उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा।
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन के 12 अगस्त 2015 के शासनादेश के अनुसार लिपिकीय संवर्ग के प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा दी गई। जानें आदेश की पूरी जानकारी, वेतनमान और महत्व।

📅 7 सितंबर 2026 ·👁 61 views

उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में काम करने वाले लिपिकीय संवर्ग (क्लेरिकल कैडर) के कर्मचारियों के लिए 12 अगस्त 2015 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी हुआ था। यह आदेश आज भी प्रासंगिक है क्योंकि इसी के आधार पर लिपिकीय संवर्ग के तीन प्रमुख पदों प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को राजपत्रित (गजेटेड) दर्जा प्राप्त हुआ था।

यह शासनादेश भले ही पुराना हो, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग लिपिकीय संवर्ग सेवा नियमावली, 2014 से जुड़े इन पदों की सेवा-शर्तों, प्रतिष्ठा और सेवा-रिकॉर्ड को समझने के लिए यह एक आधारभूत दस्तावेज है। जो कर्मचारी इन पदों पर कार्यरत हैं या भविष्य में पदोन्नत होंगे, उनके लिए इस आदेश की पृष्ठभूमि जानना उपयोगी रहेगा।


एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी

विवरण

जानकारी

आदेश का विषय

लिपिकीय संवर्ग के प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान किये जाने के सम्बंध में।

विभाग

कार्मिक अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन।

शासनादेश संख्या

3/2015/13(2)2015/का-1-2015

शासनादेश दिनांक

12 अगस्त, 2015

दस्तावेज़ प्रकार

कार्यालय-ज्ञाप/शासनादेश

संबंधित कर्मचारी/लाभार्थी

उत्तर प्रदेश के समस्त सरकारी विभागों में कार्यरत लिपिकीय संवर्ग के प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी।

मुख्य बदलाव

उक्त तीनों पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान की गई।

हस्ताक्षरकर्ता

राजीव कुमार, प्रमुख सचिव (मूल आदेश); योगेश चन्द्र, विशेष सचिव

प्रतिलिपि

नोट:- उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज में आदेश लागू होने की अलग से कोई भविष्य तिथि नहीं दी गई है; आदेश स्वयं अपनी जारी होने की तारीख (12 अगस्त 2015) से प्रभावी माना जाता है।

इस शासनादेश में क्या कहा गया है?

आदेश के अनुसार, वित्त विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग लिपिकीय संवर्ग सेवा नियमावली, 2014 को 22 सितंबर 2014 को अध्यारोही प्रभाव (यानी पूर्व की व्यवस्थाओं पर प्राथमिकता रखने वाले प्रभाव) से अधिसूचित किया गया था। इस नियमावली में तीन पद शामिल किए गए थे:-

• प्रशासनिक अधिकारी — वेतन बैंड-2, रुपये 9300-34800, ग्रेड वेतन रुपये 4600/-

• वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी — वेतन बैंड-2, रुपये 9300-34800, ग्रेड वेतन रुपये 4800/-

• मुख्य प्रशासनिक अधिकारी — वेतन बैंड-3, रुपये 15600-39100, ग्रेड वेतन रुपये 5400/-

इसके बाद शासन ने "सम्यक विचारोपरांत" (यानी पूरी तरह विचार करने के बाद) यह निर्णय लिया कि प्रदेश के समस्त सरकारी विभागों में कार्यरत इन्हीं तीन पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान की जाए। दूसरे शब्दों में, यह आदेश 2014 की सेवा नियमावली से आगे बढ़कर इन पदों की प्रशासनिक हैसियत को स्पष्ट रूप से "राजपत्रित अधिकारी" के स्तर पर मान्यता देता है।


किसे लाभ मिलेगा ?

उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, यह राजपत्रित प्रतिष्ठा उत्तर प्रदेश के समस्त सरकारी विभागों में कार्यरत लिपिकीय संवर्ग के निम्न पदधारकों को मिलती है:-

• प्रशासनिक अधिकारी

• वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी

• मुख्य प्रशासनिक अधिकारी

आदेश में विभाग-वार कोई सीमा नहीं लगाई गई है — यह स्पष्ट रूप से "प्रदेश के समस्त सरकारी विभागों" शब्दों का प्रयोग करता है, जिससे यह सभी विभागों में कार्यरत उपरोक्त तीन पदों पर लागू होता है।


किसे लाभ नहीं मिलेगा ?

उपलब्ध शासनादेश में लिपिकीय संवर्ग के इन तीन पदों के अतिरिक्त किसी अन्य पद (जैसे कनिष्ठ सहायक, वरिष्ठ सहायक आदि निचले स्तर के लिपिकीय पद) का उल्लेख नहीं है। इसलिए यह राजपत्रित प्रतिष्ठा केवल इन्हीं तीन उल्लिखित पदों तक सीमित प्रतीत होती है। इससे नीचे या इनके समकक्ष किसी अन्य पद के संबंध में आदेश में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।


क्या बदलाव हुआ ?

आदेश में स्पष्ट रूप से पुरानी व्यवस्था का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है, इसलिए विस्तृत तुलना संभव नहीं है। लेकिन आदेश की भाषा से यह समझा जा सकता है:-

• पहले: 2014 की सेवा नियमावली के तहत ये तीन पद वेतन बैंड और ग्रेड वेतन के साथ अस्तित्व में तो थे, लेकिन इन्हें औपचारिक रूप से "राजपत्रित" दर्जा नहीं दिया गया था।

• अब (12 अगस्त 2015 के आदेश के बाद): इन्हीं तीन पदों को शासन ने राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान कर दी।

आधिकारिक दस्तावेज में इससे अधिक तुलनात्मक विवरण उपलब्ध नहीं है।


कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा ?

राजपत्रित दर्जा मिलने का सामान्य प्रशासनिक अर्थ यह होता है कि संबंधित पद की सरकारी हैसियत और औपचारिक मान्यता में बदलाव आता है। हालांकि, इस आदेश में केवल पद को राजपत्रित प्रतिष्ठा देने की बात कही गई है; इससे जुड़े अन्य विशिष्ट लाभों, भत्तों या सेवा-शर्तों में बदलाव का उल्लेख दस्तावेज में नहीं है। इसलिए राजपत्रित दर्जे से होने वाले अन्य व्यावहारिक प्रभावों (जैसे किसी विशेष भत्ते या अधिकार) के बारे में स्पष्ट जानकारी संबंधित आधिकारिक स्रोत में उपलब्ध नहीं है।


महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां

•™यह आदेश केवल लिपिकीय संवर्ग के तीन नामित पदों — प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी — पर ही लागू है।

• यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग लिपिकीय संवर्ग सेवा नियमावली, 2014 के संदर्भ में जारी हुआ है, इसलिए मूल पात्रता व सेवा-शर्तों के लिए उक्त नियमावली भी देखी जानी चाहिए।

• यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है, इसलिए इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है — जैसा कि दस्तावेज़ के फुटनोट में स्पष्ट किया गया है।

• आदेश की प्रामाणिकता वेबसाइट http://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है।


अब क्या करना होगा?

आदेश में किसी कर्मचारी या विभाग के लिए अलग से कोई आवेदन, फॉर्म या प्रक्रिया दिए जाने का उल्लेख नहीं है। यह एक प्रशासनिक कार्यालय-ज्ञाप है जो सीधे पद की प्रतिष्ठा में बदलाव करता है और सभी संबंधित सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों सहित 11 प्राप्तकर्ताओं को सूचनार्थ भेजा गया था। जो कर्मचारी इन पदों पर कार्यरत हैं, वे इस आदेश को अपने सेवा-अभिलेख (service record) के संदर्भ के रूप में रख सकते हैं, विशेषकर वरिष्ठता, पदोन्नति या प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए।


महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)

1. यह शासनादेश कब जारी हुआ था?

उत्तर- यह आदेश 12 अगस्त 2015 को उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक अनुभाग-1 द्वारा जारी किया गया था।

2. इस आदेश से किन पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा मिली?

उत्तर- लिपिकीय संवर्ग के प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी — इन तीन पदों को।

3. क्या यह आदेश आज भी मान्य/प्रासंगिक है?

उत्तर- उपलब्ध दस्तावेज में इस आदेश के निरस्त या संशोधित होने का कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए यह इन पदों की पृष्ठभूमि समझने के लिए एक संदर्भ दस्तावेज बना हुआ है। किसी भी बाद के संशोधन के लिए संबंधित विभाग से पुष्टि करना उचित रहेगा।

4. इन पदों का वेतनमान क्या है?

उत्तर- आदेश के अनुसार — प्रशासनिक अधिकारी: वेतन बैंड-2 (₹9300-34800), ग्रेड वेतन ₹4600; वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी: वेतन बैंड-2 (₹9300-34800), ग्रेड वेतन ₹4800; मुख्य प्रशासनिक अधिकारी: वेतन बैंड-3 (₹15600-39100), ग्रेड वेतन ₹5400।

5. यह आदेश किस सेवा नियमावली से जुड़ा है?

उत्तर- उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग लिपिकीय संवर्ग सेवा नियमावली, 2014 (अधिसूचित 22 सितंबर 2014) से।

6. क्या यह आदेश सभी विभागों पर लागू होता है?

उत्तर- हां, आदेश में स्पष्ट रूप से "प्रदेश के समस्त सरकारी विभागों" का उल्लेख है।

7. आदेश पर हस्ताक्षर क्यों नहीं है?

उत्तर- क्योंकि यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है, जिस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होती — यह जानकारी दस्तावेज के फुटनोट में दी गई है।

8. आदेश की प्रामाणिकता कैसे जांचें?

उत्तर- http://shasanadesh.up.nic.in वेबसाइट पर आदेश संख्या के माध्यम से सत्यापन किया जा सकता है।


निष्कर्ष

12 अगस्त 2015 का यह शासनादेश भले ही एक दशक पुराना हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिपिकीय संवर्ग में प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पदों की राजपत्रित हैसियत को समझने के लिए यह एक मूल संदर्भ दस्तावेज है। इसका मुख्य सार यही है कि 2014 की सेवा नियमावली में शामिल इन तीन पदों को शासन ने सम्यक विचार के बाद राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान की।

जो पाठक इन पदों से जुड़े हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि यह आदेश केवल इन्हीं तीन पदों तक सीमित है और इससे जुड़ी विस्तृत सेवा-शर्तों के लिए मूल 2014 नियमावली भी देखनी चाहिए।


आधिकारिक स्रोत

यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, कार्मिक अनुभाग-1 द्वारा जारी शासनादेश संख्या 3/2015/13(2)2015/का-1-2015, दिनांक 12 अगस्त 2015 पर आधारित है। आदेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट https://shasnadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है।

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