लेखपालों के लिए नई व्यवस्था स्थापित
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने ग्राम स्तर पर आम नागरिकों को राजस्व सेवाएं अधिक सुगमता से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इस निर्देश के अनुसार अब प्रत्येक जनपद में लेखपालों के लिए ग्राम सचिवालय में बैठने की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उनकी उपस्थिति का रोस्टर तैयार कर 1 जुलाई 2026 से इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व संबंधी कार्यों को तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
क्या है पूरा मामला?
राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश के आयुक्त एवं सचिव द्वारा सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि ग्राम पंचायतों में पहले से स्थापित ग्राम सचिवालय का उद्देश्य विभिन्न विभागों की सेवाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।
पत्र में वर्ष 2021 के पंचायत राज विभाग के शासनादेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें ग्राम सचिवालय को ग्राम स्तर पर प्रशासनिक सेवाओं का साझा केंद्र बनाने की परिकल्पना की गई थी। उसी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।
ग्राम सचिवालय में लेखपाल की उपस्थिति क्यों जरूरी?
लेखपाल ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व विभाग की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। अधिकांश भूमि एवं राजस्व संबंधी मामलों की प्रारंभिक जांच, सत्यापन और रिपोर्ट लेखपाल द्वारा ही तैयार की जाती है।
इसके अलावा कई सरकारी योजनाओं और प्रमाणपत्रों के लिए भी लेखपाल की रिपोर्ट आवश्यक होती है। यदि लेखपाल ग्राम सचिवालय में नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगे तो ग्रामीणों को समय पर सेवाएं प्राप्त होंगी और लंबित मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी।
किन कार्यों में मिलेगी सुविधा?
पत्र में उल्लेखित जानकारी के अनुसार लेखपाल की नियमित उपलब्धता से निम्नलिखित कार्यों में नागरिकों को लाभ मिलने की संभावना है—
• आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र से संबंधित सत्यापन।
• खतौनी एवं भूमि अभिलेखों से जुड़े कार्य।
• भूमि सीमांकन एवं भू-नक्शा संबंधी प्रक्रियाएं।
• खसरा पड़ताल एवं फील्ड जांच।
• फसल बीमा से संबंधित रिपोर्ट।
• प्राकृतिक आपदा से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करना।
• किसान सम्मान निधि से जुड़े सत्यापन कार्य।
• वृद्धावस्था पेंशन एवं अन्य योजनाओं के सत्यापन।
• धारा 34 एवं धारा 67 जैसे राजस्व मामलों की प्रारंभिक कार्रवाई।
• अवैध कब्जों एवं सरकारी भूमि से जुड़े मामलों की जांच।
• राशन वितरण एवं धान-गेहूं क्रय केंद्रों के सत्यापन जैसे प्रशासनिक कार्य।
इन कार्यों के लिए अब ग्रामीणों को लेखपाल की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम होगी।
जिलाधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए हैं?
राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने जनपद में लेखपालों के ग्राम सचिवालय में बैठने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही प्रत्येक लेखपाल की उपस्थिति का रोस्टर भी तैयार किया जाए ताकि ग्रामीणों को पहले से जानकारी रहे कि किस दिन संबंधित लेखपाल ग्राम सचिवालय में उपलब्ध रहेंगे।
यदि किसी जनपद में इस व्यवस्था को लागू करने में कोई प्रशासनिक कठिनाई आती है तो उसकी सूचना 30 जून 2026 तक राजस्व परिषद को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि निर्धारित तिथि तक कोई सूचना प्राप्त नहीं होती है तो यह माना जाएगा कि संबंधित जनपद में 1 जुलाई 2026 से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।
ग्रामीणों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीणों को कई प्रकार की सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
• तहसील के अनावश्यक चक्कर कम लगेंगे।
• समय और यात्रा व्यय की बचत होगी।
• भूमि एवं राजस्व संबंधी मामलों का निस्तारण तेज होगा।
• सरकारी योजनाओं के सत्यापन में तेजी आएगी।
• शिकायतों एवं आवेदन पत्रों पर शीघ्र कार्रवाई संभव होगी।
• ग्राम सचिवालय की उपयोगिता और अधिक बढ़ेगी।
प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत
ग्राम सचिवालय की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर विभिन्न सरकारी सेवाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। पंचायत सहायक, सचिव, रोजगार सेवक तथा अन्य कर्मचारियों के साथ यदि लेखपाल भी नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगे तो ग्राम सचिवालय वास्तव में ग्रामीण प्रशासन का प्रभावी सेवा केंद्र बन सकेगा।
इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के बजाय एक ही स्थान पर आवश्यक सेवाएं प्राप्त करने में सुविधा होगी।
01 जुलाई 2026 से होगा प्रभावी अनुपालन
पत्र के अनुसार यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू की जानी है। जिलाधिकारियों को समय से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। रोस्टर तैयार होने के बाद संबंधित लेखपाल निर्धारित दिवस पर ग्राम सचिवालय में बैठेंगे और नागरिकों के राजस्व संबंधी कार्यों का निस्तारण करेंगे।
निष्कर्ष
राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश का यह निर्णय ग्रामीण प्रशासन को अधिक जवाबदेह एवं नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि सभी जनपदों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो लाखों ग्रामीणों को राजस्व सेवाएं अपने गांव के नजदीक ही उपलब्ध हो सकेंगी। इससे सरकारी योजनाओं के सत्यापन, भूमि संबंधी विवादों के प्रारंभिक निस्तारण तथा प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया में भी तेजी आने की उम्मीद है।
नोट: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक पत्र में दी गई जानकारी का सरल एवं स्वतंत्र (कॉपीराइट-फ्री) समाचारात्मक प्रस्तुतीकरण है। पाठकों को किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले संबंधित विभाग द्वारा जारी मूल आदेश का अवलोकन अवश्य करना चाहिए।
आधिकारिक स्रोत
राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश, लखनऊ का पत्र संख्या: 3111/4-विविध ए/2022 दिनांक: 25 जून 2026
विषय: ग्राम सचिवालय में लेखपाल को बैठने की सुविधा प्रदान किए जाने के संबंध में।