यूपी सरकार का बड़ा फैसला: अब सरकारी कर्मचारियों को शिक्षा सहायता का मिलेगा अधिक लाभ, दिव्यांग बच्चों के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति हुई दोगुनी।
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यूपी सरकार का बड़ा फैसला: अब सरकारी कर्मचारियों को शिक्षा सहायता का मिलेगा अधिक लाभ, दिव्यांग बच्चों के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति हुई दोगुनी।

लखनऊ। 03 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने शिक्षा संबंधी सहायता (Education Assistance) से जुड़े पुराने नियमों में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांग बच्चों के शिक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति राशि को भी बढ़ा दिया गया है।

📅 3 अगस्त 2026 ·👁 28 views

शुरुआत में जानिए यह आदेश क्या है

उत्तर प्रदेश शासन के वित्त (सामान्य) अनुभाग-1 ने राजकीय कर्मचारियों को दी जाने वाली शिक्षा संबंधी सहायता और सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांगजन बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है। यह आदेश अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की ओर से समस्त विभागाध्यक्ष/प्रमुख कार्यालयाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश को भेजा गया है और इसकी तारीख 03 अगस्त 2026 है।

यह आदेश उन सभी राजकीय विभागों के कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात हैं, और खासतौर पर उन सरकारी कर्मचारियों के लिए जिनके बच्चे दिव्यांगजन (दिव्यांग) श्रेणी में आते हैं, क्योंकि इस आदेश से उनकी शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति की दर सीधे दोगुनी हो गई है।


एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी

बिंदु

विवरण

आदेश का विषय

शिक्षा संबंधी सहायता दिये जाने के संबंध में।

विभाग

वित्त (सामान्य) अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन।

आदेश संख्या

संख्या-1/2026/जी-1-आई/1418491/2026/10-17099/5/2026/दस-2026

आदेश की तारीख

03 अगस्त 2026

लागू होने की तारीख

तत्काल प्रभाव से (03 अगस्त 2026 से)

संबंधित कर्मचारी/लाभार्थी

पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात राजकीय विभागों के कार्मिक; दिव्यांगजन बच्चों वाले सरकारी कर्मचारी।

मुख्य बदलाव

दिव्यांगजन बच्चों की शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति दर रु0 300/- प्रतिमाह प्रति बच्चा से बढ़ाकर रु0 600/- प्रतिमाह प्रति बच्चा की गई।

पूर्व संदर्भ आदेश

शासनादेश संख्या-जी-1-639/दस-2002-206/2002, दिनांक 02 नवम्बर 2002; शासनादेश संख्या-जी-1-269/दस-2012-206-2002, दिनांक 12 नवम्बर 2012

इस शासनादेश में क्या कहा गया है?

आदेश की पृष्ठभूमि में बताया गया है कि पहले शासनादेश दिनांक 02 नवम्बर 2002 में उल्लिखित शर्तों/प्रतिबंधों के अधीन, शासनादेश दिनांक 12 नवम्बर 2012 के जरिए 01 जनवरी 2006 से लागू पुनरीक्षित वेतनमान में ग्रेड वेतन रु0 2000/- प्रतिमाह तक के पद पर तैनात राजकीय विभागों के कार्मिकों को दो बच्चों तक के शिक्षण शुल्क संबंधी शैक्षिक सहायता की सुविधा दी गई थी, साथ ही सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांगजन बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति के लिए रु0 300/- प्रतिमाह प्रति बच्चा की दर तय की गई थी।

अब वेतन समिति (2016) की संस्तुतियों पर विचार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुतियों के आधार पर राज्यपाल महोदय ने निम्नलिखित दो निर्णयों की स्वीकृति दी है:-

1- पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात राजकीय विभागों के कार्मिकों को 02 नवम्बर 2002 के शासनादेश में वर्णित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन शिक्षा संबंधी सहायता अनुमन्य (स्वीकृत) की जाती है।

2- सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांगजन बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति हेतु पूर्व अनुमन्य रु0 300/- प्रतिमाह प्रति बच्चा की दर को पूर्व निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर रु0 600/- प्रतिमाह प्रति बच्चा तक अनुमन्य किया जाता है।

आदेश यह भी स्पष्ट करता है कि 02 नवम्बर 2002 के शासनादेश में अंकित अन्य सभी शर्तें/प्रतिबंध यथावत (जैसे के तैसे) लागू रहेंगे — यानी केवल दर में बदलाव हुआ है, बाकी नियम पहले जैसे ही रहेंगे।


किसे लाभ मिलेगा?

आदेश के अनुसार इसका लाभ इन्हें मिलेगा:-

• पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात राजकीय विभागों के सभी कार्मिक, जिन्हें 2002 के शासनादेश की शर्तों के अधीन शिक्षा संबंधी सहायता (दो बच्चों तक के शिक्षण शुल्क से संबंधित) मिलती है।

• ऐसे सरकारी कर्मचारी जिनके बच्चे दिव्यांगजन श्रेणी में आते हैं, उन्हें अब प्रति बच्चा रु0 600/- प्रतिमाह की दर से शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति मिलेगी।


किसे लाभ नहीं मिलेगा?

आदेश के अनुसार यह सुविधा केवल पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात कार्मिकों के लिए है। इससे ऊपर के वेतन स्तर (मैट्रिक्स लेवल-3 से अधिक) पर तैनात कर्मचारियों के लिए इस आदेश में कोई प्रावधान नहीं दिया गया है, इसलिए यह सुविधा उन पर लागू नहीं होती। साथ ही 02 नवम्बर 2002 के शासनादेश में जो भी अन्य शर्तें/प्रतिबंध (जैसे बच्चों की अधिकतम संख्या या पात्रता शर्तें) पहले से तय हैं, वे यथावत लागू रहेंगी — यानी उन शर्तों को पूरा न करने वाले कर्मचारी अब भी लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। दस्तावेज में इन विस्तृत शर्तों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है; इसके लिए मूल शासनादेश दिनांक 02 नवम्बर 2002 देखना आवश्यक होगा।


क्या बदलाव हुआ? (पुरानी बनाम नई व्यवस्था)

बिंदु

पहले (2012 के आदेश के अनुसार, 01.01.2006 से लागू)

अब (इस आदेश के अनुसार, 03.08.2026 से लागू)

पात्रता मानदंड

ग्रेड वेतन रु0 2000/- प्रतिमाह तक के पद पर तैनात कार्मिक

पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात कार्मिक

दिव्यांगजन बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति दर

रु0 300/- प्रतिमाह प्रति बच्चा

रु0 600/- प्रतिमाह प्रति बच्चा

अन्य शर्तें/प्रतिबंध

02 नवम्बर 2002 के आदेश अनुसार

यथावत लागू (कोई बदलाव नहीं)

स्पष्ट रूप से समझा जाए तो पुरानी व्यवस्था में पात्रता को "ग्रेड वेतन" के आधार पर परिभाषित किया गया था, जबकि अब पुनरीक्षित वेतन ढांचे (पे मैट्रिक्स) के अनुसार इसे "मैट्रिक्स लेवल-3" के रूप में परिभाषित किया गया है। वहीं दिव्यांगजन बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति दर को सीधे दोगुना कर दिया गया है।


कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?

इस आदेश से मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात कर्मचारियों की शिक्षा संबंधी सहायता की पात्रता को औपचारिक रूप से पुष्ट किया गया है, ताकि वेतन मैट्रिक्स प्रणाली लागू होने के बाद भी यह सुविधा बिना किसी असमंजस के जारी रह सके। वहीं दिव्यांगजन बच्चों वाले कर्मचारियों के लिए यह सीधा वित्तीय लाभ है, क्योंकि प्रतिपूर्ति राशि दोगुनी होने से उनकी शिक्षा से जुड़ी वित्तीय जिम्मेदारी में राहत मिलेगी।


उदाहरण से समझिए

आदेश में दी गई नई दर के अनुसार एक सरल उदाहरण से समझें (यह केवल दर को स्पष्ट करने के लिए एक उदाहरण है):-

• यदि किसी सरकारी कर्मचारी का एक दिव्यांगजन बच्चा है, तो पहले उसे शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति के रूप में रु0 300/- प्रतिमाह मिलते थे। अब इस आदेश के बाद उसे रु0 600/- प्रतिमाह मिलेंगे — यानी 300 रुपये प्रतिमाह की सीधी बढ़ोतरी।

• यदि किसी कर्मचारी के दो दिव्यांगजन बच्चे हैं, तो पहले उसे दोनों बच्चों के लिए मिलाकर रु0 600/- प्रतिमाह (300 x 2) मिलते थे। अब नई दर के अनुसार उसे रु0 1,200/- प्रतिमाह (600 x 2) मिलेंगे।

• यह उदाहरण केवल आदेश में दी गई दर पर आधारित है; वास्तविक भुगतान संबंधित कर्मचारी की पात्रता और विभागीय सत्यापन के अनुसार ही तय होगा।


महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां

• शिक्षा संबंधी सहायता केवल पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात कार्मिकों को ही अनुमन्य है।

• दिव्यांगजन बच्चों के शिक्षण शुल्क की नई दर (रु0 600/- प्रतिमाह प्रति बच्चा) भी "पूर्व निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन" ही लागू होगी, यानी 2002 के आदेश में दी गई सभी शर्तें अब भी मान्य रहेंगी।

• 02 नवम्बर 2002 के शासनादेश में अंकित अन्य सभी शर्तें/प्रतिबंध यथावत लागू रहेंगे — इस आदेश ने उन्हें नहीं बदला है।

• संशोधित दरें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी, अर्थात इस आदेश के जारी होने की तारीख (03 अगस्त 2026) से।


अब क्या करना होगा?

आदेश के अनुसार समस्त विभागाध्यक्ष/प्रमुख कार्यालयाध्यक्ष को यह सुनिश्चित करना होगा:-

1- यह आदेश अपने अधीनस्थ कार्यालयों और कर्मचारियों तक पहुंचाया जाए।

2- मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पात्र कार्मिकों को 2002 के आदेश की शर्तों के अनुसार शिक्षा संबंधी सहायता का लाभ दिया जाए।

3- दिव्यांगजन बच्चों वाले कर्मचारियों के मामलों में तत्काल प्रभाव से नई दर (रु0 600/- प्रतिमाह प्रति बच्चा) के अनुसार प्रतिपूर्ति की जाए।

4- कर्मचारियों को अपने संबंधित कार्यालय/स्थापना शाखा में यह जानकारी और आवश्यक दस्तावेज (जैसे दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, शिक्षण शुल्क की रसीद आदि, यदि विभाग द्वारा मांगे जाएं) उपलब्ध कराने होंगे। दस्तावेज में इसकी विस्तृत प्रक्रिया नहीं दी गई है, इसके लिए संबंधित कार्यालय की स्थापना शाखा से संपर्क करना उचित रहेगा।


महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)

प्रश्न 1: यह आदेश किन कर्मचारियों पर लागू होता है?

उत्तर- यह आदेश पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात राजकीय विभागों के कार्मिकों पर लागू होता है।

प्रश्न 2: दिव्यांगजन बच्चों की शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति की नई दर क्या है?

उत्तर- आदेश के अनुसार यह दर अब रु0 600/- प्रतिमाह प्रति बच्चा है, जो पहले रु0 300/- प्रतिमाह प्रति बच्चा थी।

प्रश्न 3: यह नई दर कब से लागू होगी?

उत्तर- आदेश के अनुसार संशोधित दरें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी, यानी 03 अगस्त 2026 से।

प्रश्न 4: क्या शिक्षा संबंधी सहायता की पुरानी शर्तें बदल गई हैं?

उत्तर- नहीं, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 02 नवम्बर 2002 के शासनादेश में अंकित अन्य शर्तें/प्रतिबंध यथावत लागू रहेंगे।

प्रश्न 5: क्या यह सुविधा सभी स्तर के कर्मचारियों के लिए है?

उत्तर- नहीं, यह सुविधा केवल मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पद पर तैनात कार्मिकों के लिए है, इससे ऊपर के स्तर पर इस आदेश में कोई प्रावधान नहीं है।

प्रश्न 6: यह बदलाव किस समिति की सिफारिश पर हुआ है?

उत्तर- आदेश के अनुसार यह निर्णय वेतन समिति (2016) की संस्तुतियों पर विचार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुतियों के आधार पर लिया गया है।

प्रश्न 7: यदि किसी कर्मचारी के दो दिव्यांगजन बच्चे हैं तो उसे कुल कितनी प्रतिपूर्ति मिलेगी?

उत्तर- नई दर के अनुसार, प्रत्येक बच्चे के लिए रु0 600/- प्रतिमाह की दर से, यानी दो बच्चों के लिए कुल रु0 1,200/- प्रतिमाह की प्रतिपूर्ति अनुमन्य होगी।


निष्कर्ष

संक्षेप में, इस शासनादेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार ने दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं — पहला, मैट्रिक्स लेवल-3 तक के कार्मिकों की शिक्षा संबंधी सहायता की पात्रता को पुनरीक्षित वेतन ढांचे के अनुसार पुष्ट किया गया है; दूसरा, और सबसे महत्वपूर्ण, सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांगजन बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति दर रु0 300/- से बढ़ाकर रु0 600/- प्रतिमाह प्रति बच्चा कर दी गई है, जो तत्काल प्रभाव से लागू है। पाठकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि यह बढ़ी हुई दर 2002 के आदेश की मूल शर्तों के अधीन ही लागू होगी, इसलिए पात्रता की पुष्टि अपने विभाग की स्थापना शाखा से जरूर करें।


आधिकारिक स्रोत

यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, वित्त (सामान्य) अनुभाग-1 द्वारा जारी शासनादेश संख्या-1/2026/जी-1-आई/1418491/2026/10-17099/5/2026/दस-2026, दिनांक 03 अगस्त 2026 पर आधारित है, जिसमें पूर्ववर्ती शासनादेश संख्या-जी-1-639/दस-2002-206/2002, दिनांक 02 नवम्बर 2002 तथा शासनादेश संख्या-जी-1-269/दस-2012-206-2002, दिनांक 12 नवम्बर 2012 का संदर्भ दिया गया है। आदेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।

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