शासनादेश की प्रमुख बातें
इस शासनादेश में बताया गया है कि पहले जारी आदेश दिनांक 19 नवंबर 2024 के अनुसार, जिन कर्मचारियों को NPS से OPS में आने की अनुमति दी गई थी, उनके NPS खाते में उपलब्ध धनराशि को समय से GPF खाते में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को यह भी निर्देशित किया गया था कि धनराशि और उस पर देय ब्याज का पूरा विवरण महालेखाकार को उपलब्ध कराया जाए।
लेकिन कई मामलों में यह पाया गया कि GPF खाते में धनराशि स्थानांतरित होने की वास्तविक तिथि तक का ब्याज अभी तक समायोजित नहीं हो पाया था। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने यह नया शासनादेश जारी किया है।
अब ब्याज का समायोजन कैसे होगा?
शासनादेश के अनुसार अब ब्याज की गणना और समायोजन एक निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
सबसे पहले जीपीएफ अभिदाता का ब्याज आगणन सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार किया जाएगा। इसके लिए संबंधित DDO को आवश्यक विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा।
इसके बाद NSDL के CRA सिस्टम से NPS Transaction Statement (Tier-I Account) की CSV File डाउनलोड की जाएगी। यही फाइल आगे की पूरी प्रक्रिया का आधार बनेगी।
DDO चाहे तो इस CSV File को सीधे सॉफ्टवेयर में अपलोड कर सकता है या फिर मैनुअली भी आवश्यक प्रविष्टियां कर सकता है। हालांकि शासन ने स्पष्ट किया है कि मैनुअल प्रविष्टि करते समय विशेष सावधानी बरती जाए ताकि कोई त्रुटि न हो।
सॉफ्टवेयर से तैयार होगी ब्याज आगणन शीट
CSV File अपलोड होने के बाद सॉफ्टवेयर स्वतः ब्याज आगणन शीट तैयार करेगा।
इस शीट पर अभिदाता तथा आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर होंगे। इसके बाद यही दस्तावेज कार्यालय में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्यालयाध्यक्ष द्वारा अनुमोदन मिलने के बाद इसी आधार पर Whole Transfer Bill तैयार किया जाएगा और कोषागार में प्रस्तुत किया जाएगा।
GPF खाते में कैसे जोड़ी जाएगी ब्याज राशि?
शासनादेश के अनुसार, कर्मचारी के GPF पासबुक में पहले मूलधन (Principal) दर्ज किया जाएगा।
इसके बाद अलग से ब्याज की राशि GPF खाते में समायोजित की जाएगी। जिस तिथि तक मूलधन कर्मचारी अंशदान के रूप में जमा माना गया है, उसी तिथि तक का ब्याज भी जोड़ा जाएगा।
यानी कर्मचारी को उसका पूरा वैध ब्याज प्राप्त हो सके, इसके लिए शासन ने स्पष्ट व्यवस्था लागू की है।
कार्यालय अभिलेख में भी रहेगा पूरा रिकॉर्ड
शासन ने निर्देश दिया है कि ब्याज आगणन शीट की एक प्रति कार्यालय के अभिलेखों में सुरक्षित रखी जाएगी।
भविष्य में यदि किसी प्रकार का ऑडिट या सत्यापन किया जाता है तो यही दस्तावेज प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाएगा।
इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
महालेखाकार की भूमिका
इस शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आगे की अवधि से संबंधित सभी कार्यवाही महालेखाकार, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रचलित नियमों के अनुसार की जाएगी।
अर्थात प्रारंभिक ब्याज समायोजन के बाद भविष्य की GPF लेखा प्रक्रिया महालेखाकार कार्यालय के माध्यम से सामान्य नियमों के अनुसार संचालित होगी।
ब्याज व्यय किस मद से होगा?
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ब्याज भुगतान पर होने वाला व्यय वित्त विभाग के निर्धारित बजट मद से किया जाएगा।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि संबंधित कर्मचारियों को ब्याज भुगतान में किसी प्रकार की वित्तीय बाधा न आए।
किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
इस शासनादेश का लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा—
• जिन्हें NPS से OPS में स्थानांतरित किया गया है।
• जिनकी NPS की राशि GPF खाते में स्थानांतरित हो चुकी है या स्थानांतरण की प्रक्रिया जारी है।
• जिनके GPF खाते में अभी तक ब्याज राशि का पूर्ण समायोजन नहीं हुआ है।
DDO और कार्यालयाध्यक्ष को क्या करना होगा?
शासनादेश के अनुसार संबंधित DDO को समय से आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा।
उन्हें NPS Transaction Statement डाउनलोड कर सॉफ्टवेयर में अपलोड करना होगा तथा तैयार आगणन शीट का सत्यापन करना होगा।
इसके बाद कार्यालयाध्यक्ष अनुमोदन जारी करेंगे और Whole Transfer Bill तैयार कर कोषागार को भेजा जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही से बचने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शासनादेश क्यों है महत्वपूर्ण?
काफी समय से OPS में वापस आए कर्मचारियों के बीच यह प्रश्न बना हुआ था कि NPS खाते में जमा धनराशि पर स्थानांतरण अवधि तक मिलने वाले ब्याज का समायोजन कैसे होगा।
अब राज्य सरकार ने स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। इससे कर्मचारियों के GPF खातों में ब्याज जोड़ने की प्रक्रिया एक समान होगी और अनावश्यक विवादों की संभावना भी कम होगी।
निष्कर्ष
07 जुलाई 2026 को जारी यह शासनादेश NPS से OPS में आए कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आया है। अब GPF खाते में ब्याज राशि समायोजन की पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित, पारदर्शी और निर्धारित चरणों के अनुसार होगी। इससे कर्मचारियों को उनका वैध ब्याज समय पर प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी तथा विभागों में भी एकरूपता बनी रहेगी।
Disclaimer
इस लेख में दी गई जानकारी उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी आधिकारिक शासनादेश के आधार पर तैयार की गई है। पाठकों की सुविधा के लिए शासनादेश की भाषा को सरल एवं सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यद्यपि जानकारी की शुद्धता बनाए रखने का पूरा प्रयास किया गया है, फिर भी किसी भी प्रशासनिक, वित्तीय या कानूनी निर्णय लेने से पहले संबंधित आधिकारिक शासनादेश एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नवीनतम निर्देशों का अवश्य अवलोकन करें।
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