चिकित्सा प्रतिपूर्ति: 30 सितंबर 2026 तक के ऑफलाइन दावे पुरानी प्रक्रिया से निपटेंगे
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चिकित्सा प्रतिपूर्ति: 30 सितंबर 2026 तक के ऑफलाइन दावे पुरानी प्रक्रिया से निपटेंगे

उत्तर प्रदेश सरकार ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के ऑनलाइन होने के बाद पैदा हुई एक उलझन दूर की है। जिन दावों की कागज़ी प्रति विभागों को 30 सितंबर 2026 तक मिल चुकी थी, उन्हें पुरानी भौतिक प्रक्रिया से ही निपटाया जाएगा। इसके लिए 31 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा तय की गई है। जानिए इसका असर किन पर पड़ेगा।

📅 16 अक्टूबर 2026 ·👁 11 views

परिचय: उत्तर प्रदेश के चिकित्सा अनुभाग-6 ने 16 अक्टूबर 2026 को एक नया शासनादेश जारी किया है। यह उन सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए है जिन्होंने चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) का दावा कागज़ पर जमा किया था। यह आदेश इसलिए ज़रूरी है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे दावों के भविष्य को लेकर विभागों में असमंजस था।

एक नज़र में (Quick Summary)

बिंदु

विवरण

जारी करने वाला

चिकित्सा अनुभाग-6, उत्तर प्रदेश शासन (सचिव: रितु माहेश्वरी)

शासनादेश संख्या

251/2026/आई0/1496026/2026-5-6099/93/2026-6

दिनांक

16 अक्टूबर 2026

विषय

सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे ऑनलाइन प्रस्तुत करने के संबंध में

किन दावों पर लागू

जो विभागों को 30-09-2026 तक भौतिक (physical) रूप में प्राप्त हो चुके हैं

मुख्य निर्देश

ऐसे दावे पहले की तरह तकनीकी परीक्षण के लिए CMO/CMS को भेजे जाएँ

कार्यवाही की अंतिम तिथि

31-10-2026

पृष्ठभूमि: पहले क्या आदेश था?

इस आदेश में दो पुराने शासनादेशों का संदर्भ दिया गया है: संख्या 220/2026 (दिनांक 09-09-2026) और संख्या 227/2026 (दिनांक 18-09-2026)। इनके ज़रिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के निस्तारण को डिजिटल, समयबद्ध, मानकीकृत और पारदर्शी बनाने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए जनहित स्वास्थ्य पोर्टल को मानव सम्पदा पोर्टल से इंटीग्रेट किया गया।

उन आदेशों में तय हुआ था कि 01-10-2026 के बाद सभी दावे विकसित चिकित्सा पोर्टल पर ही आवेदित किए जाएँगे और कोई भी दावा भौतिक रूप से स्वीकार नहीं होगा।

समस्या क्या थी?

आदेश के अनुसार, कई विभागों के पास 30-09-2026 तक कागज़ पर मिले दावे पहले से मौजूद थे। सवाल यह था कि इन दावों को तकनीकी परीक्षण के लिए तकनीकी परीक्षण अधिकारी को किस तरीके (mode) से भेजा जाए, क्योंकि नई व्यवस्था में कागज़ी दावे स्वीकार ही नहीं होने थे।

नया निर्देश: अब क्या करना है ?

इस शासनादेश के अनुसार:

1. कौन से दावे: जो चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे विभिन्न विभागों को 30-09-2026 तक भौतिक रूप से मिल चुके हैं।

2. तकनीकी परीक्षण के लिए: ये दावे मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) या मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को भौतिक रूप से ही भेजे जाएँगे, जैसा पहले होता था।

3. परीक्षण के बाद: तकनीकी परीक्षणकर्ता भी इन दावों की जाँच भौतिक रूप से करेंगे और दावे संबंधित विभाग को वापस भेजेंगे।

4. भुगतान: इसके बाद विभाग पहले की तरह संबंधित प्रतिपूर्ति दावे के भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।

5. समय-सीमा: यह सारी कार्यवाही 31-10-2026 तक पूरी करनी है।

पहले बनाम अब (Before vs After)

स्थिति

09-09 / 18-09-2026 के आदेश के बाद की उलझन

16-10-2026 के आदेश के बाद

01-10-2026 के बाद नए दावे

केवल ऑनलाइन पोर्टल पर

इस आदेश में बदलाव का उल्लेख नहीं है

30-09-2026 तक मिले कागज़ी दावे

भेजने का तरीका स्पष्ट नहीं

भौतिक रूप से CMO/CMS को भेजे जाएँगे

तकनीकी परीक्षण

असमंजस

भौतिक रूप से, पहले की तरह

अंतिम तिथि

तय नहीं थी

31-10-2026

समय-रेखा (Timeline)

चित्र: चिकित्सा प्रतिपूर्ति आदेशों की समय-रेखा

किसे क्या समझना चाहिए?

सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारी: यदि आपने 30 सितंबर 2026 तक अपने विभाग में कागज़ी दावा जमा कर दिया था, तो आदेश के अनुसार उसे दोबारा ऑनलाइन करने की बात नहीं कही गई है। उसकी प्रक्रिया पुराने तरीके से आगे बढ़ेगी। अपने विभाग से अपने दावे की स्थिति पूछ लेना उचित रहेगा।

विभागीय कार्यालय: 30-09-2026 तक प्राप्त सभी दावों की सूची बनाकर उन्हें CMO/CMS के पास भेजना और परीक्षण के बाद भुगतान की कार्यवाही 31-10-2026 तक पूरी करना आवश्यक है।

CMO/CMS और तकनीकी परीक्षणकर्ता: भौतिक रूप से प्राप्त दावों का परीक्षण कर उन्हें संबंधित विभाग को वापस करना है।

एक उदाहरण (सिर्फ समझाने के लिए)

मान लीजिए किसी कर्मचारी ने अपना दावा 20 सितंबर 2026 को विभाग में जमा किया। यह 30-09-2026 से पहले की तारीख़ है, इसलिए यह दावा इस आदेश के दायरे में आएगा। विभाग इसे CMO/CMS को भेजेगा, वहाँ परीक्षण होगा, फिर दावा विभाग लौटेगा और भुगतान की कार्यवाही होगी, सब 31 अक्टूबर तक। इसके उलट, 5 अक्टूबर 2026 को जमा किया गया कागज़ी दावा इस आदेश में शामिल नहीं बताया गया है; ऐसे मामले में विभाग या पोर्टल संबंधी निर्देश देखना बेहतर होगा।

(यह काल्पनिक उदाहरण है, आदेश का हिस्सा नहीं।)

आम गलतियाँ जिनसे बचें

• यह मान लेना कि इस आदेश से ऑनलाइन व्यवस्था खत्म हो गई। आदेश केवल 30-09-2026 तक प्राप्त कागज़ी दावों के लिए है।

• अपने दावे की जमा तारीख़ का रिकॉर्ड (रसीद/डायरी नंबर) न रखना।

• 31-10-2026 की समय-सीमा को नज़रअंदाज़ करना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. यह शासनादेश किसने जारी किया?

उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग-6 ने, सचिव रितु माहेश्वरी के हस्ताक्षर से, 16 अक्टूबर 2026 को।

2. यह किन दावों पर लागू है?

उन चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों पर जो विभिन्न विभागों को 30-09-2026 तक भौतिक रूप से प्राप्त हो चुके थे।

3. क्या ऐसे दावों को अब ऑनलाइन करना होगा?

आदेश में ऐसा निर्देश नहीं है। इन दावों को पहले की तरह भौतिक रूप से परीक्षण के लिए CMO/CMS को भेजने को कहा गया है।

4. प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि क्या है?

31 अक्टूबर 2026।

5. तकनीकी परीक्षण कौन करेगा?

मुख्य चिकित्साधिकारी/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के स्तर पर तकनीकी परीक्षणकर्ता, जो दावे जाँचकर संबंधित विभाग को वापस भेजेंगे।

6. भुगतान कौन करेगा?

परीक्षण के बाद संबंधित विभाग पूर्व की भाँति भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।

7. 1 अक्टूबर 2026 के बाद के दावों का क्या होगा?

इस आदेश में उनके बारे में नया निर्देश नहीं है। पहले के आदेशों में उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदित करने की बात थी।

स्रोत और अस्वीकरण

स्रोत: चिकित्सा अनुभाग-6, उत्तर प्रदेश शासन, शासनादेश संख्या 251/2026/आई0/1496026/2026-5-6099/93/2026-6, दिनांक 16 अक्टूबर 2026। संदर्भित आदेश: संख्या 220/2026 (09-09-2026) और 227/2026 (18-09-2026)।

यह एक स्वतंत्र सूचना पोर्टल है; आधिकारिक पुष्टि के लिए मूल शासनादेश देखें।


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