उत्तर प्रदेश अवकाश यात्रा सुविधा (LTC) नियम 2026
उत्तर प्रदेश शासन के वित्त (सामान्य) अनुभाग-2 ने 31 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है, जिसमें राज्य कर्मचारियों को मिलने वाली अवकाश यात्रा सुविधा (Leave Travel Concession/LTC) की अनुमन्यता से जुड़ी शर्तों में संशोधन किया गया है। यह आदेश वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार द्वारा जारी किया गया है और इसे शासन के सभी विभागों, कोषाधिकारियों तथा महालेखाकार कार्यालय को भेजा गया है।
इस शासनादेश का सीधा संबंध उन सभी राज्य कर्मचारियों से है जो अवकाश यात्रा सुविधा का लाभ लेते हैं। पहले इस सुविधा का उपयोग करने के लिए कर्मचारी को एक निश्चित शर्त पूरी करनी पड़ती थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। साथ ही, एक ऐसी सुविधा भी अब जोड़ी गई है जो पहले राज्य कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं थी।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
बिंदु | विवरण |
|---|---|
आदेश का विषय | अवकाश यात्रा सुविधा की अनुमन्यता हेतु पूर्व की व्यवस्था/निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबन्धों में संशोधन। |
विभाग | वित्त (सामान्य) अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन। |
शासनादेश संख्या | 5/2026/जी-2-115/दस/2026/604-82 टी0सी0 |
शासनादेश की तारीख | 31 जुलाई 2026 |
लागू होने की तारीख | शासनादेश निर्गत होने की तिथि से (अर्थात 31 जुलाई 2026 से) |
संबंधित कर्मचारी/लाभार्थी | उत्तर प्रदेश शासन के वे कर्मचारी जिन्हें अवकाश यात्रा सुविधा अनुमन्य है। |
संदर्भित पूर्व शासनादेश | दिनांक 18 मार्च 1996 (सं0-सा-4-62/दस-96-604-82) एवं दिनांक 27 मई 2014 (सं0-1/जी-2-39/दस-2014/604-82 टी0सी0) |
मुख्य बदलाव | 15 दिन उपार्जित अवकाश उपभोग की अनिवार्यता समाप्त; अधिकतम 10 दिन के स्वीकृत अर्जित अवकाश पर अवकाश नकदीकरण अनुमन्य |
इस शासनादेश में क्या कहा गया है?
शासनादेश के अनुसार, 18 मार्च 1996 और 27 मई 2014 को जारी पूर्व शासनादेशों तथा समय-समय पर जारी अन्य आदेशों के तहत निर्धारित अवकाश यात्रा सुविधा की व्यवस्था की समीक्षा की गई। यह समीक्षा वेतन समिति (2016) की संस्तुतियों पर विचार करने हेतु गठित समिति के निर्णय के आधार पर की गई। इसी समीक्षा के परिणामस्वरूप वित्त विभाग ने दो प्रमुख बिंदुओं पर संशोधन किया है।
• पहला बदलाव — 1996 के शासनादेश के अनुलग्नक के बिंदु संख्या-8 (अवकाश की प्रकृति एवं नकदीकरण की अनुमन्यता) के अनुसार अवकाश यात्रा सुविधा का लाभ उठाने के लिए कर्मचारी को न्यूनतम 15 दिन का उपार्जित अवकाश उपभोग करना अनिवार्य था। नए आदेश में इस अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
• दूसरा बदलाव — पहले राज्य सरकार की अवकाश यात्रा सुविधा केंद्र सरकार की व्यवस्था से इस मायने में अलग थी कि राज्य कर्मचारियों को इस सुविधा के दौरान अवकाश नकदीकरण की अनुमति नहीं थी। अब अवकाश यात्रा सुविधा के लिए स्वीकृत अर्जित अवकाश (अधिकतम 10 दिन) पर अवकाश नकदीकरण की अनुमन्यता प्रदान कर दी गई है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवकाश यात्रा सुविधा से संबंधित अन्य सभी शर्तें और प्रतिबंध, जो पूर्व में शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए हैं, यथावत लागू रहेंगे। यानी इन दो बिंदुओं के अलावा शेष नियमों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
किसे लाभ मिलेगा?
उपलब्ध आदेश के अनुसार यह संशोधन उत्तर प्रदेश शासन के उन समस्त कर्मचारियों पर लागू होगा जिन्हें अवकाश यात्रा सुविधा पहले से अनुमन्य है। आदेश की प्रतिलिपि समस्त विभागाध्यक्षों/प्रमुख कार्यालयाध्यक्षों तथा समस्त कोषाधिकारियों/वरिष्ठ कोषाधिकारियों को भेजी गई है, जिससे स्पष्ट है कि यह आदेश राज्य सरकार के सभी विभागों में लागू होने वाला व्यापक आदेश है।
किसे लाभ नहीं मिलेगा?
शासनादेश में ऐसे किसी विशेष वर्ग या श्रेणी के कर्मचारियों का उल्लेख नहीं है जिन्हें इस संशोधन से बाहर रखा गया हो। हालांकि, अवकाश यात्रा सुविधा की मूल पात्रता (जैसे कि यह सुविधा किन्हें, कितनी बार और किन शर्तों पर मिलती है) मूल रूप से 1996 और 2014 के शासनादेशों में निर्धारित है, और वे सभी मूल शर्तें अब भी यथावत लागू हैं। यानी जिन कर्मचारियों को पूर्व से ही यह सुविधा अनुमन्य नहीं थी, उन्हें केवल इस संशोधन से यह सुविधा नहीं मिल जाएगी।
क्या बदलाव हुआ? (पुरानी बनाम नई व्यवस्था)
बिंदु | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था (31 जुलाई 2026 से) |
|---|---|---|
उपार्जित अवकाश उपभोग की अनिवार्यता | न्यूनतम 15 दिन का उपार्जित अवकाश उपभोग करना अनिवार्य था | यह अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त |
अवकाश नकदीकरण | अनुमन्य नहीं था (केंद्र सरकार के कर्मचारियों से भिन्न व्यवस्था) | अधिकतम 10 दिन के स्वीकृत अर्जित अवकाश पर अनुमन्य |
अन्य शर्तें/प्रतिबंध | 1996 व 2014 के शासनादेशों के अनुसार | यथावत, कोई परिवर्तन नहीं |
कर्मचारियों/लाभार्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
• इस संशोधन का सबसे बड़ा व्यावहारिक असर यह है कि अब कर्मचारी को अवकाश यात्रा सुविधा का लाभ लेने के लिए पहले से 15 दिन की छुट्टी "उपभोग" करने की बाध्यता नहीं झेलनी पड़ेगी। पहले कई कर्मचारी केवल इस शर्त के कारण सुविधा का लाभ नहीं ले पाते थे, क्योंकि सभी को इतनी लंबी अवधि की छुट्टी लेना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता था। यह शर्त हटने से अधिक कर्मचारी इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे।
• दूसरा असर आर्थिक है — अब तक राज्य कर्मचारियों को अवकाश यात्रा सुविधा के दौरान अवकाश नकदीकरण नहीं मिलता था, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को यह सुविधा पहले से प्राप्त थी। अब राज्य कर्मचारियों को भी अधिकतम 10 दिन के अर्जित अवकाश पर नकदीकरण की अनुमति मिलने से उन्हें अतिरिक्त नकद लाभ मिलेगा।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी कर्मचारी के पास पर्याप्त उपार्जित अवकाश (Earned Leave) जमा है और वह अवकाश यात्रा सुविधा का लाभ लेना चाहता है।
• पुरानी व्यवस्था में: उसे इस सुविधा का लाभ लेने से पहले कम से कम 15 दिन की छुट्टी वास्तव में उपभोग करनी पड़ती थी, तभी वह पात्र माना जाता था।
• नई व्यवस्था में: यह 15 दिन की शर्त हट गई है। साथ ही, अगर उसकी अवकाश यात्रा सुविधा के लिए अधिकतम 10 दिन का अर्जित अवकाश स्वीकृत होता है, तो वह उस अवकाश के बदले नकदीकरण (यानी उस अवधि का नकद भुगतान) भी प्राप्त कर सकता है।
• ध्यान रहे — शासनादेश में नकदीकरण की सटीक राशि, गणना का सूत्र (formula) या दर का उल्लेख नहीं है। यह गणना कर्मचारी के वेतन, महंगाई भत्ते और संबंधित सेवा नियमों के अनुसार होती है, जिसकी जानकारी संबंधित आदेश में उपलब्ध नहीं है।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
• अवकाश नकदीकरण केवल अधिकतम 10 दिन के स्वीकृत अर्जित अवकाश पर ही अनुमन्य है, इससे अधिक पर नहीं।
• 1996 और 2014 के शासनादेशों की अन्य सभी शर्तें और प्रतिबंध यथावत लागू रहेंगे — यानी पात्रता, आवृत्ति (frequency), दूरी, श्रेणी आदि से जुड़े मूल नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
• यह व्यवस्था शासनादेश निर्गत होने की तिथि से ही प्रभावी होगी, अर्थात पूर्वव्यापी (retrospective) प्रभाव का कोई उल्लेख आदेश में नहीं है।
• यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है, इसलिए इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है। इसकी प्रामाणिकता वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।
अब क्या करना होगा ?
आदेश में कर्मचारियों के लिए किसी विशेष आवेदन-प्रक्रिया या फॉर्म का उल्लेख नहीं है। सामान्यतः अवकाश यात्रा सुविधा एवं अवकाश नकदीकरण का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को अपने संबंधित कार्यालय/आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जैसा कि पूर्व के 1996 व 2014 के शासनादेशों में निर्धारित है। सटीक प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों को अपने विभाग या कोषाधिकारी कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसका विस्तृत विवरण इस शासनादेश में उपलब्ध नहीं है।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
1. यह नया नियम कब से लागू हुआ है?
उत्तर- यह शासनादेश 31 जुलाई 2026 को जारी हुआ है और आदेश के अनुसार यह उसी तिथि से प्रभावी है।
2. क्या अब अवकाश यात्रा सुविधा के लिए 15 दिन की छुट्टी लेना जरूरी है?
उत्तर- नहीं, इस शासनादेश के बाद 15 दिन के उपार्जित अवकाश उपभोग की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
3. अवकाश नकदीकरण कितने दिनों के अवकाश पर मिलेगा?
उत्तर- अवकाश यात्रा सुविधा के लिए स्वीकृत अर्जित अवकाश में से अधिकतम 10 दिन पर अवकाश नकदीकरण अनुमन्य होगा।
4. क्या यह सुविधा केंद्र सरकार के कर्मचारियों जैसी हो गई है?
उत्तर- आदेश में इतना ही कहा गया है कि पहले राज्य कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह अवकाश नकदीकरण की सुविधा नहीं थी, और अब यह प्रदान की जा रही है। पूर्ण रूप से दोनों व्यवस्थाएं समान हैं या नहीं, इसका उल्लेख आदेश में नहीं है।
5. क्या अवकाश यात्रा सुविधा की अन्य शर्तें भी बदली हैं?
उत्तर- नहीं, आदेश के अनुसार शेष सभी शर्तें एवं प्रतिबंध यथावत रहेंगे।
6. यह शासनादेश किस विभाग ने जारी किया है?
उत्तर- यह वित्त (सामान्य) अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी किया गया है और इस पर अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार के हस्ताक्षर (इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी) हैं।
7. क्या यह आदेश सभी विभागों के कर्मचारियों पर लागू है?
उत्तर- हां, आदेश की प्रतिलिपि समस्त विभागाध्यक्षों और कोषाधिकारियों को भेजी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह आदेश राज्यव्यापी है।
8. इस आदेश की प्रामाणिकता कैसे जांचें?
उत्तर- इस शासनादेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in पर जाकर सत्यापित की जा सकती है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश शासन के इस शासनादेश (संख्या-5/2026/जी-2-115/दस/2026/604-82 टी0सी0, दिनांक 31 जुलाई 2026) के माध्यम से अवकाश यात्रा सुविधा को कर्मचारियों के लिए अधिक सुगम और लाभकारी बनाया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब 15 दिन की अनिवार्य अवकाश उपभोग शर्त समाप्त हो गई है, और साथ ही अधिकतम 10 दिन के अर्जित अवकाश पर नकदीकरण की सुविधा भी मिल सकेगी। हालांकि, अन्य सभी पूर्व निर्धारित शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी, इसलिए कर्मचारियों को अपनी पूर्ण पात्रता जानने के लिए 1996 और 2014 के मूल शासनादेशों को भी संदर्भ के रूप में देखना चाहिए।
आधिकारिक स्रोत
यह जानकारी वित्त (सामान्य) अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दिनांक 31 जुलाई 2026 को जारी शासनादेश संख्या-5/2026/जी-2-115/दस/2026/604-82 टी0सी0 पर आधारित है। इस शासनादेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।