संक्षिप्त परिचय
उत्तर प्रदेश शासन के न्याय अनुभाग-1 (उच्च न्यायालय) ने 31 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत इलाहाबाद उच्च न्यायालय (कोर्ट मैनेजर केंद्रीयकृत सेवा) नियमावली, 2026 को लागू किया गया है। यह नियमावली संविधान के अनुच्छेद 229(2) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बनाई गई है।
यह नियमावली उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो हाईकोर्ट या जिला अदालतों में "कोर्ट मैनेजर" के पद पर काम कर रहे हैं या भविष्य में इस पद के लिए आवेदन करना चाहते हैं। इसमें भर्ती की प्रक्रिया, योग्यता, आयु सीमा, वेतनमान, परिवीक्षा, स्थानांतरण, अनुशासन और सेवानिवृत्ति जैसे सभी पहलुओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
नीचे इस अधिसूचना की हर जरूरी बात को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि पाठक को मूल दस्तावेज़ पढ़े बिना भी इसका पूरा अर्थ और असर समझ में आ जाए।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
बिंदु | विवरण |
|---|---|
आदेश का विषय | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (कोर्ट मैनेजर केंद्रीयकृत सेवा) नियमावली, 2026 |
विभाग | न्याय अनुभाग-1 (उच्च न्यायालय), उत्तर प्रदेश शासन |
आदेश संख्या | 4/2026/1213/सात-न्याय-1-2026-07-1099/29/2021 |
आदेश दिनांक | 31 अगस्त 2026 |
लागू होने की तारीख | राजकीय गजट में प्रकाशन की तारीख से (नियम 1(2)) |
संबंधित कर्मचारी/लाभार्थी | इलाहाबाद हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों में कार्यरत/नियुक्त होने वाले कोर्ट मैनेजर |
कुल स्वीकृत पद | 81 (हाईकोर्ट के लिए 6, जिला न्यायालयों के लिए 75) |
वेतनमान | ₹56,100–₹1,77,500 (लेवल-10), समूह-ख (राजपत्रित) |
हस्ताक्षरकर्ता | उदय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव |
इस नियमावली में क्या कहा गया है?
यह नियमावली इलाहाबाद हाईकोर्ट और उससे संबद्ध जिला न्यायालयों में "कोर्ट मैनेजर" के पद की भर्ती और सेवा शर्तों को नियमित करने के लिए बनाई गई है। इसे आठ भागों में बांटा गया है, जो संवर्ग संरचना, भर्ती प्रक्रिया, योग्यता, नियुक्ति, वेतन, अनुशासन और अन्य सेवा शर्तों को कवर करते हैं।
नियमावली के अनुसार कोर्ट मैनेजर के कुल 81 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 6 पद हाईकोर्ट के लिए और 75 पद जिला न्यायालयों के लिए हैं। यह पद समूह-ख (राजपत्रित) श्रेणी का है और इसका वेतनमान ₹56,100–₹1,77,500 (लेवल-10) निर्धारित किया गया है।
भर्ती की प्रक्रिया दो प्रकार से पूरी होगी — पहला, विद्यमान संविदा-आधारित कोर्ट मैनेजरों का नियमितीकरण/आमेलन, और दूसरा, शेष रिक्त पदों पर सीधी भर्ती।
किसे लाभ मिलेगा ?
नियमावली के अनुसार निम्नलिखित लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा:-
• विद्यमान संविदा कोर्ट मैनेजर — नियम 5 के अनुसार, जो कोर्ट मैनेजर इस नियमावली के लागू होने से पहले संविदा के आधार पर कार्यरत थे, उन्हें चयन समिति द्वारा उपयुक्तता के मूल्यांकन के बाद नवसृजित पदों में आमेलित (regularise) किया जाएगा। उन्हें नियमावली के तहत अनुमन्य वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलेंगी।
• नए अभ्यर्थी — जो नियम 7 में दी गई शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और आयु सीमा की शर्तें पूरी करते हैं, वे सीधी भर्ती के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
• आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी — अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य आरक्षित श्रेणियों को राज्य सरकार की आरक्षण नीति और आयु में छूट का लाभ मिलेगा (नियम 7(iv) का परंतुक और नियम 9)।
किसे लाभ नहीं मिलेगा ?
नियमावली में स्पष्ट रूप से कुछ अपवाद और सीमाएं दी गई हैं:-
नियम 8 के अनुसार, जो व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, या जिसका एक से अधिक जीवित पति/पत्नी है, वह इस सेवा में नियुक्ति या स्थायीकरण के लिए पात्र नहीं होगा।
नियम 5(2) के अनुसार, नियमितीकरण किए गए संविदा कोर्ट मैनेजरों को प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमितीकरण की तारीख तक वेतन के अंतर से उत्पन्न होने वाले किसी भी बकाया (arrears) का भुगतान नहीं किया जाएगा।
जो अभ्यर्थी आयु सीमा (सामान्य श्रेणी के लिए 25 से 40 वर्ष के बीच) से बाहर हैं, वे सीधी भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे — जब तक कि वे किसी आरक्षित श्रेणी में आयु छूट के दायरे में न आते हों।
नियम 12(3) के अनुसार, परिवीक्षा अवधि के दौरान यदि नियुक्ति प्राधिकारी किसी अभ्यर्थी को सेवा के लिए अनुपयुक्त पाता है, तो उसे किसी भी समय सेवा से हटाया जा सकता है।
क्या बदलाव हुआ ?
अधिसूचना में पुरानी व्यवस्था का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है, इसलिए प्रत्यक्ष तुलना उपलब्ध जानकारी तक सीमित है। दस्तावेज़ से इतना स्पष्ट होता है कि इससे पहले कोर्ट मैनेजर संविदा (contractual) आधार पर कार्यरत थे। अब इस नियमावली के माध्यम से:
• कोर्ट मैनेजर के पद को एक केंद्रीयकृत, नियमित सेवा संवर्ग के रूप में औपचारिक मान्यता दी गई है।
• संविदा पर कार्यरत मौजूदा कोर्ट मैनेजरों के लिए नियमितीकरण (regularisation) की स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है।
• भविष्य की भर्तियों के लिए खुली प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से सीधी भर्ती की एक निश्चित प्रक्रिया, योग्यता और परीक्षा योजना (शेड्यूल-II) तय की गई है।
• सेवा से जुड़े सभी पहलू — वेतन, परिवीक्षा, स्थानांतरण, अनुशासन, सेवानिवृत्ति के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं, जो पहले संविदा व्यवस्था में इस रूप में लागू नहीं होते थे।
पुरानी संविदा नियुक्ति की सटीक शर्तें (जैसे तत्कालीन वेतन या अनुबंध की अवधि) दस्तावेज़ में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उनकी तुलना यहां नहीं की जा सकती।
कर्मचारियों/लाभार्थियों पर क्या असर पड़ेगा ?
इस नियमावली के लागू होने से जुड़े व्यावहारिक प्रभाव इस प्रकार हैं:-
• संविदा पर काम कर रहे कोर्ट मैनेजरों को अब नियमित सरकारी कर्मचारी जैसा दर्जा, वेतनमान और सेवांत सुविधाएं (terminal benefits) मिलने का रास्ता खुल गया है।
• उनकी सेवा की निरंतरता (continuity of service) उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से ही मानी जाएगी, हालांकि आर्थिक रूप से पिछला वेतन-अंतर (arrears) नहीं मिलेगा।
• नए अभ्यर्थियों के लिए ग्रुप-बी राजपत्रित स्तर की एक नई, संगठित सरकारी भर्ती का रास्ता खुला है, जिसकी योग्यता, परीक्षा पैटर्न और चयन प्रक्रिया पहले से स्पष्ट है।
• हाईकोर्ट और जिला अदालतों में मैनेजमेंट/प्रशासनिक दक्षता से जुड़े कार्यों के लिए एक स्थायी, प्रशिक्षित कैडर उपलब्ध होगा।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कोई कोर्ट मैनेजर नियमावली के लागू होने से पहले, 1 जनवरी 2022 से किसी जिला न्यायालय में संविदा के आधार पर कार्यरत था। नियम 5 के अनुसार:-
• चयन समिति उसकी उपयुक्तता का मूल्यांकन करेगी।
• यदि उपयुक्त पाया जाता है, तो उसे नवसृजित पद पर आमेलित कर दिया जाएगा और उसकी नियमित सेवा 1 जनवरी 2022 से ही मानी जाएगी — यानी सेवांत सुविधाओं (जैसे पेंशन-योग्यता की गणना) के लिए यह तारीख आधार बनेगी।
• लेकिन 1 जनवरी 2022 से नियमितीकरण की वास्तविक तारीख तक, उसे संविदा पर जो वेतन मिला था और नियमित पद पर जो वेतन बनता है, उसके बीच के अंतर की कोई बकाया राशि (arrears) उसे नहीं दी जाएगी — यह नियम 5(2) में स्पष्ट रूप से लिखा है।
यह उदाहरण केवल नियमावली में दी गई शर्तों को समझाने के लिए है; वास्तविक तिथियां और मामले व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करेंगे।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
• आयु सीमा: सीधी भर्ती के लिए सामान्य श्रेणी में आवेदन की अंतिम तारीख को अभ्यर्थी की आयु 25 वर्ष से अधिक और 40 वर्ष से कम होनी चाहिए (नियम 7(1)(iv))।
• शैक्षणिक योग्यता: किसी भी स्ट्रीम में स्नातक डिग्री के साथ MBA या जनरल मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा, प्रोसेस/आईटी/एचआर/वित्तीय प्रबंधन में 5 वर्ष का अनुभव, और कंप्यूटर एप्लीकेशन में कम से कम 6 महीने का डिप्लोमा अनिवार्य है (नियम 7(1))।
• परिवीक्षा अवधि: नियुक्ति के बाद 1 वर्ष की परिवीक्षा अवधि होगी, जिसे अधिकतम 1 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है — यानी कुल परिवीक्षा 2 वर्ष से अधिक नहीं होगी (नियम 12)।
• स्थानांतरण: कोर्ट मैनेजर का पद पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में स्थानांतरणीय होगा, और स्थानांतरण का अधिकार पूरी तरह हाईकोर्ट के पास सुरक्षित है (नियम 13)।
• गोपनीयता: कोर्ट मैनेजर को हर समय गोपनीयता बनाए रखनी होगी; इसका उल्लंघन अवचार (misconduct) माना जाएगा (नियम 20(3))।
• धारणाधिकार (Lien): संवर्ग में स्थायीकरण के बाद कोर्ट मैनेजर के पद पर दो वर्ष की अवधि के लिए धारणाधिकार अनुज्ञेय होगा (नियम 23)।
• सेवानिवृत्ति आयु: सामान्यतः 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने वाले माह के अंतिम दिन अपराह्न को सेवानिवृत्ति होगी (नियम 21)।
अब क्या करना होगा ?
संविदा पर कार्यरत मौजूदा कोर्ट मैनेजरों के लिए:-
1- चयन समिति द्वारा की जाने वाली उपयुक्तता जांच (suitability assessment) की प्रक्रिया का हिस्सा बनें।
2- आमेलन/नियमितीकरण से संबंधित सूचनाओं के लिए हाईकोर्ट प्रशासन या संबंधित जिला न्यायालय प्रशासन से संपर्क में रहें।
नए अभ्यर्थियों के लिए:
• नियम 7 में दी गई शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और आयु सीमा की पात्रता की जांच करें।
• हाईकोर्ट द्वारा भविष्य में जारी की जाने वाली भर्ती अधिसूचना और खुली प्रतियोगी परीक्षा की सूचना पर नजर रखें।
• शेड्यूल-II में दी गई परीक्षा योजना (पेपर-I, पेपर-II, पेपर-III और साक्षात्कार) के अनुसार तैयारी करें।
• आधिकारिक भर्ती सूचना जारी होने पर ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करें, इस नियमावली में स्वयं आवेदन की प्रक्रिया या तारीखें नहीं दी गई हैं।
चयन परीक्षा योजना (शेड्यूल-II) एक नजर में
चरण | प्रश्नपत्र | विषय | अधिकतम अंक |
|---|---|---|---|
प्रथम चरण (लिखित) | पेपर-I (2 घंटे) | प्रबंधन परिचय, संप्रेषण, संगठनात्मक व्यवहार, मात्रात्मक तकनीक, अनुसंधान पद्धति, वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन, कंप्यूटर कौशल | 100 |
प्रथम चरण (लिखित) | पेपर-II (45 मिनट) | सामान्य ज्ञान, विधिक ज्ञान, सामान्य अभिक्षमता | 50 |
प्रथम चरण (लिखित) | पेपर-III (45 मिनट) | भाषा (हिंदी एवं अंग्रेजी) | 50 |
द्वितीय चरण | साक्षात्कार एवं प्रोजेक्ट रिपोर्ट | - | 20 + 30= 50 |
समान अंक आने की स्थिति में मेधा क्रम आयु के आधार पर तय होगा, जिसमें अधिक आयु वाले अभ्यर्थी को ऊपर रखा जाएगा (नियम 6(2))।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
1. कोर्ट मैनेजर के कुल कितने पद स्वीकृत हैं?
उत्तर- अनुसूची-एक के अनुसार कुल 81 पद स्वीकृत हैं — 6 हाईकोर्ट के लिए और 75 जिला न्यायालयों के लिए।
2. कोर्ट मैनेजर पद का वेतनमान क्या है?
उत्तर- वेतनमान ₹56,100–₹1,77,500 (लेवल-10) है, और यह समूह-ख (राजपत्रित) श्रेणी का पद है।
3. सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता क्या है?
उत्तर- किसी भी स्ट्रीम में स्नातक डिग्री के साथ MBA/PG डिप्लोमा इन जनरल मैनेजमेंट, संबंधित क्षेत्र में 5 वर्ष का अनुभव, और कंप्यूटर एप्लीकेशन में कम से कम 6 महीने का डिप्लोमा आवश्यक है।
4. सीधी भर्ती के लिए आयु सीमा क्या है?
उत्तर- आवेदन की अंतिम तारीख को अभ्यर्थी की आयु 25 वर्ष से अधिक और 40 वर्ष से कम होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणियों के लिए यह सीमा संबंधित शासनादेशों के अनुसार शिथिल होगी।
5. जो कोर्ट मैनेजर पहले से संविदा पर काम कर रहे हैं, क्या उन्हें सीधे नियमित कर दिया जाएगा?
उत्तर- नहीं। नियम 5 के अनुसार उन्हें चयन समिति द्वारा उपयुक्तता का मूल्यांकन कराने के बाद ही नवसृजित पदों में आमेलित किया जाएगा।
6. क्या नियमितीकरण के बाद पुराने वेतन-अंतर (arrears) का भुगतान होगा?
उत्तर- नहीं। नियम 5(2) में स्पष्ट कहा गया है कि प्रारंभिक नियुक्ति से नियमितीकरण तक के वेतन-अंतर का कोई बकाया नहीं दिया जाएगा।
7. परिवीक्षा अवधि कितनी होगी?
उत्तर- सामान्यतः 1 वर्ष, जिसे कारण दर्ज करके अधिकतम 1 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है, यानी कुल परिवीक्षा 2 वर्ष से अधिक नहीं होगी।
8. कोर्ट मैनेजर की सेवानिवृत्ति आयु क्या है?
उत्तर- सामान्यतः 60 वर्ष, संबंधित माह के अंतिम दिन अपराह्न को। यदि राज्य सरकार अधिवर्षता आयु में बदलाव करती है, तो वह कोर्ट मैनेजरों पर भी लागू होगा।
निष्कर्ष
इलाहाबाद उच्च न्यायालय (कोर्ट मैनेजर केंद्रीयकृत सेवा) नियमावली, 2026 के माध्यम से कोर्ट मैनेजर के पद को एक व्यवस्थित, नियमित सरकारी सेवा संवर्ग का रूप दिया गया है। इससे एक ओर संविदा पर कार्यरत मौजूदा कोर्ट मैनेजरों को नियमितीकरण का स्पष्ट रास्ता मिलता है, तो दूसरी ओर भविष्य में इस पद पर आने वाले नए अभ्यर्थियों के लिए योग्यता, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और सेवा शर्तें पहले से तय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह याद रखनी चाहिए कि नियमितीकरण के बावजूद वेतन-अंतर का बकाया नहीं मिलेगा, और वास्तविक भर्ती केवल हाईकोर्ट द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक अधिसूचना के आधार पर ही होगी।
आधिकारिक स्रोत
यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, न्याय अनुभाग-1 (उच्च न्यायालय) द्वारा 31 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 4/2026/1213/सात-न्याय-1-2026-07-1099/29/2021 पर आधारित है। इस शासनादेश की प्रामाणिकता वेबसाइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।
डिस्क्लेमर/Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है और उपरोक्त सरकारी अधिसूचना पर आधारित है। किसी भी आधिकारिक निर्णय, आवेदन या दावे से पहले पाठकों को संबंधित मूल शासनादेश और आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई ताजा जानकारी अवश्य देखनी चाहिए।