क्या है पूरा मामला?
राजकीय मेडिकल कॉलेज, आजमगढ़ में अग्निशमन एवं विद्युत सुरक्षा के अतिरिक्त कार्यों के लिए ₹1223.23 लाख का आगणन उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद परियोजना की P.F.A.D. द्वारा आकलित लागत ₹1156.87 लाख के आधार पर प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई।
इसी के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 में परियोजना की प्रथम किस्त के रूप में ₹150 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
परियोजना की राशि एक नजर में
• उपलब्ध कराया गया आगणन- ₹1223.23 लाख
• P.F.A.D. द्वारा आकलित लागत- ₹1156.87 लाख
• स्वीकृत परियोजना लागत- ₹11.5687 करोड़
• वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम किस्त- ₹150 लाख यानी ₹1.50 करोड़
महत्वपूर्ण:
₹11.5687 करोड़ परियोजना की स्वीकृत लागत है, जबकि ₹1.50 करोड़ इस परियोजना के लिए प्रथम किस्त की वित्तीय स्वीकृति है। दोनों राशियों को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।
पहली किस्त के रूप में कितनी राशि स्वीकृत हुई?
शासनादेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में परियोजना की प्रथम किस्त के रूप में ₹150.00 लाख (₹1 करोड़ 50 लाख) की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह राशि संबंधित बजट प्रावधान के सापेक्ष स्वीकृत की गई है।
दूसरी किस्त से पहले क्या प्रक्रिया होगी?
शासनादेश में परियोजना की आगामी किस्तों के संबंध में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी गई है। वित्त विभाग के 17 मई 2023 के शासनादेश के अनुसार प्रथम किस्त मूल्यांकित लागत के आधार पर जारी की जाएगी। द्वितीय किस्त जारी करने से पहले परियोजना की लागत को निविदा में प्राप्त मूल्य (Tender Cost) के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पुनरीक्षित कराया जाएगा।
इसके बाद परियोजना की आगे की किस्तें पुनरीक्षित लागत के आधार पर ही जारी की जाएंगी। यदि निविदा के बाद कार्य की लागत कम होती है, तो बची हुई धनराशि को संबंधित वित्तीय नियमों के अनुसार राजकोष में जमा करना होगा।
निर्माण कार्य शुरू करने से पहले तकनीकी स्वीकृति जरूरी
शासनादेश के अनुसार परियोजना के लिए सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। साथ ही संबंधित वित्त विभाग के शासनादेशों में दिए गए आवश्यक निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
GST को लेकर क्या निर्देश दिए गए हैं?
परियोजना के आगणन में 18 प्रतिशत की दर से GST की धनराशि शामिल की गई है। शासनादेश के अनुसार प्रधानाचार्य/कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी होगी कि भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार GST का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। निर्माण कार्यों में वास्तविक रूप से खपत हुई मुख्य सामग्री, जैसे सीमेंट और स्टील आदि, की मात्रा का अनुपातिक/मानक मिलान करते हुए GST का भुगतान किया जाना होगा।
निर्माण शुरू करने से पहले जरूरी मंजूरियां लेनी होंगी
परियोजना के तहत प्रस्तावित निर्माण कार्य शुरू करने से पहले नियमानुसार आवश्यक वैधानिक अनापत्तियां एवं पर्यावरणीय क्लीयरेंस सक्षम स्तर से प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
कार्य की मात्रा और Specifications में बदलाव के लिए क्या नियम है?
शासनादेश के अनुसार परियोजना में प्रस्तावित कार्यों की मात्राओं एवं विशिष्टियों को यथावत रखते हुए लागत का अनुमोदन किया गया है। निर्माण के समय निर्धारित मात्राओं को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य/कार्यदायी संस्था की होगी।
परियोजना में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन—जैसे नया कार्य शामिल करना, कार्यों के आकार में वृद्धि या अन्य उच्च विशिष्टियों का इस्तेमाल सक्षम स्तर की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
एक ही कार्य के लिए दोहरी स्वीकृति नहीं होगी
शासनादेश में प्रस्तावित कार्यों की द्विरावृत्ति (Duplicate Work) रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
परियोजना स्वीकृत करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना है कि संबंधित कार्य पहले से स्वीकृत न हो और वर्तमान में किसी अन्य योजना/कार्यक्रम में शामिल किए जाने का प्रस्ताव भी न हो।
कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
शासनादेश के अनुसार कार्य की गुणवत्ता, निर्धारित मानक एवं विशिष्टियों को बनाए रखने और परियोजना को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य/कार्यदायी संस्था की होगी।
स्वीकृत राशि का दूसरे काम में उपयोग नहीं होगा
स्वीकृत धनराशि का खर्च उन्हीं कार्यों/मदों में किया जाएगा, जिनके लिए राशि स्वीकृत की गई है।
किसी दूसरे कार्य या मद में इस राशि का उपयोग अथवा व्ययावर्तन वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।
धनराशि का आहरण और उपयोग कैसे होगा?
अवमुक्त की जाने वाली धनराशि का आहरण एवं व्यय आवश्यकतानुसार किया जाएगा। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत धनराशि को बैंक या डाकघर आदि में नहीं रखा जाएगा। अवमुक्त धनराशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराना होगा।
वित्तीय अनियमितता होने पर कौन जिम्मेदार होगा?
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता होने पर उसके लिए प्रधानाचार्य/कार्यदायी संस्था स्वयं उत्तरदायी होंगे।
सेंटेज चार्ज और लेबर सेस से संबंधित निर्देश
शासनादेश के अनुसार कार्यदायी संस्था को आगणन में अनुमोदित सीमा तक ही सेंटेज चार्ज दिया जाएगा।
इसके अलावा आगणन में वर्णित लेबर सेस की धनराशि तभी अनुमन्य होगी, जब संबंधित राशि का भुगतान श्रम विभाग को किया जाएगा।
₹1.50 करोड़ का बजट किस मद में खर्च होगा?
शासनादेश के अनुसार ₹1,50,00,000 यानी ₹1.50 करोड़ का व्यय वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक में निम्न के अंतर्गत दर्ज किया जाएगा:
अनुदान संख्या: 031
लेखा शीर्षक: 4210031055100
नाम: राजकीय मेडिकल कॉलेज, आजमगढ़
मानक मद: 24 – वृहत् निर्माण कार्य
वित्त विभाग की सहमति के बाद जारी हुआ शासनादेश
शासनादेश में बताया गया है कि यह आदेश वित्त विभाग की सहमति के आधार पर जारी किया गया है। इसमें वित्त विभाग के FINRMS सिस्टम से उत्पन्न संख्या ई-3-54/दस-2026-27, दिनांक 27 जुलाई 2026 में प्राप्त सहमति का उल्लेख किया गया है।
आसान भाषा में समझें पूरा मामला
सरल शब्दों में, राजकीय मेडिकल कॉलेज, आजमगढ़ में अग्निशमन एवं विद्युत सुरक्षा के अतिरिक्त कार्यों के लिए ₹1223.23 लाख का आगणन उपलब्ध कराया गया था। P.F.A.D. द्वारा आकलित लागत ₹1156.87 लाख यानी ₹11.5687 करोड़ के आधार पर परियोजना को प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस परियोजना के लिए पहली किस्त के रूप में ₹1.50 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। आगे की किस्त जारी करने से पहले निविदा में प्राप्त वास्तविक लागत के आधार पर परियोजना लागत को पुनरीक्षित कराने की व्यवस्था शासनादेश में दी गई है।
निर्माण कार्य शुरू करने से पहले तकनीकी स्वीकृति और आवश्यक वैधानिक/पर्यावरणीय क्लीयरेंस प्राप्त करना होगा। स्वीकृत राशि का इस्तेमाल केवल निर्धारित कार्यों में किया जा सकेगा और कार्य की गुणवत्ता तथा समय-सीमा की जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाचार्य/कार्यदायी संस्था की होगी।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज, आजमगढ़ में अग्निशमन एवं विद्युत सुरक्षा के अतिरिक्त कार्यों के लिए ₹1156.87 लाख यानी ₹11.5687 करोड़ की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रथम किस्त के रूप में ₹1.50 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई है शासनादेश में तकनीकी स्वीकृति, निविदा के बाद लागत के पुनरीक्षण, GST, आवश्यक क्लीयरेंस, कार्य की गुणवत्ता, निर्धारित मद में खर्च और उपयोगिता प्रमाण-पत्र सहित कई शर्तें निर्धारित की गई हैं।
मूल शासनादेश
यह लेख चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी शासनादेश संख्या 108/2026/।/1424163/2026/71-1002(002)/23/2026, दिनांक 06 अगस्त 2026 के आधार पर तैयार किया गया है। शासनादेश में इसकी प्रमाणिकता उत्तर प्रदेश शासन की वेबसाइट से सत्यापित किए जाने का उल्लेख है।
Disclaimer
यह लेख संबंधित उत्तर प्रदेश शासनादेश के आधार पर सामान्य सूचना एवं जनहित के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रशासनिक, वित्तीय, निर्माण या अन्य आधिकारिक कार्यवाही के लिए मूल शासनादेश एवं संबंधित विभाग के नवीनतम निर्देशों को प्राथमिकता दें। शासनादेश में भविष्य में कोई संशोधन या परिवर्तन होने पर नवीनतम आधिकारिक आदेश ही मान्य होगा।