शुरुआत में जानिए मामला क्या है।
उत्तर प्रदेश के राजकीय विभागों में तैनात कनिष्ठ सहायक संवर्ग के कर्मचारियों की वेतन विसंगति का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। प्रान्तीय होम्योपैथिक तृतीय श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश, लखनऊ की ओर से महासचिव बासू पाण्डेय ने 26 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष महोदय को एक विस्तृत पत्र भेजा है। इस पत्र में मांग की गई है कि कनिष्ठ सहायकों को दशकों से चली आ रही वेतन विसंगति से राहत देते हुए प्रारंभिक ग्रेड पे ₹2800 और वेतन मैट्रिक्स लेवल-5 प्रदान किया जाए।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई सरकारी आदेश या स्वीकृति नहीं है, बल्कि एक संगठन द्वारा दूसरे संगठन को भेजा गया औपचारिक अनुरोध पत्र है, जिसमें महासंघ स्तर से इस मांग को आगे बढ़ाने की अपील की गई है। इसके बावजूद यह पत्र उन हजारों कनिष्ठ सहायकों के लिए महत्वपूर्ण है जो वर्षों से इस वेतन असमानता को दूर किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
पत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
प्रेषक | श्री बासू पाण्डेय, महासचिव, प्रान्तीय होम्योपैथिक तृतीय श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश, लखनऊ |
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संघ की सम्बद्धता | उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ, जवाहर भवन, लखनऊ। |
प्राप्तकर्ता | अध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ, प्रान्तीय कार्यालय- जवाहर भवन, लखनऊ। |
पत्र का दिनांक | 26 अगस्त 2026 |
विषय | उत्तर प्रदेश के राजकीय विभागों में कार्यरत कनिष्ठ सहायक संवर्ग की दशकों की वेतन विसंगति दूर करते हुए प्रारंभिक ग्रेड पे ₹2800/वेतन मैट्रिक्स लेवल-5 प्रदान किए जाने के संबंध में। |
वर्तमान वेतनमान | कनिष्ठ सहायक पद का प्रारंभिक वेतनमान ग्रेड पे ₹2000/वेतन मैट्रिक्स लेवल-3 |
मांगा गया वेतनमान | ग्रेड पे ₹2800/वेतन मैट्रिक्स लेवल-5 |
पत्र में मुख्य रूप से क्या कहा गया है ?
पत्र की शुरुआत में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों, निदेशालयों, कार्यालयों एवं अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ सहायक संवर्ग शासकीय कार्यालयों की प्रशासनिक एवं लिपिकीय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। कनिष्ठ सहायकों द्वारा कार्यालयों में पत्रावलियों का रख-रखाव व निस्तारण, शासकीय पत्राचार, पत्र व विवरण तैयार करना, अभिलेखों का संधारण, शासनादेशों व उच्चाधिकारियों के निर्देशों का अनुपालन, कंप्यूटर संबंधी कार्य, विभिन्न शासकीय पोर्टलों पर कार्य तथा ई-ऑफिस से जुड़े कार्य किए जाते हैं।
पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि वर्तमान समय में शासकीय कार्यालयों की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव आया है। ई-ऑफिस, विभागीय पोर्टल, डिजिटल अभिलेख, ऑनलाइन पत्राचार और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के संचालन के कारण कनिष्ठ सहायकों के कार्यों की प्रकृति व जिम्मेदारियां पहले की तुलना में काफी बढ़ गई हैं। इसके बावजूद उनका प्रारंभिक वेतनमान ग्रेड पे ₹2000/वेतन मैट्रिक्स लेवल-3 पर ही बना हुआ है।
समान पदों के वेतनमान से तुलना
पत्र में विशेष रूप से आशुलिपिक (Stenographer) पद का उदाहरण दिया गया है। बताया गया है कि विभिन्न सेवा नियमों/भर्ती व्यवस्थाओं में आशुलिपिक पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट के साथ कंप्यूटर, टंकण एवं आशुलिपि जैसी दक्षता है, और इस पद को ₹2800 ग्रेड पे/वेतन मैट्रिक्स लेवल-5 के समकक्ष वेतन संरचना पहले से प्राप्त है।
इसके विपरीत, कनिष्ठ सहायक पद पर भी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट के साथ कंप्यूटर का CCC कोर्स एवं टंकण संबंधी दक्षता अपेक्षित है, और व्यावहारिक रूप से कार्यालयों में अनेक महत्वपूर्ण कंप्यूटर आधारित प्रशासनिक व लिपिकीय कार्य कनिष्ठ सहायकों द्वारा ही किए जाते हैं। पत्र में तर्क दिया गया है कि शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति की प्रकृति, कंप्यूटर व तकनीकी दक्षता, कार्यालयीय कार्यों की प्रकृति, कार्यभार तथा उत्तरदायित्व को समग्र रूप से देखते हुए कनिष्ठ सहायक और समान/सन्निकट लिपिकीय पदों के बीच वर्तमान वेतन अंतर का पुनः परीक्षण किया जाना जरूरी है।
रिक्त पदों का अतिरिक्त कार्यभार भी कनिष्ठ सहायकों पर
पत्र के अनुसार, शासकीय कार्यालयों में विभिन्न कारणों से अनेक लिपिकीय पद समय-समय पर रिक्त रहते हैं। ऐसी स्थिति में कार्यालय की कार्यप्रणाली बाधित न हो, इसके लिए रिक्त पदों से संबंधित कई कार्यों का अतिरिक्त दायित्व व्यवहार में कनिष्ठ सहायक संवर्ग के कार्मिकों द्वारा ही निभाया जाता है। नियमित कार्यों के अतिरिक्त पत्रावली तैयार करना, संचालन, पत्राचार, विभिन्न विवरण व रिपोर्ट तैयार करना, ऑनलाइन पोर्टलों पर सूचनाएं उपलब्ध कराना तथा अभिलेखों का रख-रखाव जैसे कार्य भी वे पूरे करते हैं।
लंबे समय से लंबित मांग।
पत्र में यह भी कहा गया है कि शासन समय-समय पर विभिन्न संवर्गों की सेवा परिस्थितियों, कार्य-दायित्व एवं वेतन संरचना की समीक्षा कर वेतनमानों में संशोधन करता रहा है, लेकिन कनिष्ठ सहायक संवर्ग की प्रारंभिक ग्रेड पे ₹2000 से जुड़ी वेतन विसंगति का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। पत्र में इसे किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं, बल्कि समान कार्य-प्रकृति व उत्तरदायित्व वाले पदों के बीच मौजूद वेतन असमानता को दूर करने की न्यायोचित मांग बताया गया है।
इस मांग से किसे लाभ/प्रभाव होगा ?
यह मांग सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के राजकीय विभागों, निदेशालयों, कार्यालयों एवं अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ सहायक संवर्ग के कर्मचारियों से संबंधित है। यदि भविष्य में यह मांग स्वीकृत होती है, तो इससे कनिष्ठ सहायक पद पर कार्यरत कर्मचारियों का प्रारंभिक वेतनमान ग्रेड पे ₹2000/लेवल-3 से बढ़कर ग्रेड पे ₹2800/लेवल-5 हो सकता है।
कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
फिलहाल इस पत्र को केवल एक मांग या अनुरोध के रूप में देखा जाना चाहिए। इसमें अभी तक निम्न बातें स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि पत्र में इनका उल्लेख नहीं है:-
• शासन स्तर पर इस मांग पर कोई विचार या निर्णय हुआ है या नहीं।
• महासंघ की ओर से इस पर क्या कार्रवाई की गई।
• यदि स्वीकृति मिलती है तो यह कब से प्रभावी होगी।
इसलिए कनिष्ठ सहायक संवर्ग के कर्मचारियों को इस विषय पर आधिकारिक शासनादेश या अधिसूचना जारी होने तक प्रतीक्षा करनी होगी। यह पत्र इस दिशा में उठाया गया एक कदम भर है, अंतिम निर्णय नहीं।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में कनिष्ठ सहायक संवर्ग की वेतन विसंगति का मुद्दा वर्षों से लंबित है, और इसे लेकर एक बार फिर औपचारिक रूप से आवाज उठाई गई है। प्रान्तीय होम्योपैथिक तृतीय श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ ने 26 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ को पत्र भेजकर कनिष्ठ सहायकों को ग्रेड पे ₹2800/वेतन मैट्रिक्स लेवल-5 दिए जाने की मांग की है। यह मांग आशुलिपिक जैसे समान योग्यता वाले पदों के मौजूदा वेतनमान से तुलना, बढ़ते कार्यभार और लंबे समय से चली आ रही असमानता के आधार पर की गई है। अब यह देखना बाकी है कि महासंघ इस मांग को किस स्तर तक आगे बढ़ाता है और शासन की ओर से इस पर क्या रुख अपनाया जाता है।
मूल पत्र
यह लेख 26 अगस्त 2026 को श्री बासू पाण्डेय, महासचिव, प्रान्तीय होम्योपैथिक तृतीय श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष को भेजे गए मूल पत्र पर आधारित है।