कार्य पर अवकाश

आधा वेतन

चिकित्सा अवकाश (प्रारंभिक अवधि)

पूर्ण वेतन

असाधारण अवकाश

कोई वेतन नहीं

अध्ययन अवकाश

अर्द्ध वेतन

आकस्मिक अवकाश

पूर्ण वेतन (ड्यूटी माना जाता है)

इसके अतिरिक्त 30 दिन से अधिक के अर्जित अवकाश या निजी कार्य पर अवकाश के मामले में कर्मचारी ब्याज-रहित अवकाश वेतन अग्रिम (advance) प्राप्त करने का पात्र हो सकता है, जिसका समायोजन बाद में वेतन बिल से किया जाता है (शासनादेश सं. ए-1-1668/दस-3-1(4)-65, दिनांक 13 अक्टूबर 1978)।


कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक मतलब

• अवकाश खाता पहले जांचें: आवेदन से पहले यह स्पष्ट करें कि Leave Account में कितना अवकाश उपलब्ध है

• स्वीकृति के बिना अनुपस्थित न हों: आवेदन देना और अवकाश स्वीकृत होना दो अलग बातें हैं

• चिकित्सा अवकाश में प्रमाण-पत्र अनिवार्य है, विशेषकर लंबी अवधि के मामलों में निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया का पालन आवश्यक

• अवधि समाप्त होने से पहले विस्तार हेतु आवेदन करें, अन्यथा वेतन प्रभावित हो सकता है

• अवकाश के प्रकार को स्वयं न बदलें— स्वीकृत करने वाले अधिकारी को भी अवकाश के प्रकार में स्वयं परिवर्तन का अधिकार नहीं है (मूल नियम 87-क)

• अवकाश के दौरान अन्य नौकरी/व्यवसाय से पहले नियम एवं अनुमति की स्थिति स्पष्ट कर लें


आम सवाल (FAQ)

1- क्या मैं जितना चाहूं अर्जित अवकाश जमा कर सकता हूं ?

उत्तर- नहीं। अवकाश खाते में अधिकतम 300 दिन तक ही अर्जित अवकाश जमा हो सकता है। इससे अधिक जमा नहीं होगा, भले ही आप अवकाश न लें।

2- क्या आकस्मिक अवकाश को औपचारिक अवकाश माना जाता है ?

उत्तर- नहीं। मूल नियमों के तहत इसे अवकाश की मान्यता नहीं है।इस अवधि में कर्मचारी ड्यूटी पर ही माना जाता है, इसलिए इसे अवकाश खाते से नहीं घटाया जाता और सामान्य वेतन मिलता रहता है।

3- क्या अस्थायी कर्मचारी को स्थायी कर्मचारी जितना ही अवकाश मिलता है ?

उत्तर- कुछ अवकाशों (जैसे अर्जित अवकाश) में समान अधिकार है, लेकिन निजी कार्य पर अवकाश और चिकित्सा अवकाश जैसे कुछ अवकाशों में अस्थायी कर्मचारियों के लिए सीमाएं अलग और आमतौर पर कम हैं।

4- क्या दो प्रकार के अवकाश को एक साथ जोड़ा जा सकता है ?

उत्तर- हां, मूल नियम 81-ख(6), 83(4) तथा सहायक नियम 157-क(5) और 154 के अंतर्गत एक प्रकार के अवकाश को दूसरे प्रकार के अवकाश के साथ या क्रम में स्वीकृत किया जा सकता है, लेकिन प्रत्येक अवकाश की अपनी शर्तें लागू होंगी।

5- अवकाश स्वीकृत होने के बाद क्या मुझे वापस बुलाया जा सकता है ?

उत्तर- हां, जनसेवा के हित में सक्षम अधिकारी को यह अधिकार है (मूल नियम 70)। ऐसी स्थिति में कुछ शर्तों के अधीन यात्रा भत्ते की पात्रता हो सकती है।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश सरकारी सेवकों के लिए अवकाश व्यवस्था दो व्यापक श्रेणियों — वित्तीय हस्त पुस्तिका आधारित अवकाश (अर्जित, निजी कार्य, चिकित्सा, मातृत्व, बाल्य देखभाल, असाधारण, चिकित्सालय, अध्ययन, लघुकृत एवं विशेष विकलांगता अवकाश) और आकस्मिक/विशेष/प्रतिकर अवकाश — में विभाजित है। प्रत्येक अवकाश की अपनी पात्रता शर्तें, अधिकतम सीमाएं और वेतन-नियम हैं, और एक अवकाश के नियम को दूसरे पर स्वतः लागू नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही, मूल नियम 67 के अनुसार कोई भी अवकाश कर्मचारी का स्वतः अधिकार नहीं है — यह सदैव सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के अधीन है।


स्रोत एवं सत्यापन

इस लेख में दी गई जानकारी वित्त-पथ (अध्याय 4 — अवकाश नियम) पर आधारित है, जो वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड-2 (भाग 2 से 4) में वर्णित मूल नियम एवं सहायक नियमों का सरलीकृत संकलन है। यह दस्तावेज़ वित्तीय प्रबन्ध प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश (IFMTR) द्वारा प्रकाशित है और उत्तर प्रदेश बजट विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है:


अस्वीकरण

वित्त-पथ का उपयोग केवल मार्गदर्शन (guidance) हेतु किया जाना चाहिए। किसी भी बिंदु पर संशय, विवाद अथवा निर्वचन (interpretation) की स्थिति में संबंधित मूल नियमावली, हस्तपुस्तिकाओं एवं शासनादेशों को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए। पाठकों को सलाह दी जाती है कि किसी व्यक्तिगत सेवा-प्रकरण में नवीनतम शासनादेश और सक्षम अधिकारी के आदेश को प्राथमिकता दें।

अंतिम सत्यापन दिनांक: 21 अगस्त 2026

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Shasnadesh Updates Editorial Team

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