NPS से OPS में आए कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: GPF खाते में ब्याज जोड़ने की नई प्रक्रिया लागू
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NPS से OPS में आए कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: GPF खाते में ब्याज जोड़ने की नई प्रक्रिया लागू

NPS से OPS में आए कर्मचारियों के GPF खाते में ब्याज जोड़ने की नई प्रक्रिया, उत्तर प्रदेश सरकार का नया शासनादेश। उत्तर प्रदेश सरकार ने NPS से OPS में स्थानांतरित कर्मचारियों के GPF खाते में ब्याज जोड़ने की नई प्रक्रिया जारी की। जानिए पूरा नियम और प्रक्रिया।

📅 8 जुलाई 2026 ·👁 24 views

पोस्ट दिनांक- 08 जुलाई 2026

लेखक- शासनादेश टीम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से पुरानी पेंशन योजना (OPS) में स्थानांतरित कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया है कि ऐसे कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (GPF) खातों को किस प्रकार अद्यतन किया जाएगा तथा कर्मचारी अंशदान पर देय ब्याज की गणना किस प्रक्रिया से की जाएगी।

यह व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्हें सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद NPS से OPS में शामिल किया गया है। लंबे समय से यह प्रश्न उठ रहा था कि NPS में जमा कर्मचारी अंशदान और उस पर देय ब्याज का समायोजन किस प्रकार होगा। अब शासन द्वारा जारी नई प्रक्रिया से इस विषय में स्पष्टता आ गई है।

शासनादेश जारी होने का उद्देश्य

जब कोई कर्मचारी NPS से OPS में स्थानांतरित होता है, तब उसके NPS खाते में जमा कर्मचारी अंशदान को GPF खाते में स्थानांतरित किया जाता है। हालांकि, केवल मूलधन का हस्तांतरण पर्याप्त नहीं माना गया। इस अवधि के दौरान कर्मचारी अंशदान पर बनने वाले ब्याज का भी सही तरीके से आकलन आवश्यक था।

महालेखाकार कार्यालय द्वारा इस विषय पर कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया गया था। इसके बाद शासन ने विस्तृत विचार-विमर्श कर नई प्रक्रिया निर्धारित की है ताकि सभी संबंधित विभाग एक समान तरीके से कार्यवाही कर सकें।

ब्याज की गणना कैसे होगी?

नई व्यवस्था के अनुसार कर्मचारी अंशदान पर ब्याज की गणना उस तिथि तक की जाएगी, जिस दिन कर्मचारी का अंशदान NPS से GPF खाते में स्थानांतरित किया गया है।

इस पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल प्रणाली अपनाई जाएगी। इससे विभिन्न कार्यालयों में अलग-अलग तरीके से गणना करने की आवश्यकता समाप्त होगी और सभी कर्मचारियों के लिए एक समान प्रक्रिया लागू रहेगी।

DDO की क्या होगी जिम्मेदारी?

शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्हें कर्मचारी के NPS खाते से संबंधित आवश्यक विवरण प्राप्त करना होगा तथा निर्धारित प्रारूप में उसका उपयोग करना होगा।

DDO यह सुनिश्चित करेंगे कि कर्मचारी की NPS Transaction Statement सही रूप में उपलब्ध हो तथा उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपयोग में लाया जाए। यदि आवश्यक हो तो मासिक विवरण का सत्यापन भी किया जाएगा।

CSV File का होगा उपयोग

नई व्यवस्था में कर्मचारी के NPS Transaction Statement से प्राप्त CSV File का उपयोग किया जाएगा।

यदि यह फाइल उपलब्ध है तो उसे सीधे निर्धारित सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा। इससे प्रत्येक माह के कर्मचारी अंशदान की जानकारी स्वतः पढ़ी जाएगी और ब्याज की गणना भी अधिक सटीक रूप से हो सकेगी।

जहां किसी कारणवश CSV File उपलब्ध न हो, वहां आवश्यक विवरण मैनुअली भी दर्ज किया जा सकेगा। हालांकि शासन ने डिजिटल अपलोड को प्राथमिकता देने की बात कही है।

विशेष सॉफ्टवेयर से होगी ब्याज गणना

ब्याज की गणना के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा, जिसे कोषागार विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।

यह सॉफ्टवेयर कर्मचारी अंशदान का विश्लेषण कर निर्धारित नियमों के अनुसार ब्याज की गणना करेगा। इससे गणना में मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी कम हो जाएगी।

गणना पत्र पर संयुक्त हस्ताक्षर

सॉफ्टवेयर द्वारा तैयार की गई ब्याज गणना शीट को डाउनलोड किया जाएगा।

इसके बाद संबंधित अभिदाता तथा आहरण एवं वितरण अधिकारी संयुक्त रूप से उस पर हस्ताक्षर करेंगे ताकि गणना की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके।

यह प्रक्रिया भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अथवा लेखा संबंधी आपत्ति से बचाने में सहायक होगी।

कार्यालयाध्यक्ष की भूमिका

जब ब्याज की गणना पूर्ण हो जाएगी, तब कार्यालयाध्यक्ष द्वारा आवश्यक स्वीकृति आदेश जारी किया जाएगा।

स्वीकृति मिलने के बाद GPF खाते में ब्याज की धनराशि स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक वित्तीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इसके माध्यम से कर्मचारी के GPF खाते में मूलधन के साथ ब्याज भी समायोजित किया जा सकेगा।

GPF पासबुक में होगी प्रविष्टि

शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित कर्मचारी की GPF पासबुक में मूलधन और ब्याज की प्रविष्टि की जाएगी।

इससे कर्मचारी को भविष्य में अपने खाते की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देगी तथा रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रहेगा।

अभिलेख सुरक्षित रखना होगा

सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि ब्याज गणना से जुड़े दस्तावेजों एवं रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए।

यह व्यवस्था भविष्य में ऑडिट, निरीक्षण अथवा किसी प्रशासनिक जांच के समय उपयोगी सिद्ध होगी।

महालेखाकार कार्यालय की भूमिका

महालेखाकार कार्यालय आगे भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक लेखा परीक्षण एवं अन्य औपचारिक कार्यवाही करेगा।

इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि GPF खाते में किया गया समायोजन शासन के नियमों के अनुरूप हो।

कर्मचारियों को क्या लाभ मिलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने से NPS से OPS में आए कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे—

• कर्मचारी अंशदान पर देय ब्याज का स्पष्ट निर्धारण होगा।

• GPF खाते का अद्यतन समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

• डिजिटल प्रक्रिया से त्रुटियों में कमी आएगी।

• सभी विभागों में एक समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

• रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित रहेगा।

• भविष्य में ऑडिट संबंधी समस्याएं कम होंगी।

• कर्मचारियों को अपने GPF खाते की वास्तविक स्थिति का लाभ मिलेगा।

Official website- https://shasanadesh.up.gov.in

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी यह नया शासनादेश NPS से OPS में स्थानांतरित कर्मचारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे कर्मचारी अंशदान पर ब्याज की गणना, रिकॉर्ड संधारण तथा GPF खाते में राशि के समायोजन की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है। डिजिटल प्रणाली, CSV File आधारित गणना, संयुक्त सत्यापन तथा कार्यालयाध्यक्ष की स्वीकृति जैसी व्यवस्थाएं इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और व्यवस्थित बनाएंगी। इससे न केवल कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, बल्कि विभागों के लिए भी कार्य निष्पादन सरल होगा।

Disclaimer (अस्वीकरण)

इस लेख में दी गई जानकारी उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी आधिकारिक शासनादेश एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के अध्ययन और विश्लेषण के आधार पर सरल भाषा में प्रस्तुत की गई है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यद्यपि जानकारी को यथासंभव सही एवं अद्यतन रखने का प्रयास किया गया है, फिर भी किसी भी प्रशासनिक, वित्तीय अथवा कानूनी निर्णय से पूर्व संबंधित विभाग द्वारा जारी मूल शासनादेश, अधिसूचना अथवा आधिकारिक आदेश का अवलोकन अवश्य करें।

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