प्रमुख निर्देश
• सभी पंचायत सचिवालयों में उपलब्ध डेस्कटॉप कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और वेबकैम को तीन कार्य दिवस के भीतर पूर्ण रूप से चालू (Functional) करने के निर्देश दिए गए हैं।
• नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी एवं संबंधित अधिकारी प्रतिदिन डैशबोर्ड के माध्यम से उपस्थिति की निगरानी करेंगे।
• यदि कोई कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति या स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित पाया जाता है अथवा फेस स्कैन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करता है, तो उसे उस दिन अनुपस्थित मानते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
• मोबाइल आधारित उपस्थिति व्यवस्था भी जारी रहेगी। यदि किसी पंचायत सहायक के पास मोबाइल उपलब्ध नहीं है या अन्य तकनीकी समस्या है, तो वह डेस्कटॉप वेबकैम के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकेगा।
कब से लागू होगी व्यवस्था?
निर्देशों के अनुसार इस नई प्रणाली का परीक्षण 1 जुलाई 2026 से 10 जुलाई 2026 तक जनपद लखनऊ के चयनित विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में किया जाएगा। परीक्षण सफल होने के बाद 11 जुलाई 2026 से इसे प्रदेश के सभी जनपदों में लागू (Go-Live) करने की तैयारी की गई है।
क्या होगा इसका प्रभाव?
नई व्यवस्था लागू होने से उपस्थिति प्रणाली अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है। विभाग का मानना है कि इससे समय पर उपस्थिति सुनिश्चित होगी, फर्जी उपस्थिति की संभावना कम होगी तथा पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों की निगरानी और बेहतर हो सकेगी।
क्या है नई व्यवस्था?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायत सचिवालयों में स्थापित डेस्कटॉप कंप्यूटर और उससे जुड़े वेबकैम का उपयोग कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जाएगा। कर्मचारी कार्यालय पहुंचने के बाद वेबकैम के सामने अपना चेहरा स्कैन कर उपस्थिति दर्ज करेंगे। इससे उपस्थिति रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और उसकी ऑनलाइन निगरानी भी संभव होगी।
मोबाइल एप की व्यवस्था भी रहेगी जारी
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मोबाइल आधारित उपस्थिति प्रणाली समाप्त नहीं की जा रही है। पहले की तरह मोबाइल एप के माध्यम से भी उपस्थिति दर्ज की जा सकेगी। जिन कर्मचारियों के पास मोबाइल उपलब्ध नहीं है या किसी तकनीकी कारण से मोबाइल एप काम नहीं कर रहा है, वे सचिवालय में स्थापित वेबकैम के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।
तीन कार्य दिवस में पूरी करनी होगी तैयारी
जारी निर्देशों में सभी जिलों के अधिकारियों को पंचायत सचिवालयों में उपलब्ध डेस्कटॉप कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा वेबकैम को अगले तीन कार्य दिवसों के भीतर पूरी तरह कार्यशील (Functional) बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं उपकरण या इंटरनेट में कोई कमी है तो उसे तत्काल दूर करने के लिए कहा गया है।
उपस्थिति की होगी ऑनलाइन निगरानी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी तथा संबंधित सहायक विकास अधिकारी प्रतिदिन ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से पंचायत कर्मचारियों की उपस्थिति की समीक्षा करेंगे। इससे यह आसानी से पता चल सकेगा कि किस कर्मचारी ने समय पर उपस्थिति दर्ज की है और किसने नहीं।
अनुपस्थिति पर हो सकती है कार्रवाई
निर्देशों के अनुसार यदि कोई कर्मचारी बिना पूर्व स्वीकृति अथवा अनुमोदित अवकाश के अनुपस्थित पाया जाता है या निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फेस स्कैन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करता है, तो उसे उस दिन अनुपस्थित माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
पहले होगा परीक्षण, फिर पूरे प्रदेश में लागू होगी व्यवस्था
नई फेस रिकॉग्निशन आधारित उपस्थिति प्रणाली का परीक्षण 1 जुलाई 2026 से 10 जुलाई 2026 तक जनपद लखनऊ के चयनित विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर 11 जुलाई 2026 से इसे उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में लागू (Go-Live) करने की योजना बनाई गई है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम पंचायत स्तर पर डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। फेस रिकॉग्निशन आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, निगरानी आसान होगी तथा सरकारी कार्यों में जवाबदेही और अनुशासन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो 11 जुलाई 2026 से यह व्यवस्था पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लागू हो जाएगी।
Disclaimer:
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