नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए CGHS (Central Government Health Scheme) तथा CS(MA) Rules, 1944 के तहत मेडिकल रिइम्बर्समेंट (Medical Reimbursement) से जुड़े वित्तीय अधिकारों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार अब विभागाध्यक्ष (Head of Department) बिना Integrated Finance Division (IFD) से पूर्व अनुमोदन लिए 10 लाख रुपये तक के पात्र मेडिकल रिइम्बर्समेंट मामलों का निस्तारण कर सकेंगे।
यह निर्णय मेडिकल दावों के निपटारे में होने वाली देरी को कम करने और कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों को समय पर राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है।
क्या हुआ है बड़ा बदलाव?
पहले विभागाध्यक्ष केवल 5 लाख रुपये तक के पात्र मेडिकल रिइम्बर्समेंट मामलों का निस्तारण बिना IFD की अनुमति के कर सकते थे। नए आदेश के बाद यह सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।
इसका सीधा लाभ उन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा जिनके चिकित्सा व्यय अधिक होते हैं और जिन्हें पहले लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
किन मामलों में मिलेगा लाभ?
नया प्रावधान केवल उन मामलों पर लागू होगा—
• जहां CGHS अथवा CS(MA) नियमों में किसी प्रकार की छूट (Relaxation) नहीं दी जा रही हो।
• दावा CGHS द्वारा निर्धारित पैकेज दरों एवं नियमों के अनुरूप हो।
• चिकित्सा व्यय नियमानुसार स्वीकार्य हो।
• सभी आवश्यक दस्तावेज एवं प्रमाणपत्र उपलब्ध हों।
• यदि किसी मामले में नियमों से छूट की आवश्यकता होगी, तो पूर्व की तरह अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
इस निर्णय के बाद कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है—
• मेडिकल बिलों का निस्तारण पहले की तुलना में अधिक तेजी से होगा।
• उच्च मूल्य वाले दावों में अनावश्यक फाइल मूवमेंट कम होगी।
• गंभीर बीमारी के उपचार के बाद भुगतान में देरी कम होगी।
• विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया सरल बनेगी।
• पेंशनभोगियों को भी समय पर चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति मिलने में सुविधा होगी।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने माना कि चिकित्सा उपचार की लागत लगातार बढ़ रही है। कई मामलों में कर्मचारियों के मेडिकल दावे 5 लाख रुपये से अधिक होने के कारण उन्हें लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ता था।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभागाध्यक्षों की वित्तीय शक्तियों का विस्तार किया गया है ताकि पात्र मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके और कर्मचारियों को राहत मिल सके।
क्या सभी कर्मचारियों पर लागू होगा?
यह व्यवस्था उन केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों पर लागू होगी जो CGHS अथवा Central Services (Medical Attendance) Rules, 1944 के अंतर्गत आते हैं।
राज्य सरकारों के कर्मचारियों पर यह आदेश स्वतः लागू नहीं होगा। संबंधित राज्य सरकारें अपने नियमों के अनुसार अलग निर्णय ले सकती हैं।
मेडिकल रिइम्बर्समेंट दावा करते समय रखें इन बातों का ध्यान
कर्मचारियों को दावा प्रस्तुत करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—
• सभी मूल चिकित्सा बिल सुरक्षित रखें।
• अस्पताल की डिस्चार्ज समरी संलग्न करें।
• डॉक्टर द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन एवं जांच रिपोर्ट संलग्न करें।
• निर्धारित समय-सीमा के भीतर दावा प्रस्तुत करें।
• यदि उपचार CGHS के पैनल अस्पताल में हुआ है तो संबंधित दस्तावेज पूर्ण रखें।
क्या बदले हैं CGHS के नियम?
यह संशोधन केवल वित्तीय अधिकारों (Delegation of Financial Powers) से संबंधित है। CGHS के मूल पात्रता नियम, उपचार प्रक्रिया, पैकेज दरें तथा रिइम्बर्समेंट की पात्रता में कोई व्यापक बदलाव घोषित नहीं किया गया है।
अर्थात कर्मचारियों को अभी भी CGHS एवं CS(MA) Rules के अनुसार ही दावा प्रस्तुत करना होगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
आज के समय में गंभीर बीमारियों के इलाज पर लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। ऐसे में यदि पात्र मेडिकल बिलों का भुगतान जल्दी हो जाए तो कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है।सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
CGHS मेडिकल रिइम्बर्समेंट नियमों में किया गया यह संशोधन केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत भरा कदम है। अब 10 लाख रुपये तक के पात्र मेडिकल रिइम्बर्समेंट मामलों का निस्तारण विभागाध्यक्ष स्तर पर ही किया जा सकेगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। हालांकि कर्मचारियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि उनका दावा CGHS एवं CS(MA) नियमों के अनुरूप होना चाहिए तथा सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा किए जाएं।
(नोट: यह संशोधन विभागाध्यक्षों की वित्तीय शक्तियों से संबंधित है। इससे CGHS की पात्रता, चिकित्सा सुविधाओं या उपचार के मूल नियमों में स्वतः कोई परिवर्तन नहीं माना जाएगा।)
आधिकारिक स्रोत: https://cghs.mohfw.gov.in
स्रोत:
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health & Family Welfare), भारत सरकार द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) संख्या S.11030/4/2026-EHS(8385264), दिनांक 16 फरवरी 2026।