उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस0पी0 गोयल ने 7 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण और 'सर्वोच्च प्राथमिकता' श्रेणी का आदेश जारी किया है, जिसमें राज्य के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सांसदों तथा राज्य विधान मंडल के सदस्यों (विधायक/विधान परिषद सदस्य) के प्रति शिष्टाचार, प्रोटोकॉल और सौजन्यपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें साफ बताया गया है कि पिछले कई वर्षों से इस विषय पर बार-बार आदेश जारी होने के बावजूद कुछ अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा माननीय सदस्यों के फोन कॉल न उठाने और प्रोटोकॉल का पालन न करने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। अब इस पर सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यह लेख सामान्य नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों — सभी के लिए उपयोगी है, क्योंकि यह बताता है कि सरकार जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार को लेकर कितनी गंभीर है और नियमों का उल्लंघन करने पर क्या परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
बिंदु | विवरण |
|---|---|
आदेश का विषय | मा0 संसद-सदस्यों/राज्य विधान मंडल के मा0 सदस्यों के प्रति शिष्टाचार/अनुमन्य प्रोटोकॉल एवं सौजन्य प्रदर्शन का अनुपालन। |
विभाग | संसदीय शिष्टाचार/पत्राचार कार्यान्वयन अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन। |
आदेश संख्या | 03/2026/142/90-सं0शि0प0का0/2026-38(नियम)/2026 |
आदेश की तारीख | 07 मई 2026 |
प्राथमिकता श्रेणी | "महत्वपूर्ण/सर्वोच्च प्राथमिकता" |
संबंधित पक्ष | उत्तर प्रदेश शासन के समस्त अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, पुलिस महानिदेशक, समस्त मंडलायुक्त/जिलाधिकारी तथा उनके अधीनस्थ सभी अधिकारी/कर्मचारी (जिन पर आदेश लागू है); मा0 संसद सदस्य/विधान मंडल सदस्य (जिनके प्रति शिष्टाचार सुनिश्चित करना है) |
मुख्य बिंदु | प्रोटोकॉल उल्लंघन को "दुराचरण" मानते हुए अनुशासनिक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान। |
इस आदेश में क्या कहा गया है?
आदेश की शुरुआत में मुख्य सचिव ने 2017 से 2026 तक जारी कुल 15 पूर्ववर्ती शासनादेशों का संदर्भ दिया है, जिनके माध्यम से संसद सदस्यों/विधान मंडल सदस्यों के प्रति शिष्टाचार और प्रोटोकॉल पालन को लेकर पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यह बात संज्ञान में आई है कि कुछ अधिकारी/कर्मचारी इन निर्देशों का कड़ाई से पालन नहीं कर रहे हैं — विशेष रूप से माननीय सदस्यों के फोन कॉल न उठाए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। यह प्रकरण माननीय सदन/पीठ तथा माननीय संसदीय अनुश्रवण समिति के समक्ष भी बार-बार उठाया जा रहा है, जिसे आदेश में "अत्यंत खेदजनक" बताया गया है।
इसके बाद आदेश में स्पष्ट और विस्तृत निर्देश दिए गए हैं, जिनका सार इस प्रकार है:-
• अधिकारियों को माननीय सदस्यों का CUG नंबर या उनके द्वारा दिया गया अन्य मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से अपने फोन में सेव/संरक्षित करना होगा।
सदस्य की कॉल आने पर उसे रिसीव करना अनिवार्य होगा।
• यदि अधिकारी बैठक में व्यस्त या अनुपलब्ध हो, तो कॉल की जानकारी मिलते ही सबसे पहले प्राथमिकता पर सदस्य को मैसेज भेजकर जल्द से जल्द कॉल-बैक करना होगा।
• सदस्यों के फोन कॉल पर प्राप्त प्रकरणों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करते हुए उन्हें इसकी जानकारी देनी होगी।
• यदि कोई सदस्य जनहित के कार्यों के संबंध में किसी अधिकारी/कर्मचारी से मिलने आता है, तो उसे अपनी सीट से खड़े होकर सम्मानपूर्वक स्वागत करना होगा और सम्मानपूर्वक जल ग्रहण हेतु आग्रह करना होगा।
• सदस्यों से बातचीत के दौरान उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनकर यथासंभव समस्या का समाधान करना होगा, और मिलने के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करना होगा।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि माननीय जनप्रतिनिधि "सब्सिडियरी वारंट ऑफ प्रिसीडेंस" में एक निर्धारित प्रास्थिति (स्थान) रखते हैं, इसलिए उनके साथ शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन शीर्ष प्राथमिकता पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
किसे यह आदेश लागू होता है?
यह आदेश उत्तर प्रदेश शासन के समस्त अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, पुलिस महानिदेशक, समस्त मंडलायुक्त/जिलाधिकारी तथा उनके अधीनस्थ सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होता है। आदेश में स्पष्ट निर्देश है कि इन दिशा-निर्देशों की जानकारी अधीनस्थ समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों तक पहुंचाई जाए।
प्रोटोकॉल उल्लंघन पर क्या कार्रवाई होगी?
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिष्टाचार संबंधी शासन के निर्देशों का उल्लंघन उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के नियम-3(2) की परिधि में आता है। इस नियम के अनुसार हर सरकारी कर्मचारी को हर समय व्यवहार और आचरण को नियंत्रित करने वाले विशिष्ट या अंतर्निहित शासकीय आदेशों के अनुसार आचरण करना होता है।
आदेश में यह भी बताया गया है कि सरकारी सेवक का कोई भी अनुचित व्यवहार, जानबूझकर की गई गलती या आचरण के मानक नियमों का जानबूझकर उल्लंघन "दुराचरण" माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी/कर्मचारी को नियम-3(2) के उल्लंघन का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी।
क्या बदलाव हुआ?
यह आदेश किसी नई नीति की शुरुआत नहीं है, बल्कि 2017 से 2026 तक जारी हो चुके 15 शासनादेशों के अनुपालन में आई कमी को दूर करने के लिए जारी किया गया एक सख्त अनुस्मारक (reminder) है। मुख्य अंतर यह है कि इस बार आदेश को "सर्वोच्च प्राथमिकता" श्रेणी में रखा गया है और स्पष्ट रूप से यह चेतावनी दी गई है कि उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अधिकारियों/कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस आदेश के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए माननीय सांसदों/विधायकों के फोन कॉल को नजरअंदाज करना या उनके प्रति असम्मानजनक व्यवहार करना अब सीधे अनुशासनिक कार्रवाई का आधार बन सकता है। जिन अधिकारियों के पास पहले से CUG नंबर सेव नहीं थे, उन्हें अब यह अनिवार्य रूप से करना होगा। साथ ही, बैठकों या व्यस्तता के दौरान भी सदस्यों की कॉल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा — कॉल-बैक और मैसेज के जरिए प्राथमिकता पर जवाब देना अनिवार्य होगा।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी जिलाधिकारी के पास किसी क्षेत्र के सांसद का फोन आता है, लेकिन उस समय जिलाधिकारी किसी अन्य महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और कॉल रिसीव नहीं कर पाते। आदेश के अनुसार, अब उन्हें सबसे पहले सांसद को यह सूचित करते हुए मैसेज भेजना होगा कि वे बैठक में हैं, और बैठक समाप्त होते ही सबसे पहले प्राथमिकता के आधार पर उन्हें वापस कॉल करना होगा। इसके बाद सांसद द्वारा बताई गई समस्या का यथासंभव गुणवत्तापूर्ण समाधान कर उन्हें इसकी जानकारी भी देनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता और यह बात संज्ञान में आती है, तो यह आचरण नियमावली के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
• CUG नंबर या सदस्य द्वारा नोट कराया गया कोई भी नंबर मोबाइल में सेव करना अनिवार्य है, वैकल्पिक नहीं।
•कॉल न उठा पाने की स्थिति में भी अधिकारी को स्वतः पहल कर कॉल-बैक और सूचना देना आवश्यक है — केवल "व्यस्त था" कहना पर्याप्त नहीं होगा।
• यह आदेश केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं है — व्यक्तिगत रूप से मिलने पर खड़े होकर स्वागत करना, सम्मानपूर्वक बातचीत करना और सम्मानपूर्वक विदा करना भी इसमें शामिल है।
• उल्लंघन को हल्के में नहीं लिया जाएगा — इसे सीधे आचरण नियमावली के उल्लंघन और दुराचरण की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें अनुशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
अब क्या करना होगा ?
आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को निम्न कार्यवाही करनी होगी:-
• सभी अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्त एवं जिलाधिकारी अपने अधीनस्थ समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों को इन निर्देशों की जानकारी सर्वोच्च प्राथमिकता पर दें।
• पूर्व में जारी 15 शासनादेशों में निहित निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
• यदि कोई अधिकारी/कर्मचारी इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के अनुसार कठोर अनुशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
1. यह आदेश किस पर लागू होता है?
उत्तर- यह आदेश उत्तर प्रदेश शासन के समस्त अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, पुलिस महानिदेशक, समस्त मंडलायुक्त/जिलाधिकारी तथा उनके अधीनस्थ सभी अधिकारियों-कर्मचारियों पर लागू होता है।
2. क्या CUG नंबर सेव करना अनिवार्य है?
उत्तर- हां, आदेश के अनुसार माननीय संसद/विधान मंडल सदस्यों का CUG नंबर या उनके द्वारा नोट कराया गया अन्य मोबाइल नंबर मोबाइल में अनिवार्य रूप से सेव करना होगा।
3. यदि अधिकारी बैठक में व्यस्त हो और कॉल न उठा पाए तो क्या करना होगा?
उत्तर- ऐसी स्थिति में अधिकारी को कॉल की जानकारी होते ही प्राथमिकता पर सदस्य को मैसेज भेजना होगा और यथाशीघ्र कॉल-बैक करना होगा।
4. प्रोटोकॉल का पालन न करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
उत्तर- यह उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के नियम-3(2) का उल्लंघन और "दुराचरण" माना जाएगा, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
5. यह आदेश नया है या पहले भी ऐसे आदेश जारी हो चुके हैं?
उत्तर- इस विषय पर 2017 से 2026 तक कुल 15 शासनादेश पहले ही जारी हो चुके हैं। यह आदेश उन्हीं के कड़ाई से अनुपालन को लेकर जारी की गई एक सख्त चेतावनी है।
6. जनप्रतिनिधि यदि व्यक्तिगत रूप से मिलने आएं तो अधिकारी को क्या करना चाहिए?
उत्तर- आदेश के अनुसार अधिकारी को अपनी सीट से खड़े होकर सम्मानपूर्वक स्वागत करना चाहिए, सम्मानपूर्वक जल ग्रहण हेतु आग्रह करना चाहिए, ध्यानपूर्वक उनकी बात सुननी चाहिए और विदा करते समय भी सम्मान दिखाना चाहिए।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश शासन के इस "सर्वोच्च प्राथमिकता" आदेश (संख्या 03/2026/142/90-सं0शि0प0का0/2026-38(नियम)/2026, दिनांक 7 मई 2026) का मुख्य संदेश स्पष्ट है — सांसदों और विधायकों के प्रति शिष्टाचार, प्रोटोकॉल पालन और उनके फोन कॉल का जवाब देना अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य आचरण संबंधी दायित्व है, जिसके उल्लंघन पर अनुशासनिक कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों और कर्मचारियों को यह याद रखना चाहिए कि CUG नंबर सेव करना, समय पर कॉल-बैक करना और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना अब उनकी सेवा शर्तों का हिस्सा माना जाएगा।
आधिकारिक स्रोत
यह जानकारी संसदीय शिष्टाचार/पत्राचार कार्यान्वयन अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दिनांक 7 मई 2026 को जारी शासनादेश संख्या 03/2026/142/90-सं0शि0प0का0/2026-38(नियम)/2026 पर आधारित है। इस शासनादेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।