उत्तर प्रदेश शासन के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-1 ने 25 अगस्त 2026 को एक शासनादेश जारी किया है। यह उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के तहत इन्क्यूबेटर्स को मान्यता देने और उन्हें प्रोत्साहन देने की प्रक्रिया तय करता है। ध्यान रहे कि यह आदेश सीधे स्टार्टअप संस्थापकों के लिए नहीं है। यह उन संस्थाओं के लिए है जो स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेट करती हैं। स्टार्टअप्स को अप्रत्यक्ष लाभ इन्क्यूबेटर की सुविधाओं और सेवाओं के रूप में मिलेगा।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
बिंदु | विवरण |
आदेश का विषय | उ.प्र. स्टार्टअप नीति-2026 के अंतर्गत इन्क्यूबेटर्स को प्रोत्साहन दिए जाने के संबंध में दिशा-निर्देश |
विभाग | आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन |
आदेश संख्या | 43/2026/961/78-1-2026-45/2026 |
आदेश की तारीख | 25 अगस्त 2026 |
लागू होने की तारीख | आदेश में अलग से तारीख नहीं दी गई है। मूल नीति 10 जुलाई 2026 की अधिसूचना (संख्या 763/78-1-2026-45/2026) से पाँच वर्ष तक प्रभावी है |
संबंधित पक्ष | इन्क्यूबेटर के रूप में मान्यता चाहने वाली या मान्यता प्राप्त संस्थाएं |
मुख्य बदलाव | मान्यता की प्रक्रिया और 6 प्रकार के प्रोत्साहनों की शर्तें तय की गईं |
इस शासनादेश में क्या कहा गया है?
आदेश दो हिस्सों में बंटा है। पहला हिस्सा इन्क्यूबेटर को मान्यता देने की व्यवस्था बताता है। दूसरा हिस्सा मान्यता के बाद मिलने वाले प्रोत्साहनों का ब्योरा देता है।
आदेश में बार-बार आने वाले शब्द
• नोडल एजेंसी: जब तक उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन का गठन और संचालन शुरू नहीं होता, इसका अर्थ उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आदेश में संक्षिप्त नाम UPLC) है।
• PIU (नीति कार्यान्वयन इकाई): आवेदन पर अंतिम निर्णय इसी का होता है।
• EC (सशक्त समिति): KPI ढांचा और नवरत्न जैसे मामलों में इसकी भूमिका है।
• स्टार्टअप पोर्टल: जब तक मिशन का पोर्टल चालू नहीं होता, इसका अर्थ StartinUP पोर्टल है।
मान्यता की प्रक्रिया
• इन्क्यूबेटर को कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत बनी, उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास पंजीकृत और मेजबान संस्था से अलग कानूनी इकाई होना होगा।
• आवेदन स्टार्टअप पोर्टल पर होगा। साथ में अनुलग्नक-2 में दिए 11 प्रकार के दस्तावेज लगेंगे, जैसे निगमन प्रमाण-पत्र, बैंक विवरण, फ्लोर प्लान, गवर्निंग काउंसिल का संकल्प, मेंटर्स की सूची और वित्तीय स्थिरता का रोडमैप।
• AKTU से संबद्ध संस्थाओं के आवेदन पहले कुलपति, AKTU की संस्तुति के लिए जाएंगे। बाकी संस्थाओं के आवेदन सीधे नोडल एजेंसी देखेगी।
• हर आवेदन का भौतिक निरीक्षण एक समिति करेगी। AKTU वाले मामलों में समिति AKTU बनाएगी, और अन्य मामलों में यह प्रबंध निदेशक, UPLC बनाएंगे। दोनों में उस क्षेत्रीय जोन के एक प्रोफेसर (अध्यक्ष) और एक मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर का प्रतिनिधि होता है।
• PIU की मंजूरी के बाद नोडल एजेंसी Letter of Comfort (LoC) जारी करेगी।
किसे लाभ मिलेगा?
• वे संस्थाएं जो धारा 8 कंपनी के रूप में पंजीकृत हैं, उत्तर प्रदेश स्थित परिसर से इन्क्यूबेशन देती हैं और नीति की पात्रता शर्तें पूरी करती हैं।
• पात्रता शर्तों में ये बातें शामिल हैं: स्पष्ट गवर्नेंस ढांचा, स्टार्टअप चयन की पारदर्शी प्रक्रिया, अनुभवी मेंटर और विशेषज्ञ, विधिक-वित्तीय-तकनीकी परामर्श और बौद्धिक संपदा (पेटेंट, ट्रेडमार्क) सहायता।
• एक्सीलेरेशन कार्यक्रम अनुदान का दायरा थोड़ा बड़ा है। इसमें भारत सरकार या उ.प्र. सरकार द्वारा समर्थित या मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर, SEBI-पंजीकृत एंजेल निवेशक समूह, बैंक, प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान और उ.प्र. स्टार्टअप मिशन के साथ सूचीबद्ध निजी एक्सीलेरेटर आते हैं, बशर्ते उनके पास कम से कम 3 वर्ष का अनुभव हो।
किसे लाभ नहीं मिलेगा?
आदेश में कुछ स्पष्ट सीमाएं हैं:
• सरकारी मेजबान संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे इन्क्यूबेटर सामान्यतः पूंजीगत अनुदान के पात्र नहीं होंगे। विशेष परिस्थितियों में सशक्त समिति की संस्तुति पर विचार हो सकता है।
• केवल वर्चुअल रूप से इन्क्यूबेट किए गए स्टार्टअप्स OPEX की पात्रता में नहीं गिने जाएंगे। OPEX के लिए स्टार्टअप्स का भौतिक रूप से इन्क्यूबेट होना जरूरी है।
• इन्क्यूबेशन प्रबंधक छह माह से कम अवधि के लिए कार्यरत रहा हो तो उस अवधि का OPEX अनुदान नहीं मिलेगा।
• फंडिंग-लिंक्ड प्रोत्साहन में उ.प्र. स्टार्टअप फंड, उसके तहत पंजीकृत AIF या राज्य सरकार की किसी अन्य योजना से मिली राशि नहीं गिनी जाएगी।
• स्टार्टअप संस्थापकों को इस आदेश से सीधा अनुदान नहीं मिलता।
क्या बदलाव हुआ?
आदेश में पुरानी स्टार्टअप नीतियों की राशियों या शर्तों का ब्योरा नहीं दिया गया है, इसलिए पुराने और नए आदेश की सटीक तुलना यहां संभव नहीं है। आदेश में केवल संक्रमण की व्यवस्था है। नीति लागू होने से पहले जिन इन्क्यूबेटर मामलों को पुरानी नीतियों में मान्यता या वित्तीय प्रोत्साहन के लिए अनुमोदित किया गया था, वे संबंधित पुरानी नीति के अनुसार निपटाए जाएंगे। जहां पुरानी नीति और नई नीति के प्रावधानों में विरोधाभास होगा, वहां नई नीति और उसके दिशा-निर्देश प्रभावी होंगे।
उपयोगी बात यह है कि आदेश छह अलग प्रोत्साहनों को एक साथ रखता है। इनकी तुलना:-
प्रोत्साहन | राशि / सीमा | मुख्य शर्त |
पूंजीगत अनुदान | पात्र पूंजीगत व्यय का अधिकतम 50%। सामान्य क्षेत्र में ₹1.25 करोड़ और बुंदेलखंड/पूर्वांचल में ₹1.50 करोड़ तक | प्रतिपूर्ति (Reimbursement) आधार पर, केवल गैर-सरकारी इन्क्यूबेटर के लिए |
परिचालन व्यय (OPEX) अनुदान | अधिकतम ₹40 लाख प्रति वर्ष, 5 वर्ष या आत्मनिर्भर होने तक (जो पहले हो) | पहले 12 माह में कम से कम 10 भौतिक इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप |
एक्सीलेरेशन कार्यक्रम अनुदान | ₹1 लाख प्रति स्टार्टअप, अधिकतम ₹10 लाख प्रति कार्यक्रम, वर्ष में अधिकतम 5 कार्यक्रम | न्यूनतम 12 सप्ताह, कम से कम 5 स्टार्टअप का समूह |
नवरत्न इन्क्यूबेटर | ₹30 लाख प्रति वर्ष | PIU के मानदंड और सशक्त समिति का मूल्यांकन |
फंडिंग-लिंक्ड प्रोत्साहन | जुटाई गई पात्र निवेश राशि का 2%, अधिकतम ₹50 लाख वार्षिक | निवेश के समय स्टार्टअप का उस इन्क्यूबेटर में इन्क्यूबेटेड होना |
वार्षिक रैंकिंग | कोई राशि नहीं बताई गई | KPI आधारित मूल्यांकन। परिणाम अन्य प्रोत्साहनों में काम आएंगे |
इन्क्यूबेटर्स पर क्या असर पड़ेगा?
आदेश से चार व्यावहारिक असर दिखते हैं:-
1. अनुदान का बड़ा हिस्सा प्रतिपूर्ति आधारित है। पूंजीगत अनुदान में पहले इन्क्यूबेटर को अपनी जेब से खर्च करना होगा। राशि उसके बाद लौटाई जाएगी। इसलिए शुरुआती कार्यशील पूंजी जरूरी है।
2. OPEX आगे की किस्तों के लिए रिपोर्टिंग से बंधा है। पिछली किस्त का चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित और UDIN वाला उपयोगिता प्रमाण-पत्र (अनुलग्नक-3) जमा किए बिना अगली किस्त पर विचार नहीं होगा।
3. प्रदर्शन की निगरानी होगी। आकलन त्रैमासिक होगा। अगर कोई इन्क्यूबेटर लगातार दो वर्ष तय शर्तें पूरी नहीं करता, तो प्रोत्साहन का स्थगन, कटौती, समायोजन, भविष्य की सहायता पर रोक या मान्यता का निरस्तीकरण हो सकता है।
4. अच्छे प्रदर्शन का आगे भी फायदा। नवरत्न दर्जा और वार्षिक रैंकिंग प्रदर्शन आधारित हैं, इसलिए अच्छा प्रदर्शन आगे के प्रोत्साहनों में काम आएगा।
उदाहरण से समझिए
ध्यान दें: नीचे के सभी उदाहरण काल्पनिक आंकड़ों पर हैं। इनका मकसद सिर्फ आदेश की गणना-पद्धति समझाना है। |
उदाहरण 1: पूंजीगत अनुदान
स्थिति | पात्र पूंजीगत व्यय | 50% | अनुमन्य अधिकतम सीमा | अधिकतम अनुदान |
सामान्य क्षेत्र | ₹4 करोड़ | ₹2 करोड़ | ₹1.25 करोड़ | ₹1.25 करोड़ |
बुंदेलखंड / पूर्वांचल | ₹4 करोड़ | ₹2 करोड़ | ₹1.50 करोड़ | ₹1.50 करोड़ |
सामान्य क्षेत्र | ₹2 करोड़ | ₹1 करोड़ | ₹1.25 करोड़ | ₹1 करोड़ |
अगर स्वीकृत सहायता ₹1 करोड़ हो, तो आदेश के अनुसार पहली किस्त में अधिकतम 25% (₹25 लाख) प्रतिपूर्ति हो सकती है। पहली किस्त जारी होने के तीन माह बाद, संपत्तियों की खरीद और स्थापना के अभिलेखों के सत्यापन पर शेष राशि का अधिकतम 75% (₹75 लाख) PIU के अनुमोदन के बाद प्रतिपूर्ति के रूप में देय होगा।
उदाहरण 2: फंडिंग-लिंक्ड प्रोत्साहन
• किसी वर्ष में इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स ने कुल ₹10 करोड़ की पात्र निवेश राशि जुटाई। 2% के हिसाब से प्रोत्साहन ₹20 लाख बनता है।
• अगर पात्र निवेश ₹30 करोड़ हो, तो 2% यानी ₹60 लाख बनेगा, लेकिन ₹50 लाख की वार्षिक सीमा के कारण अधिकतम ₹50 लाख ही मिलेगा।
उदाहरण 3: OPEX का खर्च-विभाजन
आदेश के अनुसार OPEX की कुल राशि का लगभग 60% इन्क्यूबेशन केंद्र के लिए नियुक्त समर्पित कर्मचारियों के वेतन और पारिश्रमिक पर खर्च होना है। शेष लगभग 40% रखरखाव, व्यावसायिक सेवाओं, क्षमता संवर्धन, मेंटरिंग, नेटवर्किंग और आउटरीच जैसी अनुमन्य गतिविधियों पर। उदाहरण के लिए, ₹40 लाख के अनुदान में यह विभाजन लगभग ₹24 लाख और ₹16 लाख बैठता है।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
• अलग बैंक खाता: अनुदान और खर्च का सारा लेन-देन पंजीकृत इकाई के अपने समर्पित बैंक खाते से होना चाहिए।
• रिकॉर्ड रखना: खर्च के बिल, चालान, भुगतान साक्ष्य और सत्यापन रिपोर्ट सुरक्षित रखने होंगे। चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित वार्षिक लेखा-परीक्षित वित्तीय विवरण (बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता) अनुदान स्वीकृति की तारीख से कम से कम पाँच वर्ष सुरक्षित रखने होंगे।
• संपत्ति की बिक्री पर रोक: पूंजीगत अनुदान से बनी संपत्तियों को PIU की पूर्व स्वीकृति के बिना कम से कम पाँच वर्ष तक बेचा, हस्तांतरित, पट्टे पर या गिरवी नहीं रखा जा सकता।
• गलत जानकारी का जोखिम: आवेदन, दावे, उपयोगिता प्रमाण-पत्र या डेटा में तथ्यात्मक त्रुटि, मिथ्या या भ्रामक जानकारी मिलने पर प्रोत्साहन निरस्त हो सकता है और ब्याज सहित राशि की वसूली हो सकती है।
• बंद होने या स्वामित्व बदलने की सूचना: संचालन बंद होने, विलय या विघटन, या स्वामित्व और नियंत्रण में महत्वपूर्ण बदलाव की सूचना 30 दिन के भीतर नोडल एजेंसी को देनी होगी।
• इक्विटी पर रोक: निःशुल्क इन्क्यूबेशन अवधि में इन्क्यूबेट किए गए स्टार्टअप्स से इक्विटी, शेयरहोल्डिंग, स्वामित्व हित या अन्य वित्तीय हित नहीं लिया जा सकता। उ.प्र. स्टार्टअप मिशन या राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किसी विशेष कार्यक्रम में इसकी छूट हो सकती है।
• दोहरे लाभ पर निषेध: एक्सीलेरेशन कार्यक्रम में जिस समूह के लिए सरकारी सहायता ली गई हो, उन स्टार्टअप्स से उसी कार्यक्रम के लिए शुल्क नहीं लिया जा सकता। इसके लिए संस्था को पोर्टल पर स्वप्रमाणन देना होगा।
• निरीक्षण की छूट: PIU, नोडल एजेंसी, PMU या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत संस्था कभी भी भौतिक या वर्चुअल निरीक्षण, सत्यापन या ऑडिट कर सकती है।
• पहले साल की छूट और उसके बाद की सख्ती: पहले वर्ष में न्यूनतम 2 पंजीकृत स्टार्टअप की अनिवार्यता नहीं है, पर पहले 12 माह पूरे होने तक न्यूनतम 10 पंजीकृत और भौतिक रूप से इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स का पोर्टफोलियो बनाना होगा। दूसरे वर्ष से न्यूनतम 2 स्टार्टअप जरूरी हैं। 2 से 9 स्टार्टअप होने पर अनुदान आनुपातिक होगा और 10 या अधिक पर पूरा। आनुपातिक गणना का सूत्र आदेश में नहीं दिया गया है, इसलिए उसके लिए नोडल एजेंसी से स्पष्टीकरण लेना होगा।
• KPI संबंधी कार्रवाई की शर्त: आदेश के अनुसार लगातार दो वर्ष में निर्धारित KPI के न्यूनतम 70% लक्ष्य की प्राप्ति या प्राप्त अनुदान के न्यूनतम 80% उपयोग की शर्त पूरी न होने पर कार्रवाई हो सकती है। दोनों शर्तें अलग-अलग लागू हैं या साथ-साथ, यह वाक्य-रचना से पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
अब क्या करना होगा?
अगर आप कोई संस्था हैं और इन्क्यूबेटर के रूप में मान्यता या प्रोत्साहन चाहते हैं, तो आदेश के अनुसार क्रम यह बनता है:
1. कानूनी ढांचा तैयार करें: धारा 8 कंपनी के रूप में उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास पंजीकरण कराएं और अलग बैंक खाता खोलें।
2. दस्तावेज जुटाएं: अनुलग्नक-2 की सूची (निगमन प्रमाण-पत्र, कैंसिल चेक और 6 माह का बैंक स्टेटमेंट, फ्लोर प्लान, समर्पित वेबसाइट का विवरण, गवर्निंग काउंसिल का संकल्प, संचालन नीति, मेंटर सूची, रोडमैप की प्रस्तुति, प्रमुख कर्मियों के नियुक्ति पत्र आदि) के अनुसार सब कुछ तैयार रखें।
3. आवेदन करें: स्टार्टअप पोर्टल (फिलहाल StartinUP पोर्टल) पर निर्धारित प्रारूप में आवेदन करें। AKTU से संबद्ध संस्था हैं तो कुलपति, AKTU की संस्तुति की प्रक्रिया अपनाएं।
4. भौतिक सत्यापन में सहयोग करें: क्षेत्रीय समिति निरीक्षण करेगी।
5. LoC प्राप्त करें: PIU के अनुमोदन के बाद नोडल एजेंसी मान्यता का Letter of Comfort जारी करेगी।
6. प्रोत्साहन के लिए अलग आवेदन करें: मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर हर प्रोत्साहन के लिए स्टार्टअप पोर्टल पर अलग से आवेदन करेगा।
7. अनुपालन बनाए रखें: उपयोगिता प्रमाण-पत्र (CA द्वारा प्रमाणित, UDIN सहित), परिसंपत्तियों का अद्यतन रजिस्टर, वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट और इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स की अद्यतन सूची जमा करते रहें।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
1. क्या यह आदेश स्टार्टअप शुरू करने वालों के लिए है?
उत्तर- नहीं। यह इन्क्यूबेटर्स की मान्यता और उन्हें मिलने वाले प्रोत्साहनों के लिए है। स्टार्टअप्स को लाभ इन्क्यूबेटर की सेवाओं के जरिए मिलेगा।
2. क्या किसी सरकारी संस्थान में चल रहा इन्क्यूबेटर पूंजीगत अनुदान ले सकता है?
उत्तर- आदेश के अनुसार सामान्यतः नहीं। केवल विशेष परिस्थितियों में सशक्त समिति की संस्तुति पर विचार हो सकता है।
3. पूंजीगत अनुदान में कौन-से उपकरण गिने जाते हैं?
उत्तर- अनुलग्नक-1 में कंप्यूटर, सर्वर, 3D प्रिंटर, CNC मशीन, नेटवर्किंग उपकरण, सॉफ्टवेयर, इन्क्यूबेटर की स्थापना के लिए सिविल कार्य आदि सहित 26 मदें संकेतात्मक रूप से दी गई हैं। आदेश के अनुसार यह सूची केवल उदाहरणात्मक है और मद की स्वीकृति इन्क्यूबेटर की आवश्यकता तथा गवर्निंग काउंसिल की अनुशंसा पर निर्भर करेगी।
4. क्या स्टार्टअप्स से इक्विटी ली जा सकती है?
उत्तर- निःशुल्क इन्क्यूबेशन की अवधि में नहीं। केवल उ.प्र. स्टार्टअप मिशन या राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किसी विशेष कार्यक्रम में इसकी छूट हो सकती है।
5. क्या पहले साल में OPEX मिलने के लिए 2 स्टार्टअप जरूरी हैं?
उत्तर- नहीं। पहले साल में यह अनिवार्यता नहीं है, लेकिन 12 माह पूरे होने तक कम से कम 10 पंजीकृत और भौतिक रूप से इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स का पोर्टफोलियो बनाना होगा।
6. अगर कोई इन्क्यूबेटर 10 स्टार्टअप तक नहीं पहुंच पाया तो?
उत्तर- आदेश के अनुसार दी गई अनुदान राशि का समायोजन आगामी वित्तीय वर्ष में देय OPEX अनुदान से किया जा सकता है।
7. क्या उ.प्र. स्टार्टअप फंड से मिला निवेश फंडिंग-लिंक्ड प्रोत्साहन में गिना जाएगा?
उत्तर- नहीं। उ.प्र. स्टार्टअप फंड के तहत पंजीकृत AIF या उ.प्र. स्टार्टअप फंड से मिला निवेश इस प्रोत्साहन की गणना में शामिल नहीं होगा।
8. एक्सीलेरेशन कार्यक्रम के लिए आवेदन कब करना होगा?
उत्तर- कार्यक्रम शुरू होने से कम से कम एक माह पहले, स्टार्टइनयूपी पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में।
निष्कर्ष
यह आदेश यूपी स्टार्टअप नीति 2026 में इन्क्यूबेटर्स के लिए मान्यता और छह तरह के प्रोत्साहनों की प्रक्रिया तय करता है। इसमें अधिकतर सहायता शर्तों, दस्तावेज़ी सत्यापन और प्रदर्शन-निगरानी से जुड़ी है। संस्थाओं को सबसे ज्यादा ध्यान धारा 8 कंपनी की अलग पंजीकृत इकाई, भौतिक रूप से इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स की संख्या और UDIN सहित उपयोगिता प्रमाण-पत्र जैसी बातों पर देना चाहिए। आवेदन से पहले पूरा मूल आदेश जरूर पढ़ें।
आधिकारिक स्रोत
यह लेख उत्तर प्रदेश शासन, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-1 के शासनादेश संख्या 43/2026/961/78-1-2026-45/2026, दिनांक 25 अगस्त 2026 पर आधारित है। यह आदेश प्रमुख सचिव द्वारा प्रबंध निदेशक, यूपीएलसी, लखनऊ को संबोधित है। मूल नीति की अधिसूचना संख्या 763/78-1-2026-45/2026, दिनांक 10 जुलाई 2026 है।
Official Link of GO- https://shasanadesh.up.gov.in/GO/ViewGOPDF_list_user.aspx?id1=NDMjMTg4IzEjMjAyNg== |