क्या है नए शासनादेश का मुख्य उद्देश्य?
सरकार की ओर से जारी निर्देशों का मुख्य उद्देश्य यह है कि हाईकोर्ट में राज्य सरकार से जुड़े मामलों की पैरवी में किसी तरह की देरी न हो और न्यायालय से आने वाले आदेशों पर निर्धारित समय के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
न्याय विभाग के अनुसार, हाईकोर्ट में लंबित सरकारी मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए पहले से कुछ दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। शासन के संज्ञान में आया कि इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है।
इसी को देखते हुए संबंधित विभागों को पुराने शासनादेश का प्रभावी ढंग से अनुपालन कराने के लिए दोबारा निर्देश दिए गए हैं। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी मामलों की प्रभावी पैरवी नहीं होने से हाईकोर्ट के सामने असहज स्थिति पैदा हो सकती है।
नोडल अधिकारी को क्या करना होगा?
सरकारी मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए विभागों में नामित नोडल अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
शासनादेश के अनुसार, नोडल अधिकारी को अपने विभाग से संबंधित रिट याचिकाओं के मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए राज्य विधि अधिकारी से तत्काल समन्वय स्थापित करना होगा।
इसके साथ ही निर्धारित सुनवाई की तारीख से 03 कार्यदिवस पहले तक प्रति-शपथ पत्र (Counter Affidavit) तैयार कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
इसका सीधा मतलब यह है कि संबंधित विभागों को मुकदमे की तारीख आने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी पूरी करनी होगी।
नोडल अधिकारी की जानकारी वेबसाइट पर अपडेट करनी होगी
शासनादेश में विभागीय अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव को भी निर्देश दिए गए हैं।
इन अधिकारियों को अपने विभाग की वेबसाइट पर नामित नोडल अधिकारी का टेलीफोन नंबर और ई-मेल आईडी उपलब्ध कराने तथा उसे निर्धारित समय के भीतर अपडेट करने को कहा गया है।
इसके लिए शासनादेश में 03 कार्यदिवस की समयसीमा निर्धारित की गई है।
इस संबंध में विभागीय वेबसाइट पर नामित नोडल अधिकारी का टेलीफोन नंबर और ई-मेल आईडी 03 कार्यदिवस में अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट के आदेश मिलने के बाद 3 कार्यदिवस में कार्रवाई
शासनादेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश, स्थगन आदेश अथवा वादकालीन आदेशों से जुड़ा है।
यदि न्यायालय का आदेश शासन की नीतियों, नियमों और शासनादेशों के अनुरूप है तो उसके अनुपालन की कार्रवाई आदेश प्राप्त होने के अगले 03 कार्यदिवस के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यानी किसी मामले में कोर्ट का ऐसा आदेश प्राप्त होता है जिसे सरकार की मौजूदा नीति और नियमों के अनुसार लागू किया जा सकता है, तो संबंधित विभाग को उसे अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखना होगा।
सरकार के नियमों के विपरीत आदेश होने पर क्या होगा?
अगर न्यायालय का कोई आदेश शासन की नीतियों, नियमों या शासनादेशों के विपरीत है अथवा मामले में कोई कानूनी कठिनाई सामने आती है, तो भी संबंधित अधिकारियों को समय से कार्रवाई करनी होगी।
ऐसी स्थिति में आदेश की जानकारी मिलने के 03 कार्यदिवस के भीतर आवश्यक कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें मामले के अनुसार रिट याचिका, रिकॉल प्रार्थना पत्र, पुनर्विचार प्रार्थना पत्र, विशेष अपील अथवा विशेष अनुमति याचिका आदि के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई करके अंतरिम या स्थगन आदेश प्राप्त करने की प्रभावी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
अवमानना मामलों में भी समयसीमा तय
शासनादेश में अवमानना याचिकाओं से संबंधित मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
यदि किसी अवमानना मामले में शासन या विभाग से संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है, तो संबंधित अधिकारी को उस आदेश के अनुपालन की स्थिति अथवा अनुपालन नहीं किए जाने के कारणों को स्पष्ट रूप से बताते हुए न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से प्रति-शपथ पत्र दाखिल करना होगा।
इसके लिए अवमानना वाद दाखिल होने की सूचना प्राप्त होने के 03 कार्यदिवस के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, बशर्ते न्यायालय की ओर से कोई अलग आदेश न हो।
छुट्टी के बाद सुनवाई वाले मामलों में पहले से तैयारी
शासनादेश में सार्वजनिक अवकाश के कारण अगले कार्यदिवस पर लगने वाले मामलों के लिए भी अलग व्यवस्था बताई गई है।
यदि कोई मामला सार्वजनिक अवकाश के अगले कार्यदिवस पर निर्धारित है तो संबंधित आवश्यक कार्रवाई अवकाश से 02 दिन पहले पूरी करने को कहा गया है।
वहीं सामान्य कार्यदिवस में किसी मामले की सुनवाई निर्धारित होने पर आवश्यक कार्रवाई और औपचारिकताएं 03 दिन पहले पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी संबंधित अधिकारियों को पालन के निर्देश
न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि उपरोक्त दिशा-निर्देशों के साथ-साथ 08 जुलाई 2022 को जारी शासनादेश का भी अनिवार्य रूप से अनुपालन कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
यह शासनादेश उत्तर प्रदेश शासन के न्याय एवं विधि परामर्शी विभाग की ओर से जारी किया गया है। इसमें प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी उदय प्रताप सिंह के स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं।
शासनादेश का आसान भाषा में सार
अगर इस पूरे शासनादेश को आसान शब्दों में समझें तो सरकार का मुख्य जोर इन बातों पर है—
• हाईकोर्ट में लंबित सरकारी मुकदमों की प्रभावी पैरवी की जाए।
• नोडल अधिकारी राज्य विधि अधिकारी से समय पर समन्वय करें।
• सुनवाई की तारीख से पहले प्रति-शपथ पत्र तैयार कराया जाए।
• नोडल अधिकारी का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी विभागीय वेबसाइट पर अपडेट रखी जाए।
• कोर्ट के अनुकूल आदेशों का निर्धारित समय में अनुपालन किया जाए।
• सरकार की नीति या नियमों के विपरीत आदेश होने पर समय से उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
• अवमानना मामलों में भी निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रति-शपथ पत्र दाखिल किया जाए।
• सार्वजनिक अवकाश और सामान्य कार्यदिवस में लगने वाले मामलों की तैयारी पहले से पूरी की जाए।
शासनादेश की जानकारी
विभाग: न्याय विभाग, उत्तर प्रदेश शासन
शासनादेश संख्या: 6/2026/सा0-48/सात-न्याय-अनु0/प्रको0/2026
जारी करने की तिथि: 07 अगस्त 2026
मुख्य विषय: हाईकोर्ट में लंबित शासकीय वादों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी पैरवी एवं 08 जुलाई 2022 के शासनादेश का अनुपालन
प्रमुख सचिव: उदय प्रताप सिंह
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश शासन का यह निर्देश मुख्य रूप से सरकारी मुकदमों में होने वाली देरी को कम करने और न्यायालय में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। खास तौर पर 03 कार्यदिवस की समयसीमा कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए तय की गई है। शासनादेश में संबंधित विभागों को सुनवाई से पहले आवश्यक कार्रवाई, न्यायालय के आदेशों के अनुपालन तथा आवश्यकता होने पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के संबंध में समयसीमा के साथ निर्देश दिए गए हैं।
नोट: यह लेख उपलब्ध शासनादेश के आधार पर आसान भाषा में तैयार किया गया है। किसी मामले में कानूनी कार्रवाई करने से पहले संबंधित विभाग/विधि अधिकारी से वास्तविक आदेश और लागू नियमों की पुष्टि करना उचित रहेगा।
आधिकारिक सत्यापन: शासनादेश में इसकी प्रमाणिकता उत्तर प्रदेश शासन की आधिकारिक वेबसाइट "shasanadesh.up.gov.in" से सत्यापित करने का उल्लेख किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. उत्तर प्रदेश का यह शासनादेश कब और किस विषय में जारी हुआ है?
उत्तर- यह शासनादेश 07 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश शासन के न्याय विभाग द्वारा जारी किया गया है। इसका मुख्य विषय हाईकोर्ट में लंबित शासकीय वादों का त्वरित निस्तारण, प्रभावी पैरवी और 08 जुलाई 2022 के पूर्व शासनादेश का अनिवार्य रूप से अनुपालन सुनिश्चित करना है।
2. नोडल अधिकारियों को क्या-क्या जिम्मेदारी दी गई है?
उत्तर- नोडल अधिकारी को संबंधित रिट याचिकाओं के मामलों में राज्य विधि अधिकारी से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। निर्धारित सुनवाई की तारीख से 03 कार्यदिवस पहले प्रति-शपथ पत्र तैयार कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही विभागीय वेबसाइट पर नोडल अधिकारी का टेलीफोन नंबर और ई-मेल आईडी अपडेट रखने के निर्देश दिए गए हैं।
3. हाईकोर्ट के आदेश मिलने के बाद विभाग को कितने समय में कार्रवाई करनी होगी?
उत्तर- यदि न्यायालय का अंतरिम, स्थगन या वादकालीन आदेश शासन की नीतियों, नियमों और शासनादेशों के अनुरूप है, तो उसके अनुपालन की कार्रवाई आदेश प्राप्त होने के अगले 03 कार्यदिवस के भीतर सुनिश्चित करनी होगी। यदि आदेश शासन की नीति या नियमों के विपरीत है अथवा कानूनी कठिनाई है, तो भी 03 कार्यदिवस के भीतर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
4. अवमानना मामलों और सुनवाई की तारीख से पहले की तैयारी को लेकर क्या निर्देश हैं?
उत्तर- अवमानना मामले में यदि संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है, तो अवमानना वाद दाखिल होने की सूचना के 03 कार्यदिवस के भीतर अनुपालन की स्थिति या अनुपालन न होने के कारणों को स्पष्ट करते हुए प्रति-शपथ पत्र दाखिल करना होगा, जब तक न्यायालय का कोई अलग आदेश न हो। वहीं सार्वजनिक अवकाश के अगले कार्यदिवस पर सुनवाई होने वाले मामलों की आवश्यक कार्रवाई 02 दिन पहले और सामान्य कार्यदिवस में निर्धारित सुनवाई वाले मामलों की तैयारी 03 दिन पहले पूरी करने के निर्देश हैं।
5. क्या 08 जुलाई 2022 का शासनादेश भी लागू रहेगा?
उत्तर- हाँ। 07 अगस्त 2026 के इस शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ऊपर बताए गए दिशा-निर्देशों के साथ 08 जुलाई 2022 को जारी शासनादेश का अनिवार्य रूप से अनुपालन कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। इसका उद्देश्य सरकारी वादों में प्रभावी पैरवी और समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।