लिपिक संवर्ग के सबसे महत्वपूर्ण पद को सबसे कम वेतनमान मिलने पर जताई आपत्ति
उत्तर प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत हजारों कनिष्ठ सहायकों की वर्षों पुरानी वेतन विसंगति को लेकर प्रान्तीय होम्योपैथिक तृतीय श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव श्री बासू पाण्डेय ने आवाज बुलंद करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ, लखनऊ को एक विस्तृत मांग-पत्र भेजकर लिपिक संवर्ग के कनिष्ठ सहायकों का प्रारम्भिक ग्रेड पे ₹2000 (लेवल-3) से बढ़ाकर ₹2800 (लेवल-5) स्वीकृत कराये जाने की मांग की गई है। संघ के प्रदेश महासचिव श्री बासू पाण्डेय का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कनिष्ठ सहायकों के साथ स्पष्ट वेतन असमानता हो रही है। एक ओर लिपिक संवर्ग के अन्य पदों जैसे आशुलिपिक, सहायक लेखाकार एवं अन्य समकक्ष पदों को प्रारम्भिक स्तर पर ही ₹2800 ग्रेड पे (लेवल-5) का लाभ प्राप्त है, वहीं दूसरी ओर कार्यालयों के अधिकांश प्रशासनिक कार्यों का भार संभालने वाले कनिष्ठ सहायकों को मात्र ₹2000 ग्रेड पे (लेवल-3) प्रदान किया जा रहा है।
दशकों से चली आ रही वेतन विसंगति पर उठे सवाल
प्रान्तीय होम्योपैथिक तृतीय श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव श्री बासू पाण्डेय द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि यह केवल वेतन वृद्धि की मांग नहीं है, बल्कि लिपिक संवर्ग के भीतर व्याप्त एक गंभीर वेतन विसंगति का विषय है। वर्षों से कनिष्ठ सहायक शासन और प्रशासन की नीतियों को धरातल पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, लेकिन वेतनमान के मामले में उन्हें अन्य समान श्रेणी के कर्मचारियों की तुलना में कम लाभ दिया जा रहा है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकांश कार्यालयों में कनिष्ठ सहायक ही कार्यालय संचालन की मुख्य धुरी होते हैं। फाइलों का निस्तारण, पत्राचार, स्थापना संबंधी कार्य, सेवा अभिलेखों का रख-रखाव, वेतन निर्धारण, पेंशन संबंधी कार्यवाही, वित्तीय अभिलेखों का संधारण तथा विभिन्न योजनाओं एवं शासनादेशों के अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का दायित्व मुख्य रूप से कनिष्ठ सहायकों के कंधों पर ही रहता है।
रिक्त पदों का अतिरिक्त कार्य भी संभालते हैं कनिष्ठ सहायक
संघ के प्रदेश महासचिव श्री बासू पाण्डेय ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि यदि विभागों में आशुलिपिक, सहायक लेखाकार, स्टोर कीपर तथा अन्य लिपिकीय पद रिक्त पड़े हैं तो ऐसी स्थिति में उन पदों से संबंधित कार्य भी कनिष्ठ सहायकों को ही संपादित करने पड़ते हैं। अर्थात् कई कार्यालयों में कनिष्ठ सहायक न केवल अपने मूल दायित्वों का निर्वहन करते हैं, बल्कि अन्य पदों की जिम्मेदारियां भी संभालते हैं। इसके बावजूद उन्हें उसी अनुपात में वेतनमान और आर्थिक लाभ प्राप्त नहीं हो रहे हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तुलना में भी पिछड़ रहे कनिष्ठ सहायक
पत्र में शासनादेश संख्या वे०आ०-2-2104/दसरा-62(एम)/2008 टीसी दिनांक 22 दिसम्बर 2011 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को समयबद्ध वित्तीय उन्नयन की व्यवस्था के तहत ग्रेड पे ₹1900 को इग्नोर करते हुए ₹2400 ग्रेड पे (लेवल-4) का लाभ दिए जाने का प्रावधान है, इसके विपरीत कनिष्ठ सहायकों को 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा की उपरांत प्रथम एसीपी के रूप में 2400 ग्रेड पे ही प्राप्त होता है, उक्त स्थिति भी कनिष्ठ सहायकों के लिए एक गंभीर वेतन विसंगति है। संघ का कहना है कि यह स्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण है कि लिपिक संवर्ग के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ वेतनमान के स्तर पर न्यायसंगत व्यवहार नहीं हो रहा है।
तृतीय श्रेणी कर्मचारियों में सबसे निम्न वेतनमान का दावा
संघ के प्रदेश महासचिव श्रीबासू पाण्डेय के अनुसार वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश सरकार के तृतीय श्रेणी संवर्ग के अंतर्गत आने वाले अधिकांश पदों की तुलना में कनिष्ठ सहायकों का प्रारम्भिक वेतनमान सबसे कम है। जबकि विभागीय कार्यों के संचालन, अभिलेख प्रबंधन, वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। संघ का मानना है कि कार्यभार, जिम्मेदारियों तथा विभागीय योगदान को देखते हुए कनिष्ठ सहायकों को भी लिपिक संवर्ग के अन्य पदों के समान ₹2800 ग्रेड पे (लेवल-5) का लाभ दिया जाना चाहिए।
महासंघ से शासन स्तर पर मामला उठाने की मांग
प्रदेश महासचिव बासू पाण्डेय द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष से अनुरोध किया गया है कि कनिष्ठ सहायकों की इस मांग को महासंघ के आधिकारिक मांग-पत्र में शामिल कर उत्तर प्रदेश शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। संघ का कहना है कि यदि कनिष्ठ सहायकों का प्रारम्भिक ग्रेड पे ₹2800 (लेवल-5) स्वीकृत किया जाता है तो इससे न केवल वर्षों पुरानी वेतन विसंगति दूर होगी, बल्कि प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को आर्थिक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी लाभ मिलेगा तथा प्रशासनिक कार्यों की दक्षता में वृद्धि होगी।
निष्कर्ष
कनिष्ठ सहायकों की ग्रेड पे वृद्धि की यह मांग केवल वेतन बढ़ाने का विषय नहीं बल्कि समान कार्य के लिए समान वेतन और प्रशासनिक न्याय का प्रश्न बन चुकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कर्मचारी महासंघ और उत्तर प्रदेश शासन इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो प्रदेश के हजारों कनिष्ठ सहायकों को सीधा लाभ मिल सकता है और लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति का समाधान संभव हो सकेगा।
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