उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन: अब प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के लिए अलग-अलग अर्हता, B.Ed अनिवार्य।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन: अब प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के लिए अलग-अलग अर्हता, B.Ed अनिवार्य।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन ने माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1921 के परिशिष्ट-'क' में संशोधन करते हुए संस्था प्रधान की अर्हता को अब दो अलग पदों — प्रधानाचार्य (इंटरमीडिएट स्तर) और प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) — में बाँट दिया है, और दोनों के लिए स्नातकोत्तर उपाधि में न्यूनतम 50% अंक तथा NCTE-मान्यता प्राप्त B.Ed (हाईस्कूल स्तर के लिए B.Ed/B.P.Ed) को अनिवार्य कर दिया है, जबकि पुरानी व्यवस्था में मौजूद वैकल्पिक अनुभव-आधारित रास्ते (जैसे केवल लंबे शिक्षण अनुभव या विज्ञान डिप्लोमा के आधार पर पात्रता) हटा दिए गए हैं; आयु 30 वर्ष से कम न होने की शर्त पहले जैसी बरकरार है, और यह संशोधन 03 सितम्बर 2026 को विशेष सचिव संदीप परमार द्वारा जारी किया गया है।

📅 5 सितंबर 2026 ·👁 45 views

परिचय

उत्तर प्रदेश शासन ने माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1921 के अध्याय-2 के विनियम-1 के परिशिष्ट-'क' में संस्था प्रधान (Head of Institution) की अर्हता से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किया है। यह आदेश विशेष सचिव संदीप परमार द्वारा 03 सितम्बर, 2026 को शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) एवं सभापति, माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को भेजा गया है।

अभी तक इंटरमीडिएट कॉलेज और हाईस्कूल दोनों में संस्था प्रधान की नियुक्ति के लिए एक ही सामान्य अर्हता व्यवस्था लागू थी, जिसमें कई वैकल्पिक रास्ते (alternative pathways) उपलब्ध थे। इस नए आदेश के बाद अर्हता को दो अलग-अलग श्रेणियों में बाँट दिया गया है — प्रधानाचार्य (इंटरमीडिएट स्तर) और प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) — और दोनों के लिए B.Ed (शिक्षा स्नातक) को अनिवार्य कर दिया गया है।


एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी

बिंदु

विवरण

आदेश का विषय

उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1921 के अध्याय-2, विनियम-1, परिशिष्ट-'क' में संस्था प्रधान की अर्हता का संशोधन।

विभाग

माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-5, उत्तर प्रदेश शासन।

प्रेषक

संदीप परमार, विशेष सचिव, उ0प्र0 शासन।

प्राप्तकर्ता

शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) एवं सभापति, माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ0प्र0, लखनऊ।

आदेश की तारीख

03 सितम्बर 2026, लखनऊ।

सन्दर्भ पत्र

परिषद-9/डी0ई0/758/2026-27, दिनांक 13.08.2026

स्वीकृति

श्री राज्यपाल की सहर्ष स्वीकृति।

संबंधित पद

प्रधानाचार्य (इंटरमीडिएट स्तर) एवं प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर)।

मुख्य बदलाव

अर्हता को दो पदों में विभाजित किया गया; B.Ed/B.P.Ed अनिवार्य; न्यूनतम 50% अंकों की शर्त जोड़ी गई; पुराने वैकल्पिक अनुभव-आधारित रास्ते समाप्त।

नोट:- आदेश में इस संशोधन की अलग से कोई "प्रभावी तिथि" उल्लिखित नहीं है। उपलब्ध पत्र के अनुसार यह आदेश 03 सितम्बर, 2026 को जारी हुआ है।


इस आदेश में क्या कहा गया है ?

पत्र के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अपने 13 अगस्त 2026 के पत्र के माध्यम से संस्था प्रधान की अर्हता में बदलाव का प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद अब राज्यपाल की स्वीकृति से माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1921 के परिशिष्ट-'क' में विद्यमान अर्हता के स्थान पर नई, संशोधित अर्हता लागू कर दी गई है।

पुरानी व्यवस्था में "संस्था का प्रधान" के लिए एक ही सूची में तीन वैकल्पिक योग्यता-मार्ग दिए गए थे (सामान्य स्नातकोत्तर+प्रशिक्षण अनुभव, अथवा लंबा शिक्षण अनुभव, अथवा विज्ञान डिप्लोमा+लंबी सेवा)। नई व्यवस्था में इन तीनों वैकल्पिक रास्तों को हटाकर एक स्पष्ट, एकरूप अर्हता ढांचा बनाया गया है, और पद को दो श्रेणियों में बाँटा गया है:

• प्रधानाचार्य (इंटरमीडिएट स्तर) — इंटरमीडिएट कॉलेजों के लिए

• प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) — हाईस्कूलों के लिए


किसे लाभ मिलेगा ?

उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, यह अर्हता उन शिक्षकों/अभ्यर्थियों पर लागू होगी जो भविष्य में संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक) के पद हेतु अर्ह माने जाना चाहते हैं। दोनों श्रेणियों के लिए संशोधित अर्हता इस प्रकार है:-

(क) प्रधानाचार्य (इंटरमीडिएट स्तर)

1- भारत में विधि द्वारा स्थापित अथवा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी विश्वविद्यालय/मानित विश्वविद्यालय/संस्था से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि; तथा

2- एन0सी0टी0ई0 (NCTE) द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में शिक्षा स्नातक (बी0एड0) की उपाधि; तथा

3- केंद्र/राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा 9 से 12) में प्रवक्ता अथवा सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम 4 वर्ष का शिक्षण अनुभव, अथवा हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर कम से कम 4 वर्ष का कार्यानुभव, जो सक्षम स्तर से निर्गत हो — तथा आयु 30 वर्ष से कम न हो।

(ख) प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर)

1- भारत में विधि द्वारा स्थापित अथवा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी विश्वविद्यालय/मानित विश्वविद्यालय/संस्था से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि; तथा

2- एन0सी0टी0ई0 द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में शिक्षा स्नातक (बी0एड0) अथवा बी0पी0एड0 की उपाधि; तथा

3- केंद्र/राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा 9 से 12) में प्रवक्ता अथवा सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम 4 वर्ष का शिक्षण अनुभव, अथवा जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर कम से कम 4 वर्ष का कार्यानुभव, जो सक्षम स्तर से निर्गत हो — तथा आयु 30 वर्ष से कम न हो।


किसे लाभ नहीं मिलेगा ?

आदेश में स्पष्ट रूप से निम्न सीमाएं दी गई हैं:-

• जिन अभ्यर्थियों की आयु 30 वर्ष से कम है, वे अर्ह नहीं माने जाएंगे।

• जिनके पास स्नातकोत्तर उपाधि में 50 प्रतिशत से कम अंक हैं, वे अर्ह नहीं होंगे।

• जिनके पास B.Ed (या प्रधानाध्यापक हाईस्कूल स्तर के मामले में B.Ed/B.P.Ed) की उपाधि नहीं है, वे अर्ह नहीं माने जाएंगे — जबकि पुरानी व्यवस्था में कुछ मामलों में लंबे शिक्षण अनुभव के आधार पर छूट संभव थी।

• पुरानी अर्हता सूची में मौजूद वैकल्पिक रास्ते — जैसे केवल लंबे शिक्षण अनुभव (10/15 वर्ष) के आधार पर पात्रता, या विज्ञान स्नातकोत्तर डिप्लोमा + 15/20 वर्ष सेवा के आधार पर पात्रता — नई अर्हता सूची में नहीं दिए गए हैं। दस्तावेज के अनुसार अब यह रास्ते इस संशोधित सूची का हिस्सा नहीं हैं।


पुरानी और नई अर्हता में क्या अंतर आया ?

बिंदु

पुरानी व्यवस्था

नई (संशोधित) व्यवस्था

पद-संरचना

"संस्था का प्रधान" — इंटरमीडिएट व हाईस्कूल दोनों के लिए एक साझा अर्हता सूची

दो अलग पद: प्रधानाचार्य (इंटरमीडिएट स्तर) व प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर), प्रत्येक की अलग अर्हता

शैक्षणिक योग्यता

प्रशिक्षित M.A./M.Sc./M.Com./M.Sc.(कृषि) या समकक्ष स्नातकोत्तर, न्यूनतम अंक-सीमा उल्लिखित नहीं

स्नातकोत्तर उपाधि में न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य

प्रशिक्षण योग्यता

"प्रशिक्षित" संस्था से प्रशिक्षण (सामान्य उल्लेख); कुछ मामलों में अनुभव के आधार पर छूट संभव

NCTE-मान्यता प्राप्त B.Ed (प्रधानाध्यापक हाईस्कूल स्तर के लिए B.Ed या B.P.Ed) अनिवार्य, कोई छूट उल्लिखित नहीं

वैकल्पिक अनुभव-आधारित पात्रता

हाँ — 10/15 वर्ष शिक्षण अनुभव, या विज्ञान डिप्लोमा + 15/20 वर्ष सेवा जैसे विकल्प उपलब्ध थे

ऐसे वैकल्पिक अनुभव-आधारित रास्ते संशोधित सूची में शामिल नहीं हैं

शिक्षण/कार्य अनुभव

संस्था अनुसार 4 वर्ष (कक्षा 9-12) या जूनियर हाईस्कूल प्रधानाध्यापक अनुभव

समान रूप से 4 वर्ष अनुभव बना रहा, परंतु अब यह अनुभव-प्रमाणन "सक्षम स्तर से निर्गत" होना अनिवार्य किया गया है

आयु सीमा

30 वर्ष से कम न हो

30 वर्ष से कम न हो (यथावत)

ध्यान दें: यह तुलना केवल उन बिंदुओं तक सीमित है जो दोनों संलग्न पृष्ठों (पुरानी व नई अर्हता सारणी) में स्पष्ट रूप से उपलब्ध हैं।


शिक्षकों और संस्थाओं पर व्यावहारिक असर

• जो अभ्यर्थी भविष्य में प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पद के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अब B.Ed (या B.P.Ed, हाईस्कूल स्तर के मामले में) अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा — भले ही उनके पास लंबा शिक्षण अनुभव क्यों न हो।

• स्नातकोत्तर उपाधि में 50% अंक की न्यूनतम सीमा नई शर्त है, जो पहले स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं थी।

• संस्थाओं को यह ध्यान रखना होगा कि इंटरमीडिएट कॉलेज और हाईस्कूल — दोनों के लिए अलग-अलग अर्हता सूची के अनुसार चयन/नियुक्ति प्रक्रिया अपनानी होगी।

• अनुभव प्रमाण-पत्र अब "सक्षम स्तर" से निर्गत एवं प्रतिहस्ताक्षरित होना आवश्यक बताया गया है, यानी केवल संस्था-स्तर के प्रमाण-पत्र से काम नहीं चलेगा।


उदाहरण से समझिए

मान लीजिए एक शिक्षक के पास स्नातकोत्तर उपाधि में 48% अंक हैं और उसने कक्षा 9 से 12 में 6 वर्ष तक प्रवक्ता के रूप में पढ़ाया है, लेकिन उसके पास B.Ed की उपाधि नहीं है। संशोधित अर्हता सूची के अनुसार, अंक-सीमा (50%) पूरी न होने और B.Ed न होने के कारण — भले ही अनुभव 4 वर्ष से अधिक हो — वह प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पद के लिए अर्ह नहीं माना जाएगा। यह उदाहरण केवल दस्तावेज में दी गई शर्तों को स्पष्ट करने के लिए है और किसी वास्तविक मामले पर आधारित नहीं है।


महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां

• अनुभव प्रमाण-पत्र जनपदीय अधिकारी द्वारा निर्गत एवं मण्डलीय अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए।

• केंद्रीय विद्यालयों के मामले में "सक्षम स्तर" का अर्थ क्षेत्रीय अधिकारी (Regional Officer) से है।

• निर्गत किए गए अनुभव प्रमाण-पत्रों का रख-रखाव संबंधित कार्यालय द्वारा किया जाएगा।

• दोनों पदों (प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक) के लिए आयु 30 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए — यह शर्त अपरिवर्तित है।


अब क्या करना होगा ?

पत्र के अनुसार शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) एवं सभापति, माध्यमिक शिक्षा परिषद को निर्देशित किया गया है कि वे इस संशोधन के अनुसार आगे आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। दस्तावेज में इससे आगे किसी विस्तृत क्रियान्वयन प्रक्रिया (जैसे आवेदन की तिथि, चयन प्रक्रिया, अधिसूचना प्रकाशन आदि) का उल्लेख नहीं है। इच्छुक अभ्यर्थियों और संस्थाओं को माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक संचार/अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।


महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)

1. यह संशोधन किस अधिनियम से संबंधित है?

उत्तर- यह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1921 के अध्याय-2 के विनियम-1 के परिशिष्ट-'क' से संबंधित है।

2. क्या अब प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के लिए एक जैसी अर्हता है?

उत्तर- नहीं। दोनों पदों के लिए अलग-अलग अर्हता सूची तय की गई है, हालांकि दोनों में स्नातकोत्तर में 50% अंक और NCTE-मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण (B.Ed/B.P.Ed) की शर्त समान है।

3. क्या B.Ed के बिना कोई अभ्यर्थी अर्ह हो सकता है?

उत्तर- उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, संशोधित अर्हता सूची में B.Ed (या हाईस्कूल स्तर के लिए B.Ed/B.P.Ed) को अनिवार्य दर्शाया गया है; किसी छूट का उल्लेख नहीं है।

4. क्या पुरानी अर्हता के तहत लंबे अनुभव के आधार पर छूट पाने वाले शिक्षकों पर यह आदेश असर डालेगा?

उत्तर- दस्तावेज में इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है कि पहले से नियुक्त या पात्रता प्राप्त शिक्षकों पर यह संशोधन पूर्वव्यापी रूप से लागू होगा या नहीं। इसकी जानकारी उपलब्ध पत्र में नहीं दी गई है।

5. न्यूनतम आयु सीमा क्या है?

उत्तर- दोनों पदों के लिए अभ्यर्थी की आयु 30 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

6. अनुभव प्रमाण-पत्र कौन जारी करेगा?

उत्तर- जनपदीय अधिकारी द्वारा निर्गत एवं मण्डलीय अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र मान्य होगा। केंद्रीय विद्यालयों के लिए यह क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा जारी होगा।

7. यह आदेश कब से प्रभावी है?

उत्तर- आदेश 03 सितम्बर, 2026 को जारी हुआ है। दस्तावेज में इससे अलग कोई विशिष्ट "प्रभावी तिथि" उल्लिखित नहीं है।

8. इस संशोधन के पीछे मूल पत्र किसका है?

उत्तर- यह संशोधन माध्यमिक शिक्षा परिषद के 13 अगस्त 2026 के पत्र (परिषद-9/डी0ई0/758/2026-27) में उठाए गए बिंदुओं पर आधारित है, जिसे राज्यपाल की स्वीकृति मिली है।


निष्कर्ष

इस संशोधन के बाद उत्तर प्रदेश में इंटरमीडिएट कॉलेज और हाईस्कूल के संस्था प्रधान पद के लिए अर्हता को अधिक स्पष्ट और एकरूप बना दिया गया है — स्नातकोत्तर में न्यूनतम 50% अंक और NCTE-मान्यता प्राप्त B.Ed (या B.P.Ed) अब अनिवार्य शर्तें हैं, जबकि पुरानी अर्हता सूची में मौजूद वैकल्पिक अनुभव-आधारित रास्ते संशोधित सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। पाठकों को सबसे महत्वपूर्ण बात यह याद रखनी चाहिए कि प्रधानाचार्य (इंटरमीडिएट स्तर) और प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) की अर्हता अब अलग-अलग है, और दोनों में B.Ed संबंधी योग्यता अनिवार्य है।


आधिकारिक स्रोत

यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-5 द्वारा दिनांक 03 सितम्बर, 2026 को जारी पत्र (संदर्भ: परिषद-9/डी0ई0/758/2026-27, दिनांक 13.08.2026 पर आधारित, विशेष सचिव संदीप परमार द्वारा हस्ताक्षरित) पर आधारित है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि अद्यतन एवं आधिकारिक अधिसूचना के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट अवश्य देखें।


डिस्क्लेमर/Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध शासनादेश/पत्र के आधार पर सामान्य जानकारी हेतु तैयार की गई है। इसे केवल सूचनात्मक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और यह किसी भी प्रकार की आधिकारिक/कानूनी सलाह नहीं है। समय-समय पर सरकारी आदेशों, नियमों व अधिसूचनाओं में संशोधन होते रहते हैं, इसलिए संभव है कि यहाँ दी गई जानकारी बाद में अद्यतन या परिवर्तित हो गई हो। नियुक्ति, पात्रता, आवेदन या किसी भी निर्णय से पूर्व पाठकों को मूल शासनादेश की प्रति स्वयं देख लेनी चाहिए और इस संबंध में अंतिम एवं आधिकारिक पुष्टि हेतु संबंधित विभाग — माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश अथवा उत्तर प्रदेश शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग — से संपर्क करना चाहिए। इस लेख में हुई किसी भी अनजाने त्रुटि, चूक या भविष्य में हुए संशोधन के लिए वेबसाइट/लेखक उत्तरदायी नहीं होगा।

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