शासनादेश का संक्षिप्त परिचय
यह आदेश उत्तर प्रदेश शासन के आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-4 की ओर से जिलाधिकारी, हाथरस को भेजा गया है। इसका मुख्य विषय राज्य कर विभाग, उत्तर प्रदेश के विभागीय कार्यालय भवन और आवासीय भवन के निर्माण हेतु आवश्यक भूमि की व्यवस्था करना है। जिलाधिकारी हाथरस की ओर से इस संबंध में पहले भी दो पत्र भेजे जा चुके थे, जिनके आधार पर शासन ने अब औपचारिक स्वीकृति प्रदान की है।
महत्वपूर्ण जानकारी
शासनादेश संख्या | 11/2026/673/11-4099/52/2025 |
|---|---|
शासनादेश दिनांक | 24 अगस्त 2026 |
विभाग | आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-4, लखनऊ |
विषय | राज्य कर विभाग, उत्तर प्रदेश के विभागीय कार्यालय भवन/आवासीय भवन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन। |
जारीकर्ता | पी0 गुरुप्रसाद, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
प्राप्तकर्ता | जिलाधिकारी, हाथरस |
इस आदेश का आधार जिलाधिकारी हाथरस के दो पत्र हैं—पहला पत्र संख्या 89/डी0एल0आर0सी0-2025, दिनांक 4 अगस्त 2025, और दूसरा पत्र संख्या 533/डी0एल0आर0सी0-2026, दिनांक 6 जून 2026। इन्हीं पत्रों के माध्यम से हाथरस देहात स्थित खसरा संख्या 296 (कुल रकबा 7.981 हेक्टेयर) की भूमि में से 0.3000 हेक्टेयर यानी लगभग 3000 वर्ग मीटर नजूल भूमि राज्य कर विभाग के पक्ष में आवंटित करने का प्रस्ताव भेजा गया था।
शासनादेश में क्या निर्णय लिया गया?
शासन ने वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के पुराने कार्यालय ज्ञाप (संख्या ए-2-75/दस-77-14(4)/74, दिनांक 3 फरवरी 1977) में दिए गए सामान्य प्रावधानों में इस मामले के लिए विशेष रूप से छूट दी है। इसका अर्थ यह है कि सामान्य नियमों से हटकर, अपवादस्वरूप, इस भूमि को जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल दर पर पूरी छूट देते हुए राज्य कर विभाग को निःशुल्क आवंटित/हस्तांतरित करने की स्वीकृति राज्यपाल महोदय ने प्रदान कर दी है। यानी राज्य कर विभाग को यह भूमि खरीदने के लिए कोई भुगतान नहीं करना होगा, बल्कि यह सरकार के भीतर एक विभाग से दूसरे विभाग को हस्तांतरित की जा रही है, ताकि वहां कार्यालय और आवासीय भवन का निर्माण किया जा सके।
किसे लाभ/प्रभाव होगा?
इस निर्णय का सीधा लाभ राज्य कर विभाग, उत्तर प्रदेश को होगा, क्योंकि उसे हाथरस में अपने कार्यालय और कर्मचारियों के आवास के लिए भूमि मुफ्त में मिल जाएगी। इससे विभाग के हाथरस स्थित कामकाज को एक स्थायी और उपयुक्त भवन मिलने की संभावना बनेगी, जिससे कर्मचारियों को बेहतर कार्यस्थल और आवास सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, जिला प्रशासन और आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के लिए भी यह आदेश आगे की प्रक्रिया पूरी करने का आधार बनेगा।
मुख्य बिंदु
शासनादेश में भूमि के आवंटन को लेकर सात महत्वपूर्ण शर्तें और प्रतिबंध रखे गए हैं:-
1- धार्मिक/ऐतिहासिक भवन न हो: आवंटित नजूल भूमि पर किसी भी धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व की कोई इमारत नहीं होनी चाहिए।
2- प्रयोजन बदलने पर अनुमति जरूरी: यदि भविष्य में यह भूमि प्रस्तावित कार्य (कार्यालय/आवासीय भवन निर्माण) से अलग किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जाती है, तो इसके लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से दोबारा अनुमति लेनी होगी।
3- तीन वर्ष की समय-सीमा: यदि यह भूमि तीन साल के भीतर प्रस्तावित निर्माण कार्य के लिए उपयोग में नहीं लाई गई, तो उसे वापस आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को लौटाना होगा।
4- यह कोई नजीर नहीं बनेगी: इस आवंटन को भविष्य में किसी अन्य मामले के लिए उदाहरण या मिसाल के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा सकेगा।
5- केवल तय उद्देश्य के लिए उपयोग: आवंटित भूमि का इस्तेमाल केवल उसी काम के लिए किया जाएगा, जिसके लिए इसे आवंटित किया गया है।
6- भू-उपयोग नियमों का पालन: प्रभावी नियमों, विनियमनों और महायोजना में तय भू-उपयोग के अनुसार ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
7- न्यायालय के निर्णय के अधीन: यदि इस भूमि से जुड़ा कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो यह आवंटन उस पर आने वाले अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।
कर्मचारियों/लाभार्थियों के लिए इसका क्या मतलब है?
राज्य कर विभाग के हाथरस स्थित कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए यह आदेश एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे विभाग को अपना स्वयं का कार्यालय भवन और आवासीय भवन बनाने की राह खुल गई है। हालांकि इसके साथ ही विभाग की यह जिम्मेदारी भी बनती है कि वह तय समय-सीमा यानी तीन वर्षों के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर दे, अन्यथा भूमि वापस लौटानी पड़ सकती है। साथ ही, भूमि का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए करना होगा जिसके लिए इसे आवंटित किया गया है।
जरूरी शर्तें या निर्देश
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि जिलाधिकारी, हाथरस को इस आदेश के अनुसार आगे की आवश्यक कार्यवाही करनी है। इसकी प्रतिलिपि सूचना और आवश्यक कार्यवाही हेतु महालेखाकार उत्तर प्रदेश (प्रयागराज), प्रमुख सचिव राज्य कर विभाग, आयुक्त अलीगढ़ मंडल, आयुक्त राज्य कर उत्तर प्रदेश (सम्पत्ति अनुभाग, विभूति खंड, गोमती नगर, लखनऊ) और निदेशक आवास बंधु उत्तर प्रदेश को भी भेजी गई है।
निष्कर्ष
24 अगस्त 2026 को जारी हुआ यह शासनादेश हाथरस में राज्य कर विभाग के लिए एक नए कार्यालय और आवासीय ढांचे की नींव रखता है। खसरा संख्या 296 की नजूल भूमि में से 3000 वर्ग मीटर भूमि को निःशुल्क आवंटित करने का यह निर्णय जहां एक ओर विभागीय सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है, वहीं दूसरी ओर इसके साथ जुड़ी शर्तें यह सुनिश्चित करती हैं कि भूमि का उपयोग सही उद्देश्य के लिए ही हो और तय समय-सीमा का पालन किया जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: यह शासनादेश किस विषय से संबंधित है?
उत्तर: यह शासनादेश हाथरस में राज्य कर विभाग, उत्तर प्रदेश के विभागीय कार्यालय भवन और आवासीय भवन के निर्माण हेतु निःशुल्क नजूल भूमि आवंटित करने से संबंधित है।
प्रश्न 2: कितनी भूमि आवंटित की गई है?
उत्तर: हाथरस देहात के खसरा संख्या 296 (कुल रकबा 7.981 हेक्टेयर) में से 0.3000 हेक्टेयर यानी लगभग 3000 वर्ग मीटर नजूल भूमि आवंटित की गई है।
प्रश्न 3: यह भूमि किस दर पर आवंटित की गई है?
उत्तर: जिलाधिकारी सर्किल दर पर पूरी छूट देते हुए यह भूमि निःशुल्क आवंटित/हस्तांतरित की गई है।
प्रश्न 4: क्या इस भूमि के उपयोग की कोई समय-सीमा तय की गई है?
उत्तर: हां, यदि यह भूमि तीन वर्षों के भीतर प्रस्तावित निर्माण कार्य के लिए उपयोग में नहीं लाई जाती, तो इसे आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को वापस करना होगा।
प्रश्न 5: यह आदेश किसके द्वारा जारी किया गया है?
उत्तर: यह शासनादेश उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव पी0 गुरुप्रसाद द्वारा आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-4 की ओर से जारी किया गया है।