उत्तर प्रदेश शासन के न्याय अनुभाग-2 (अधीनस्थ न्यायालय) ने 17 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है, जिसके तहत प्रदेश के जिला न्यायालयों में कुल 900 नए न्यायालयों और उनसे जुड़े सहवर्ती पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है।
यह शासनादेश उन 9149 न्यायालयों के गठन की दिशा में पहला चरण है, जिनके गठन को माननीय उच्चतम न्यायालय में योजित मिस० एप्लीकेशन नं०-2362-2370/2019 (क्रिमिनल अपील नं०-254-262/2012, इम्तियाज अहमद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) में पारित आदेश के अनुपालन में मंजूरी दी गई है।
यह आदेश उन अभ्यर्थियों, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो न्यायिक सेवा, स्टेनोग्राफर, रीडर, मुंसरिम या सहायक संवर्ग की भर्ती से जुड़े हैं, क्योंकि इसमें भर्ती की प्रक्रिया, शर्तें और पदों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
विवरण | जानकारी |
|---|---|
आदेश का विषय | प्रदेश में 9149 न्यायालयों के गठन के प्रथम चरण में 900 न्यायालयों एवं सहवर्ती पदों का सृजन। |
विभाग | न्याय अनुभाग-2 (अधीनस्थ न्यायालय), उत्तर प्रदेश शासन |
शासनादेश संख्या | 17/2026/901/सात-न्याय-2-2026-रिट 09/2020 |
शासनादेश दिनांक | 17 सितंबर 2026 |
लागू/मान्य रहने की अवधि | पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 28 फरवरी 2027 तक (यदि पूर्व सूचना से पहले समाप्त न कर दिए जाएं) |
संबंधित संदर्भ पत्र | संयुक्त निबंधक (जे) (सेवायें), मा० उच्च न्यायालय, इलाहाबाद का पत्र संख्या-10155/मेन-बी/एडमिन (ए-3), दिनांक 28.08.2021 |
कुल नवसृजित न्यायालय | 900 |
कुल नवसृजित पद (न्यायिक + अन्य) | 6,656 (सभी तीन श्रेणियों को मिलाकर) |
वित्तीय वर्ष/लेखा शीर्षक | 2026-2027, अनुदान सं०-42, लेखा शीर्षक "2014-न्याय प्रशासन-105-सिविल और सेशन्स न्यायालय-03-जिला तथा सेशन न्यायाधीश" |
वित्त विभाग की सहमति | अशासकीय संख्या-E-12-252-X-2026-27, दिनांक 17-09-2026 |
हस्ताक्षरकर्ता | उदय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
इस शासनादेश में क्या कहा गया है?
आदेश के अनुसार, राज्यपाल महोदया द्वारा प्रदेश के जिला न्यायालयों में कुल 9149 न्यायालयों के गठन के क्रम में, प्रथम चरण में प्रदेश के जनपदों के लिए विभिन्न श्रेणी के कुल 900 न्यायालयों एवं सहवर्ती पदों/सेवाओं को सृजित किए जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान की गई है।
यह स्वीकृति एक निश्चित समयावधि के लिए है — पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 28 फरवरी 2027 तक, बशर्ते इससे पहले किसी पूर्व सूचना के जरिए इसे समाप्त न कर दिया जाए। इसका सीधा अर्थ है कि ये पद स्थायी प्रकृति के नहीं बल्कि सशर्त/अस्थायी रूप से स्वीकृत किए गए हैं।
आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि नवसृजित 900 न्यायालयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:-
श्रेणीवार न्यायालय और पदों का विवरण :-
1. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर — 237 न्यायालय
पदनाम | वेतनमान (रुपये) | पदों की संख्या |
|---|---|---|
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश | 1,44,840–2,24,100 (पुराना वेतनमान 51,550–63,070) | 237 |
स्टेनोग्राफर ग्रेड-1 | पे लेवल-7, 44,900–1,42,400 | 237 |
मुंसरिम एवं रीडर | पे लेवल-6, 35,400–1,12,400 | 474 |
सीनियर असिस्टेंट (सूट्स क्लर्क, सेशन्स क्लर्क, मिसलेनियस क्लर्क) | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 711 |
जूनियर असिस्टेंट (कॉपिस्ट) | पे लेवल-3, 21,700–69,100 | 237 |
योग | 1,896 |
2. सिविल जज (सीनियर डिवीजन) स्तर — 391 न्यायालय
पदनाम | वेतनमान/वेतन बैंड (रुपये) | पदों की संख्या |
|---|---|---|
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) | 1,11,000–1,94,660 (पुराना वेतनमान 39,530–54,010) | 391 |
स्टेनोग्राफर ग्रेड-2 | पे लेवल-6, 35,400–1,12,400 | 391 |
मुंसरिम | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 391 |
रीडर | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 391 |
सीनियर असिस्टेंट (सूट्स क्लर्क, अपील क्लर्क, मिसलेनियस क्लर्क) | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 1,173 |
जूनियर असिस्टेंट (कॉपिस्ट) | पे लेवल-3, 21,700–69,100 | 391 |
योग | 3,128 |
3. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर — 272 न्यायालय
पदनाम | वेतनमान/वेतन बैंड (रुपये) | पदों की संख्या |
|---|---|---|
सिविल जज (जूनियर डिवीजन) | 77,840–1,63,030 (पुराना वेतनमान 27,700–44,770) | 272 |
स्टेनोग्राफर ग्रेड-3 | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 272 |
मुंसरिम | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 272 |
रीडर | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 272 |
सीनियर असिस्टेंट (सूट्स क्लर्क, मिसलेनियस क्लर्क) | पे लेवल-5, 29,200–92,300 | 544 |
योग | 1,632 |
तीनों श्रेणियों को जोड़ने पर कुल न्यायालय 237+391+272 = 900 और कुल स्वीकृत पद 1,896+3,128+1,632 = 6,656 बनते हैं।
किसे लाभ मिलेगा?
आदेश के अनुसार यह स्वीकृति प्रदेश के उन जनपदों के लिए है जिनका विवरण शासनादेश के संलग्नक-2 में दिया गया है। संलग्नक-2 में कुल 75 जनपदों के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (HJS), सिविल जज सीनियर डिवीजन (CJ-SD) और सिविल जज जूनियर डिवीजन (CJ-JD) स्तर के न्यायालयों की जनपदवार संख्या दी गई है।
उदाहरण के लिए, दस्तावेज़ के अनुसार:-
• प्रयागराज जिले को कुल 14 न्यायालय (5 HJS + 4 CJ-SD + 5 CJ-JD) मिलेंगे।
• लखनऊ जिले को कुल 28 न्यायालय (7 HJS + 18 CJ-SD + 3 CJ-JD) मिलेंगे।
• कानपुर नगर को सबसे अधिक 35 न्यायालय (9 HJS + 22 CJ-SD + 4 CJ-JD) आवंटित किए गए हैं।
• अमेठी जिले के सामने शून्य (0) अंकित है, अर्थात इस प्रथम चरण में वहां कोई नया न्यायालय स्वीकृत नहीं किया गया है।
इसका सीधा लाभ उन अभ्यर्थियों को मिलेगा जो न्यायिक सेवा परीक्षा, स्टेनोग्राफर, रीडर, मुंसरिम, सीनियर/जूनियर असिस्टेंट जैसे पदों की भर्ती का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इन नवसृजित पदों पर आगे चलकर भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।
किसे लाभ नहीं मिलेगा?
आदेश में स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी गई है कि इन 900 न्यायालयों हेतु अर्दली, प्यून और दफतरी के पदों का सीधा सृजन नहीं किया जाएगा। इसके बजाय इनके समतुल्य मानव शक्ति की व्यवस्था जॉब आउटसोर्सिंग या क्रय के माध्यम से की जाएगी, जो कार्मिक अनुभाग-2 के शासनादेश संख्या-12/का-2/2000 (दिनांक 06.01.2020) तथा भारत सरकार के जेम (GeM) पोर्टल संबंधी प्रावधानों के अनुसार होगी।
अर्थात, अर्दली/प्यून/दफतरी की सेवाएं चाहने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह सीधी सरकारी भर्ती नहीं है, बल्कि आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। दस्तावेज़ के अनुसार इस तरह से आउटसोर्स किए जाने वाले कुल मानव संसाधन की संख्या 711 (श्रेणी-1) + 1,173 (श्रेणी-2) + 544 (श्रेणी-3) = 2,428 होगी।
इसके अलावा, जिन जनपदों का उल्लेख संलग्नक-2 की सूची में नहीं है या जिनके सामने शून्य (जैसे अमेठी) अंकित है, उन्हें इस प्रथम चरण में कोई नया न्यायालय आवंटित नहीं हुआ है।
क्या बदलाव हुआ?
उपलब्ध शासनादेश में पूर्व की विस्तृत स्थिति (जैसे कि पहले प्रत्येक जनपद में कितने न्यायालय कार्यरत थे) का उल्लेख नहीं है, इसलिए पुरानी और नई व्यवस्था की संख्यात्मक तुलना देना संभव नहीं है। आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार जो स्पष्ट बदलाव सामने आया है, वह यह है कि:-
• प्रदेश में कुल 9149 न्यायालयों के गठन की दीर्घकालिक योजना है, जिसका यह प्रथम चरण है।
• इस प्रथम चरण में 900 न्यायालय और 6,656 सहवर्ती पद अस्थायी रूप से (28 फरवरी 2027 तक) सृजित किए गए हैं।
• अर्दली/प्यून/दफतरी संवर्ग के लिए सीधी भर्ती के बजाय आउटसोर्सिंग मॉडल अपनाया गया है।
शेष चरणों में शेष न्यायालयों/पदों के सृजन पर तत्समय उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर विचार किया जाएगा — अर्थात आगामी चरणों की समयसीमा या संख्या के बारे में इस दस्तावेज़ में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
कर्मचारियों/लाभार्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
आदेश की शर्त संख्या-2 के अनुसार, इन नवसृजित पदों पर भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं होगी। पहले वर्तमान में स्वीकृत रिक्त पदों पर भर्ती पूरी की जाएगी, और उसके बाद ही नवसृजित पदों पर भर्ती प्रक्रिया आरंभ की जाएगी — वह भी आधारभूत सुविधाओं (जैसे न्यायालय भवन, बैठने की व्यवस्था आदि) की उपलब्धता के अधीन।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि अभ्यर्थियों को यह पद तुरंत उपलब्ध होने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए; भर्ती चरणबद्ध ढंग से और बुनियादी ढांचे की तैयारी के अनुसार होगी।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी अभ्यर्थी ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षा दी है और वह गोरखपुर जिले में नियुक्ति चाहता है। आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार गोरखपुर जिले को इस प्रथम चरण में 6 CJ-JD न्यायालय (कुल 21 में से) आवंटित हुए हैं। इसका अर्थ है कि गोरखपुर में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर के 6 नए पद इस चरण में सृजित हुए हैं, जिन पर आगे चलकर, ऊपर बताई गई शर्तों के अधीन, भर्ती की जाएगी।
इसी तरह, यदि कोई अभ्यर्थी रीडर या मुंसरिम पद में रुचि रखता है, तो वह संलग्नक-1 की श्रेणीवार तालिका से यह समझ सकता है कि किस स्तर के न्यायालय में कितने ऐसे पद सृजित हुए हैं, और फिर संलग्नक-2 से यह देख सकता है कि उसके जिले को कितने न्यायालय आवंटित हुए हैं।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
• यह स्वीकृति अस्थायी है — पद पर कार्यभार ग्रहण की तिथि से 28 फरवरी 2027 तक, और पूर्व सूचना देकर इससे पहले भी समाप्त की जा सकती है।
• नवसृजित पदों पर भर्ती पहले से रिक्त स्वीकृत पदों को भरने के बाद ही शुरू होगी।
• भर्ती प्रक्रिया आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर निर्भर होगी।
• अर्दली/प्यून/दफतरी के लिए सीधी भर्ती नहीं, केवल आउटसोर्सिंग/जेम पोर्टल के माध्यम से मानव शक्ति ली जाएगी।
• व्यय वित्तीय वर्ष 2026-2027 के बजट अनुदान सं०-42 से वहन किया जाएगा, जो दर्शाता है कि यह आदेश वित्त विभाग की सहमति के बाद ही जारी हुआ है।
अब क्या करना होगा?
दस्तावेज़ में सीधे किसी अभ्यर्थी या कर्मचारी के लिए तत्काल आवेदन-प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है। हालांकि, इस आदेश से जुड़े व्यावहारिक कदम इस प्रकार समझे जा सकते हैं:-
1- संबंधित जनपद न्यायाधीश और उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के स्तर पर रिक्त पदों की स्थिति और नवसृजित पदों पर भर्ती की समयसीमा के बारे में आधिकारिक सूचना का इंतजार करें।
2- भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (न्यायिक सेवा हेतु) या उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के भर्ती प्रकोष्ठ की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर रखें।
3- आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति चाहने वाले अभ्यर्थी संबंधित सेवा प्रदाता संस्था/जेम पोर्टल प्रक्रिया की जानकारी के लिए संबंधित जिला न्यायालय प्रशासन से संपर्क करें।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
1. यह शासनादेश किस विषय में है?
उत्तर- यह आदेश उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेश में 9149 न्यायालयों के गठन के प्रथम चरण में 900 न्यायालयों और सहवर्ती पदों के सृजन से संबंधित है।
2. यह आदेश कब से कब तक प्रभावी रहेगा?
उत्तर- पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 28 फरवरी 2027 तक, जब तक कि इससे पहले किसी पूर्व सूचना से इसे समाप्त न कर दिया जाए।
3. कुल कितने नए पद सृजित हुए हैं?
उत्तर- आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार तीनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 6,656 पद (900 न्यायालय सहित) सृजित हुए हैं।
4. क्या अर्दली/प्यून के पद भी सीधे भरे जाएंगे?
उत्तर- नहीं। दस्तावेज़ के अनुसार इनके लिए सीधे पद सृजित नहीं किए गए हैं; इनकी व्यवस्था आउटसोर्सिंग/जेम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।
5. क्या सभी जिलों को समान रूप से न्यायालय मिले हैं?
उत्तर- नहीं। संलग्नक-2 के अनुसार आवंटन जिलों के अनुसार अलग-अलग है — कुछ जिलों (जैसे कानपुर नगर) को अधिक न्यायालय मिले हैं, जबकि अमेठी जैसे जिले को इस चरण में शून्य आवंटन हुआ है।
6. भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी?
उत्तर- दस्तावेज़ में स्पष्ट तिथि नहीं दी गई है। शर्त के अनुसार पहले मौजूदा रिक्त स्वीकृत पदों को भरा जाएगा, उसके बाद ही आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता के आधार पर नवसृजित पदों पर भर्ती शुरू होगी।
7. इस आदेश का खर्च किस मद से वहन होगा?
उत्तर- वित्तीय वर्ष 2026-2027 के आय-व्ययक अनुदान संख्या-42 के अंतर्गत लेखा शीर्षक "2014-न्याय प्रशासन-105-सिविल और सेशन्स न्यायालय-03-जिला तथा सेशन न्यायाधीश" से।
8. क्या आगे और न्यायालय बनेंगे?
उत्तर- हां, दस्तावेज़ के अनुसार यह 9149 न्यायालयों के गठन की योजना का प्रथम चरण है। शेष चरणों की संख्या, समयसीमा या शर्तें आधिकारिक दस्तावेज़ में उपलब्ध नहीं हैं।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश शासन के इस शासनादेश (संख्या-17/2026/901/सात-न्याय-2-2026-रिट 09/2020, दिनांक 17 सितंबर 2026) के माध्यम से प्रदेश में उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 900 न्यायालयों और 6,656 सहवर्ती पदों के सृजन को अस्थायी रूप से (28 फरवरी 2027 तक) मंजूरी दी गई है। यह प्रदेश के 9149 न्यायालयों के दीर्घकालिक गठन का प्रथम चरण है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भर्ती प्रक्रिया रिक्त पदों की भर्ती पूरी होने और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता के बाद ही शुरू होगी, और अर्दली/प्यून/दफतरी की सेवाएं सीधे सृजित पदों के बजाय आउटसोर्सिंग के माध्यम से ली जाएंगी।
आधिकारिक स्रोत
यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, न्याय अनुभाग-2 (अधीनस्थ न्यायालय) द्वारा जारी शासनादेश संख्या-17/2026/901/सात-न्याय-2-2026-रिट 09/2020, दिनांक 17 सितंबर 2026 (हस्ताक्षरकर्ता: उदय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव) पर आधारित है। शासनादेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।