अब तक विभागों में बजट आवंटन का आदेश कंप्यूटर से तैयार होने के बाद उसकी हार्ड कॉपी कोषागार (Treasury) में भेजी जाती थी। कोषागार उस सत्यापित प्रति के आधार पर अपने सिस्टम में बजट को लोड या अपडेट करता था। इस पूरी प्रक्रिया में कई बार हार्ड कॉपी समय पर नहीं पहुंचती थी, जिससे भुगतान में देरी होती थी और योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित होता था। इसी समस्या को देखते हुए वित्त विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के अनुसार अब क्या बदलेगा?
1. बजट आवंटन आदेश सीधे डिजिटल रूप से मान्य होगा, अब "budgetallot" एप्लीकेशन में तैयार किया गया और डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) से प्रमाणित बजट आवंटन आदेश ही मान्य होगा। जैसे ही आदेश जनरेट होगा, वह स्वतः संबंधित कोषागार के सिस्टम में उपलब्ध हो जाएगा।
2. हार्ड कॉपी जमा करने की व्यवस्था समाप्त वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बजट आवंटन आदेश की सत्यापित हार्ड कॉपी कोषागार में जमा करने की पुरानी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। अब किसी प्रकार की कागजी प्रति देने की आवश्यकता नहीं होगी।
3. भुगतान प्रक्रिया होगी तेज-
नई व्यवस्था लागू होने के बाद भुगतान में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी।
योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
विभागों और कोषागार के बीच फाइलों के आवागमन की जरूरत खत्म होगी।
पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी।
डिजिटल सिग्नेचर (DSC) कराना होगा अनिवार्य।
वित्त विभाग ने यह भी पाया कि कई विभागों के सुपर यूजर अभी तक अपना Digital Signature Certificate (DSC) पंजीकृत नहीं करा पाए हैं। ऐसे में शासन ने निर्देश दिया है कि जिन विभागों के सुपर यूजर का DSC अभी तक पंजीकृत नहीं हुआ है, वे इसे 15 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पंजीकृत करा लें।
यदि DSC पंजीकरण नहीं कराया तो क्या होगा?
शासनादेश के अनुसार बिना डिजिटल हस्ताक्षर के बजट आवंटन आदेश जनरेट नहीं होगा। यदि समय सीमा के भीतर DSC पंजीकरण नहीं कराया गया, तो उससे उत्पन्न किसी भी प्रकार की असुविधा के लिए संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।
शासनादेश की मुख्य बातें एक नजर में
✅ बजट आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी।
✅ हार्ड कॉपी जमा करने की व्यवस्था समाप्त।
✅ Budgetallot एप्लीकेशन से आदेश स्वतः कोषागार में अपडेट होगा।
✅ डिजिटल हस्ताक्षर (DSC) अनिवार्य किया गया।
✅ 15 जून 2026 तक DSC पंजीकरण पूरा करना होगा।
✅ भुगतान प्रक्रिया में तेजी आएगी और योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी कम होगी।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ई-गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी विभागों में कागजी कार्यवाही कम होगी, भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और बजट आवंटन से जुड़ी व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेंगी। यदि आप वित्त एवं लेखा सेवा, कोषागार या किसी सरकारी विभाग में कार्यरत हैं, तो यह शासनादेश आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। समय रहते DSC पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर लेना आवश्यक होगा।
नोट: शासनादेश की प्रमाणिकता की पुष्टि उत्तर प्रदेश शासन की आधिकारिक वेबसाइट https://shasanadesh.up.gov.in/ से की जा सकती है।
Source of above metioned facts is- shasanadesh.up.gov.in