उत्तर प्रदेश शासन के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-2 ने शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने से जुड़े राजस्व व्ययों के लिए वित्तीय स्वीकृति का एक आदेश जारी किया है। यह आदेश संयुक्त सचिव अर्जुन देव भारती की ओर से निदेशक, उद्योग, कानपुर को भेजा गया है और इसकी तारीख 22 जुलाई 2026 है।
सरल शब्दों में कहें तो यह आदेश किसी नई योजना की घोषणा नहीं है, बल्कि सरकारी दफ्तरों में डिजिटल कामकाज (e-Office) को सुचारू रूप से लागू करने के लिए यूपीएलसी (उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन) को धनराशि जारी करने की वित्तीय स्वीकृति है। यह आदेश उन शासकीय कार्यालयों और अधिकारियों के लिए प्रासंगिक है जो ई-ऑफिस व्यवस्था के क्रियान्वयन, बजट आवंटन या निगरानी से जुड़े हैं।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
बिंदु | विवरण |
|---|---|
आदेश का विषय | शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू किए जाने हेतु राजस्व व्ययों के लिए धनराशि की स्वीकृति |
विभाग | आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन (अनु0-2) |
आदेश संख्या | संख्या-17/2026/455/78-2-2026-ई-1754775 |
आदेश की तारीख | 22 जुलाई 2026 |
आधार पत्र | प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी का पत्र संख्या-यूपीएलसी:आईसीपी:9064(2026-27)/592, दिनांक 09-06-2026 |
प्रशासकीय आधार | वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1 का कार्यालय-ज्ञाप संख्या-4/2026/बी-1-812/दस-2026-231/2026, दिनांक 28-03-2026 |
स्वीकृत धनराशि | रु0 515.00 लाख (रुपये पाँच करोड़ पन्द्रह लाख मात्र) |
लेखा शीर्ष | 2852-उद्योग-07-दूर संचार तथा इलेक्ट्रानिक उद्योग-202-इलेक्ट्रॉनिक्स-27-शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस व्यवस्था-42-अन्य व्यय |
अनुदान संख्या | 007-उद्योग |
संबंधित निकाय | यूपीएलसी (प्रबंध निदेशक), निदेशक उद्योग कानपुर, संयुक्त निदेशक उद्योग लखनऊ मण्डल |
हस्ताक्षरकर्ता | अर्जुन देव भारती, संयुक्त सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
इस शासनादेश में क्या कहा गया है?
आदेश के अनुसार, यूपीएलसी (उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन) के प्रबंध निदेशक ने 09 जून 2026 के पत्र के माध्यम से शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने के लिए धनराशि का प्रस्ताव भेजा था। इसी प्रस्ताव के आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के शासकीय आय-व्ययक में लेखा शीर्ष "2852-उद्योग-07-दूर संचार तथा इलेक्ट्रानिक उद्योग-202-इलेक्ट्रॉनिक्स-27-शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस व्यवस्था-42-अन्य व्यय" में प्राविधानित रु0 515.00 लाख के सापेक्ष पूरी धनराशि रु0 515.00 लाख (पाँच करोड़ पन्द्रह लाख रुपये) की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
यह स्वीकृति राज्यपाल महोदय द्वारा 22 शर्तों के अधीन प्रदान की गई है, जिसमें बजट आवंटन की प्रक्रिया, बिल बनाने की व्यवस्था, धनराशि के आहरण, उपयोगिता प्रमाण-पत्र और वित्तीय जवाबदेही से जुड़े स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
किसे लाभ मिलेगा?
आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार इस स्वीकृति का सीधा लाभ इन्हें मिलेगा:-
• यूपीएलसी (उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन), जो इस योजना की कार्यदायी संस्था है और जिसे भुगतान प्राप्त होगा।
• निदेशक, उद्योग, कानपुर तथा संयुक्त निदेशक, उद्योग, लखनऊ मण्डल, जो बिलों के सत्यापन और लेखा-जोखा से जुड़े हैं।
• वे शासकीय कार्यालय जहां ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की जानी है, क्योंकि इसी धनराशि से वहां आवश्यक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर व अन्य व्यवस्था की जाएगी।
आदेश में सामान्य नागरिकों या किसी व्यक्तिगत लाभार्थी का उल्लेख नहीं है; यह पूरी तरह एक अंतर-विभागीय/संस्थागत वित्तीय व्यवस्था है।
किसे लाभ नहीं मिलेगा?
दस्तावेज के अनुसार यह धनराशि केवल ई-ऑफिस व्यवस्था के लिए जारी आरएफपी/दिशा-निर्देशों के अनुसार ही उपयोग की जा सकेगी (शर्त संख्या 10)। शर्त संख्या 8 में स्पष्ट है कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल उसी प्रयोजन के लिए होगा जिसके लिए यह स्वीकृत की जा रही है, और स्वीकृत कार्यों से इतर कोई भी व्यय वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। यानी इस धनराशि का उपयोग किसी अन्य योजना, विभाग या मद में नहीं किया जा सकता।
पुराने आदेश या इससे पहले की समान स्वीकृतियों की तुलनात्मक जानकारी दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है।
क्या बदलाव हुआ?
उपलब्ध दस्तावेज में यह जानकारी नहीं है कि इससे पहले ई-ऑफिस व्यवस्था के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत की गई थी या कोई पूर्ववर्ती आदेश जारी हुआ था या नहीं। इसलिए पुरानी और नई व्यवस्था के बीच तुलना संबंधित आधिकारिक स्रोत में उपलब्ध नहीं है। यह आदेश वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत बजट प्रावधान (रु0 515.00 लाख) की पूरी राशि जारी करने से जुड़ा है।
कार्यालयों और यूपीएलसी पर क्या असर पड़ेगा?
इस स्वीकृति के बाद यूपीएलसी शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस व्यवस्था को लागू करने से जुड़े कार्य आगे बढ़ा सकेगा, जैसे सर्वर मेंटेनेंस, आवश्यक हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर की खरीद और पीएमयू (Project Management Unit) में कार्यरत जनशक्ति का प्रबंधन। हालांकि आदेश यह भी स्पष्ट करता है कि मैनपावर और हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर की खरीद परीक्षण (जांच) के बाद, आवश्यकतानुसार ही की जाएगी (शर्त 21 और 22), यानी बेवजह या अधिक खर्च पर रोक लगाई गई है।
निदेशक, उद्योग, कानपुर को भी अपने स्तर पर धनराशि का लेखा-जोखा रखना होगा, जिससे इस व्यय पर दोहरी निगरानी सुनिश्चित हो सके।
उदाहरण से समझिए
आदेश के अनुसार कुल स्वीकृत धनराशि रु0 515.00 लाख (5.15 करोड़ रुपये) है, जो शासकीय आय-व्ययक में इसी मद के लिए पहले से प्राविधानित पूरी राशि के बराबर है। इसका सीधा अर्थ है कि बजट में तय की गई पूरी राशि बिना किसी कटौती के स्वीकृत कर दी गई है। यह उदाहरण केवल दस्तावेज में दी गई राशि को समझाने के लिए है; इससे यूपीएलसी के व्यक्तिगत खर्च या किसी कार्यालय-विशेष के आवंटन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि दस्तावेज में कार्यालयवार धनराशि का विभाजन नहीं दिया गया है।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
आदेश में कुल 22 शर्तें दी गई हैं। इनमें से पाठकों के लिए विशेष रूप से जानने योग्य प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:-
• बजट आवंटन सेंट्रल सर्वर के माध्यम से संबंधित कोषागार को भेजा जाएगा (शर्त 1)।
• धनराशि के आहरण के लिए निर्धारित प्रपत्र पर प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी द्वारा बिल बनाकर संयुक्त निदेशक, उद्योग, लखनऊ मण्डल को प्रतिहस्ताक्षर हेतु प्रस्तुत किया जाएगा (शर्त 2)।
• धनराशि का आहरण एक मुश्त न कर, वास्तविक आवश्यकता और व्यय के आधार पर ही किया जाएगा (शर्त 4)।
• स्वीकृत धनराशि का उपयोग/व्यय इसी वित्तीय वर्ष (2026-27) में ही किया जाएगा (शर्त 5)।
• भुगतान से पूर्व प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी संबंधित कार्य के संतोषजनक रूप से पूर्ण होने पर संतुष्ट होंगे और बिलों को सत्यापित करेंगे (शर्त 6)।
• स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल उसी प्रयोजन के लिए होगा जिसके लिए यह स्वीकृत की जा रही है; अन्यथा यह वित्तीय अनियमितता मानी जाएगी (शर्त 8)।
• व्यय के उपरांत उपयोगिता प्रमाण-पत्र महालेखाकार, निदेशक उद्योग कानपुर, वित्त विभाग तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-2 को उपलब्ध कराया जाएगा (शर्त 9)।
• स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल ई-ऑफिस प्रणाली हेतु जारी आरएफपी/दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होगा, और आहरण-भुगतान पीएमयू में कार्यरत जनशक्ति के वास्तविक व्यय के आधार पर होगा (शर्त 10)।
• पीएमयू में कार्यरत जनशक्ति की मासिक कार्य निष्पादन आख्या (MPR) तथा योजना की मासिक कार्य निष्पादन आख्या शासन को उपलब्ध कराई जाएगी (शर्त 11)।
• जिस मद से पुनर्विनियोग किया जा रहा है, उसमें अतिरिक्त धनराशि की मांग नहीं की जाएगी (शर्त 12)।
• स्वीकृत धनराशि पर उपार्जित ब्याज को राजकोष में जमा कराने का दायित्व प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी का होगा (शर्त 16)।
• किसी भी स्थिति में दोहरा भुगतान न हो, यह सुनिश्चित करने का दायित्व भी प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी का होगा; किसी भी वित्तीय अनियमितता के लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगे (शर्त 19)।
• वर्तमान में कार्यरत मैनपावर की गहन समीक्षा कर आवश्यक जनशक्ति को ही रखा जाएगा, और सर्वर मेंटेनेंस व हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर की खरीद भी जांच के बाद आवश्यकतानुसार ही की जाएगी (शर्त 21-22)।
अब क्या करना होगा?
आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों/संस्थाओं को यह प्रक्रिया अपनानी होगी:-
• यूपीएलसी निर्धारित प्रपत्र पर बिल बनाकर संयुक्त निदेशक, उद्योग, लखनऊ मण्डल को प्रतिहस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत करेगा।
• धनराशि का आहरण वास्तविक आवश्यकता और व्यय के आधार पर, चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
• भुगतान से पहले प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी कार्य पूर्ण होने की पुष्टि कर बिलों को सत्यापित करेंगे।
• व्यय के बाद निर्धारित प्रपत्र पर उपयोगिता प्रमाण-पत्र महालेखाकार, निदेशक उद्योग कानपुर, वित्त विभाग और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-2 को भेजा जाएगा।
• पीएमयू जनशक्ति और योजना की मासिक कार्य-निष्पादन आख्या (MPR) नियमित रूप से शासन को भेजी जाएगी।
• वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक सभी अग्रिम धनराशि का समायोजन कराया जाएगा और महालेखाकार के अभिलेखों में भी यह समायोजन दर्ज कराया जाएगा (शर्त 18)।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
प्रश्न 1: यह आदेश किस विषय से जुड़ा है?
उत्तर- यह आदेश उत्तर प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने के लिए राजस्व व्यय की वित्तीय स्वीकृति से जुड़ा है।
प्रश्न 2: कुल कितनी धनराशि स्वीकृत की गई है?
उत्तर- आदेश के अनुसार रु0 515.00 लाख (पाँच करोड़ पन्द्रह लाख रुपये) की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
प्रश्न 3: इस धनराशि का उपयोग किसे करना है?
उत्तर- यह धनराशि यूपीएलसी (उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन) द्वारा ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने के कार्य में उपयोग की जाएगी।
प्रश्न 4: क्या यह धनराशि किसी अन्य कार्य में उपयोग की जा सकती है?
उत्तर- नहीं, शर्त संख्या 8 के अनुसार यह धनराशि केवल उसी प्रयोजन के लिए उपयोग होगी जिसके लिए स्वीकृत की गई है; अन्यथा उपयोग वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।
प्रश्न 5: क्या धनराशि एक साथ जारी की जाएगी?
उत्तर- नहीं, शर्त संख्या 4 के अनुसार धनराशि का आहरण एक मुश्त न कर, वास्तविक आवश्यकता होने पर ही राजकोष से किया जाएगा।
प्रश्न 6: किसी वित्तीय अनियमितता की जिम्मेदारी किसकी होगी?
उत्तर- आदेश की शर्त संख्या 17 और 19 के अनुसार धनराशि आहरित करने वाले अधिकारी और प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
प्रश्न 7: स्वीकृत धनराशि का उपयोग कब तक करना होगा?
उत्तर- शर्त संख्या 5 के अनुसार स्वीकृत धनराशि का उपयोग/व्यय इसी वित्तीय वर्ष (2026-27) में ही करना होगा।
प्रश्न 8: क्या इस आदेश की प्रामाणिकता ऑनलाइन जांची जा सकती है?
उत्तर- हां, दस्तावेज के अनुसार यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है और इसकी प्रामाणिकता वेबसाइट shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, यह आदेश उत्तर प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने के लिए यूपीएलसी को वित्तीय वर्ष 2026-27 में रु0 515.00 लाख की वित्तीय स्वीकृति देता है। पाठकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह स्वीकृति 22 सख्त शर्तों के अधीन दी गई है — धनराशि का उपयोग केवल ई-ऑफिस से जुड़े कार्यों में, इसी वित्तीय वर्ष के भीतर, और वास्तविक व्यय के आधार पर ही किया जा सकेगा, तथा किसी भी वित्तीय अनियमितता के लिए प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी सीधे उत्तरदायी होंगे।
आधिकारिक स्रोत
यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-2 द्वारा जारी शासनादेश संख्या-17/2026/455/78-2-2026-ई-1754775, दिनांक 22 जुलाई 2026 पर आधारित है, जिसमें प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी के पत्र संख्या-यूपीएलसी:आईसीपी:9064(2026-27)/592, दिनांक 09-06-2026 तथा वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1 के कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 28-03-2026 का संदर्भ दिया गया है। आदेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।