उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग-5 ने 6 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी कर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन में संशोधन किया है। यह आदेश विशेष सचिव बद्री नाथ सिंह द्वारा आयोग के सचिव को भेजा गया है। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें न केवल वेतन बढ़ाया गया है, बल्कि पहली बार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को आवास सुविधा, मकान किराया भत्ता, वाहन सुविधा, यात्रा भत्ता, टेलीफोन भत्ता, अवकाश और अवकाश नकदीकरण जैसी सुविधाएं भी विस्तार से निर्धारित की गई हैं, जो पहले उपलब्ध नहीं थीं।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
बिंदु | विवरण |
|---|---|
आदेश का विषय | उ0प्र0 शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष एवं सदस्यों को वेतन के पुनरीक्षण तथा भत्ते एवं अन्य सेवा-सुविधाएं अनुमन्य किये जाने के संबंध में। |
विभाग | उच्च शिक्षा अनुभाग-5, उत्तर प्रदेश शासन। |
आदेश संख्या | 18/2026/1542/सत्तर-5-2026-1832785 |
आदेश की तारीख | 06 अगस्त 2026 |
संदर्भित पूर्व शासनादेश | संख्या-21/2024/आई0/521635/2024-70-5099/145/2023, दिनांक 15.03.2024 |
संबंधित लाभार्थी | उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष एवं सदस्यगण। |
मुख्य बदलाव | नियत वेतन में बढ़ोतरी तथा आवास, वाहन, यात्रा, टेलीफोन भत्ता, अवकाश एवं अवकाश नकदीकरण जैसी नई सुविधाएं जोड़ी गईं। |
वित्तीय भार वहन | आयोग द्वारा अपने स्वयं के स्रोतों से, राज्य सरकार के बजट से कोई अतिरिक्त सहायता नहीं। |
इस शासनादेश में क्या कहा गया है?
आदेश के अनुसार, 15 मार्च 2024 के शासनादेश के जरिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में अध्यक्ष एवं सदस्यों सहित अन्य अधिकारियों के पदों का सृजन किया गया था। उस समय अध्यक्ष को प्रतिमाह रु0 1,75,000 और सदस्यों को प्रतिमाह रु0 1,47,000 का नियत वेतन (Fixed Pay) निर्धारित किया गया था, लेकिन आवास, वाहन, यात्रा भत्ता जैसी अन्य सुविधाओं का कोई प्रावधान नहीं था।
आयोग के सचिव द्वारा 12 सितंबर 2024 को भत्तों और अन्य सुविधाओं का प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर विचार करने के बाद अब राज्यपाल की स्वीकृति से वेतन ढांचे का पुनरीक्षण और भत्तों/सुविधाओं की नई व्यवस्था लागू की गई है।
किसे लाभ मिलेगा?
यह संशोधन सीधे तौर पर केवल उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष और सदस्यों पर लागू होता है। यह किसी सामान्य कर्मचारी वर्ग के लिए नहीं, बल्कि आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों के लिए विशेष रूप से निर्धारित वेतन-भत्ता ढांचा है।
किसे लाभ नहीं मिलेगा?
आदेश में स्पष्ट है कि यह सुविधाएं आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों तक ही सीमित हैं। आयोग के अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों के वेतन-भत्तों के बारे में इस आदेश में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
इसके अलावा, अवकाश नकदीकरण की सुविधा में भी एक स्पष्ट अपवाद है — जो अधिकारी शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होकर आयोग में अध्यक्ष/सदस्य नियुक्त होते हैं और पहले ही अपनी पूर्व सेवा में 300 दिन के अवकाश नकदीकरण का लाभ ले चुके हैं, उन्हें आयोग में यह सुविधा दोबारा नहीं मिलेगी।
क्या बदलाव हुआ? (पुरानी बनाम नई व्यवस्था)
1. नियत वेतन (Fixed Pay)
पद | पुराना वेतन (15 मार्च 2024 अनुसार) | नया वेतन (6 अगस्त 2026 अनुसार) |
|---|---|---|
अध्यक्ष | रु0 1,75,000/- प्रतिमाह | रु0 2,25,000/- प्रतिमाह |
सदस्य | रु0 1,47,000/- प्रतिमाह | रु0 2,05,400/- प्रतिमाह |
2. नई जोड़ी गई सुविधाएं
सुविधा | विवरण |
|---|---|
आवास/HRA | अध्यक्ष एवं समस्त सदस्यों को किराया मुक्त राजकीय आवास; उपलब्ध न होने पर अध्यक्ष को समतुल्य श्रेणी अधिकारियों तथा सदस्यों को रु0 10,000 ग्रेड-पे अधिकारियों की दर पर मासिक मकान किराया भत्ता |
वाहन/ईंधन भत्ता | अध्यक्ष को सरकारी वाहन; सरकारी वाहन न होने पर सदस्यों को प्रतिमाह 200 लीटर ईंधन के तत्कालीन बाजार मूल्य के बराबर समेकित वाहन भत्ता |
यात्रा भत्ता | अध्यक्ष व सदस्यों को क्रमशः समान वेतन/रु0 10,000 ग्रेड-पे के राज्य सरकार अधिकारियों के समान, वित्तीय हस्तपुस्तिका खण्ड-3 के अनुसार |
टेलीफोन/इंटरनेट | अध्यक्ष को रु0 25,000 वार्षिक; सदस्यों को रु0 20,000 वार्षिक |
अवकाश | हर 6 माह सेवा पर 15 दिन उपार्जित अवकाश; प्रति वर्ष 20 दिन अर्धवेतन अवकाश; असाधारण अवकाश 3 वर्ष की अवधि में अधिकतम 108 दिन (वेतन-भत्ते रहित) |
अवकाश नकदीकरण | अधिकतम 300 दिन, शर्तों सहित |
आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों पर क्या असर पड़ेगा?
इस संशोधन के बाद आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को न केवल पहले से अधिक नियत वेतन मिलेगा, बल्कि उन्हें राजकीय अधिकारियों की तरह आवास, वाहन, यात्रा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं भी संस्थागत रूप से उपलब्ध होंगी। पहले यह सुविधाएं शासनादेश में परिभाषित नहीं थीं, इसलिए संभवतः इनकी अनुपलब्धता या अस्पष्टता की स्थिति रही होगी — अब यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।
एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इस पूरे वेतन-भत्ता ढांचे का वित्तीय भार राज्य सरकार के खजाने पर नहीं, बल्कि खुद आयोग को अपने स्वयं के स्रोतों से वहन करना होगा। इसका मतलब है कि यह बढ़ोतरी सरकारी बजट पर सीधा असर नहीं डालेगी।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए आयोग के किसी सदस्य को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में उन्हें रु0 10,000 ग्रेड-पे के राज्य सरकार अधिकारियों के लिए निर्धारित दर पर मासिक मकान किराया भत्ता (HRA) दिया जाएगा — यह उनके रु0 2,05,400 के नियत वेतन के अतिरिक्त होगा।
इसी तरह, यदि किसी सदस्य को सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं है और वे अपने निजी वाहन का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए करते हैं, तो उन्हें प्रतिमाह 200 लीटर ईंधन के उस समय के बाजार मूल्य के बराबर एक समेकित वाहन भत्ता मिलेगा — यानी यह राशि पेट्रोल/डीजल की तत्कालीन कीमत के अनुसार घटती-बढ़ती रहेगी, कोई निश्चित राशि तय नहीं की गई है।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
• इस पूरी वेतन-भत्ता व्यवस्था का संपूर्ण वित्तीय व्यय आयोग स्वयं अपने स्रोतों से वहन करेगा, राज्य सरकार के बजट से कोई अतिरिक्त अनुदान नहीं मिलेगा।
• सेवानिवृत्त राजकीय अधिकारियों को अध्यक्ष/सदस्य नियुक्त किए जाने पर उन्हें वह वेतन मिलेगा जो उनके अंतिम आहरित वेतन में शुद्ध पेंशन (राशिकरण-पूर्व) घटाकर मिलता है, या पुनर्गठित पद के अधिकतम वेतन में से जो भी कम हो — यानी उन्हें स्वतः पूरा नया नियत वेतन नहीं मिलेगा।
• जो सदस्य/अध्यक्ष नियुक्ति से पहले किसी राजकीय सेवा में नहीं थे, उन्हें पूरा नियत वेतन और अन्य अनुमन्य सुविधाएं मिलेंगी।
• अवकाश नकदीकरण की 300 दिन की सुविधा उन सेवानिवृत्त अधिकारियों को नहीं मिलेगी जो पहले ही अपनी पूर्व सेवा में यह लाभ पूरा ले चुके हैं।
• उपार्जित अवकाश और अर्धवेतन अवकाश दोनों में यह स्पष्ट है कि अनुपयोगित अवकाश स्वतः समाप्त (lapse) हो जाएगा, उसे आगे कैरी-फॉरवर्ड नहीं किया जा सकेगा।
• 15 मार्च 2024 के मूल शासनादेश के अन्य सभी प्रावधान, जो इस नए आदेश से असंगत नहीं हैं, यथावत लागू रहेंगे।
• यह आदेश वित्त विभाग की 5 अगस्त 2026 की सहमति के बाद ही जारी किया गया है।
अब क्या करना होगा?
यह आदेश सीधे प्रभावी प्रशासनिक आदेश है, इसलिए आयोग या लाभार्थियों को किसी अलग आवेदन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। हालांकि आदेश की प्रतिलिपि प्रधान महालेखाकार, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग, आयोग के वित्त नियंत्रक और कोषाधिकारी, प्रयागराज को भी भेजी गई है, ताकि संबंधित लेखा-भुगतान प्रक्रिया में यह संशोधन दर्ज किया जा सके।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
1. आयोग के अध्यक्ष का नया वेतन कितना है?
उत्तर- अध्यक्ष को अब प्रतिमाह रु0 2,25,000 का नियत वेतन मिलेगा, जो पहले रु0 1,75,000 था।
2. आयोग के सदस्यों का नया वेतन कितना है?
उत्तर- सदस्यों को अब प्रतिमाह रु0 2,05,400 का नियत वेतन मिलेगा, जो पहले रु0 1,47,000 था।
3. क्या पहले भी आवास और वाहन सुविधा मिलती थी?
उत्तर- आदेश की तालिका के अनुसार पुरानी व्यवस्था में इस कॉलम में कुछ भी दर्ज नहीं था, यानी यह सुविधाएं अब पहली बार निर्धारित की गई हैं।
4. इस वेतन वृद्धि का भार किस पर पड़ेगा?
उत्तर- आदेश के अनुसार इसका संपूर्ण वित्तीय व्यय उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग स्वयं अपने स्रोतों से वहन करेगा, राज्य सरकार के बजट पर कोई भार नहीं पड़ेगा।
5. सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी अध्यक्ष/सदस्य बनें तो उनका वेतन कैसे तय होगा?
उत्तर- उन्हें उनके अंतिम आहरित वेतन में शुद्ध पेंशन (राशिकरण-पूर्व) घटाकर प्राप्त राशि, या पद के अधिकतम वेतन में से जो भी कम हो, वह वेतन मिलेगा।
6. अवकाश नकदीकरण की अधिकतम सीमा क्या है?
उत्तर- अधिकतम 300 दिनों की, लेकिन यह उन सेवानिवृत्त अधिकारियों को नहीं मिलेगी जो पहले ही अपनी पूर्व सेवा में यह लाभ पूरा उठा चुके हैं।
7. यह आदेश कब से प्रभावी है?
उत्तर- आदेश 6 अगस्त 2026 को जारी हुआ है। इसमें अलग से किसी भावी प्रभावी तिथि (retrospective/prospective) का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश शासन के इस शासनादेश (संख्या 18/2026/1542/सत्तर-5-2026-1832785, दिनांक 6 अगस्त 2026) के जरिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन में बढ़ोतरी के साथ-साथ आवास, वाहन, यात्रा, टेलीफोन, अवकाश और अवकाश नकदीकरण जैसी कई नई सुविधाएं पहली बार स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था का वित्तीय भार राज्य सरकार नहीं, बल्कि आयोग स्वयं अपने संसाधनों से वहन करेगा।
आधिकारिक स्रोत
यह जानकारी उच्च शिक्षा अनुभाग-5, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दिनांक 6 अगस्त 2026 को जारी शासनादेश संख्या 18/2026/1542/सत्तर-5-2026-1832785 पर आधारित है। इस शासनादेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।