UP सरकारी कर्मचारियों के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा अब पूरी तरह ऑनलाइन, जनहित स्वास्थ्य पोर्टल से जुड़ी नई व्यवस्था।
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UP सरकारी कर्मचारियों के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा अब पूरी तरह ऑनलाइन, जनहित स्वास्थ्य पोर्टल से जुड़ी नई व्यवस्था।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन ने 09 सितम्बर 2026 को शासनादेश (संख्या-220/2026/आई0/1456607/2026-5-6099/93/2026-6) जारी कर सेवारत/सेवानिवृत्त सरकारी कर्मियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब दावों की धनराशि की SGPGI/एम्स दरों से तुलना मैनुअल के बजाय जनहित स्वास्थ्य पोर्टल (janhit.dgmhup.in) द्वारा स्वतः की जाएगी, जो मानव संपदा पोर्टल से जुड़ा है। इलाज शुरू होने के 30 दिन में सूचना और समाप्ति के 90 दिन में दावा देना होगा, पूरी प्रक्रिया अधिकतम 45 कार्यदिवस में पूरी होगी, और अब मैनुअल रूप से दिया गया दावा मान्य नहीं होगा।

📅 9 सितंबर 2026 ·👁 133 views

परिचय

उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग-6 ने 09 सितम्बर 2026 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश (संख्या-220/2026/आई0/1456607/2026-5-6099/93/2026-6) जारी किया है। यह आदेश प्रदेश के सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले चिकित्सा प्रतिपूर्ति (मेडिकल रीइम्बर्समेंट) दावों की निस्तारण प्रक्रिया से जुड़ा है।

अब तक यह प्रक्रिया मुख्यतः कागजी और मैनुअल तरीके से चलती थी, जिसमें दावों की धनराशि की तुलना एस0जी0पी0जी0आई0 (SGPGI, लखनऊ) या एम्स, नई दिल्ली की दरों से चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भौतिक रूप से करते थे। इससे दावों के निस्तारण में देरी और विसंगतियां सामने आती रही हैं।

इस आदेश के जरिए अब पूरी प्रक्रिया को जनहित स्वास्थ्य पोर्टल (https://janhit.dgmhup.in/) और मानव संपदा पोर्टल से जोड़कर डिजिटल, समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जा रहा है। यह जानना हर सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे यह तय होगा कि उन्हें अपना मेडिकल क्लेम कहां, कैसे और किस समयसीमा में जमा करना है।


एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी

बिंदु

विवरण

शासनादेश का विषय

प्रदेश के सेवारत एवं सेवानिवृत्त शासकीय कर्मियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों की निस्तारण प्रक्रिया का सरलीकरण

जारीकर्ता विभाग

चिकित्सा अनुभाग-6, उत्तर प्रदेश शासन।

शासनादेश संख्या

220/2026/आई0/1456607/2026-5-6099/93/2026-6

शासनादेश का दिनांक

09 सितम्बर 2026 (लखनऊ)

लागू होने की समयसीमा

निर्देशों के अनुपालन में 15 दिन के भीतर समस्त सरकारी कर्मियों हेतु प्रक्रिया ऑनलाइन की जानी सुनिश्चित करने का निर्देश

संबंधित कर्मचारी/लाभार्थी

उत्तर प्रदेश के समस्त सेवारत एवं सेवानिवृत्त शासकीय सेवक।

मुख्य बदलाव

चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का आवेदन, स्वीकृति और भुगतान-अनुशंसा अब जनहित स्वास्थ्य पोर्टल व मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन

सम्बन्धित नियमावली

उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली, 2011 (यथा संशोधित)

(यह तालिका केवल उपलब्ध शासनादेश में दी गई जानकारी पर आधारित है।)


इस शासनादेश में क्या कहा गया है?

शासनादेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली, 2011 के तहत सेवारत/सेवानिवृत्त कर्मियों द्वारा प्रस्तुत चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों की धनराशि की तुलना अभी तक SGPGI, लखनऊ या एम्स, नई दिल्ली की मान्य दरों से चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों/तकनीकी परीक्षण अधिकारियों द्वारा भौतिक रूप (मैनुअली) से की जाती रही है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस मैनुअल प्रक्रिया के कारण कतिपय स्तरों पर विसंगतियां सामने आती हैं और दावों के निस्तारण में विलंब होता है।

इसी समस्या को दूर करने के लिए जनहित स्वास्थ्य पोर्टल को मानव संपदा पोर्टल से इंटीग्रेट किया गया है, ताकि बिल/दावा पूरी तरह ऑनलाइन प्रस्तुत किया जा सके। आदेश में दावा निस्तारण की पांच-चरणीय प्रक्रिया के साथ-साथ आवेदक, कार्यालयाध्यक्ष (रिपोर्टिंग अधिकारी) और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग—तीनों स्तर पर विस्तृत कार्यप्रणाली दी गई है।


दावा निस्तारण के पांच चरण

• संबंधित अधिकारी/कर्मचारी द्वारा जनहित स्वास्थ्य पोर्टल पर आवेदन।

• जनपद स्तरीय नोडल अधिकारी द्वारा अधिकतम 15 कार्यदिवस में फॉरवर्डिंग लेटर उपलब्ध कराना।

• पोर्टल द्वारा SGPGI/एम्स दरों से स्वतः तुलना कर देय धनराशि का निर्धारण।

• चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा देय धनराशि की संस्तुति नोडल अधिकारी को उपलब्ध कराना (बिन्दु 3 व 4 के लिए कुल अधिकतम 30 कार्यदिवस)।


निर्धारित धनराशि का सम्बन्धित विभाग द्वारा भुगतान।

आदेश के अनुसार, यदि प्रस्तुत दावे में कोई त्रुटि न हो तो दावा प्रस्तुत करने के बाद भुगतान-योग्य धनराशि की संस्तुति सम्बन्धित विभाग के जनपदीय नोडल अधिकारी तक पहुंचाने की कुल अधिकतम समयावधि 45 कार्यदिवस रखी गई है।


किसे लाभ मिलेगा?

शासनादेश के अनुसार यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश के समस्त सेवारत तथा सेवानिवृत्त शासकीय कर्मियों पर लागू होगी, जो उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली, 2011 के अंतर्गत चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे प्रस्तुत करते हैं। इसमें आश्रितों से संबंधित दावे भी शामिल हैं, जैसा कि आवेदन के साथ आश्रित हेतु परिशिष्ट-क के प्रमाण-पत्र संबंधी प्रावधान से स्पष्ट होता है।


किसे लाभ नहीं मिलेगा?

शासनादेश में इस व्यवस्था के दायरे से किसी वर्ग विशेष को स्पष्ट रूप से बाहर नहीं रखा गया है। हालांकि आदेश में एक स्पष्ट शर्त दी गई है कि किसी भी अधिकारी/कर्मचारी द्वारा भौतिक (मैनुअल) रूप से प्रस्तुत किया गया चिकित्सकीय दावा मान्य नहीं होगा। यानी जो कर्मचारी पोर्टल के माध्यम से दावा प्रस्तुत नहीं करेंगे, उनका दावा इस नई व्यवस्था के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा।


पहले क्या व्यवस्था थी और अब क्या बदला?

पहले (मैनुअल व्यवस्था)

अब (नई ऑनलाइन व्यवस्था)

SGPGI/एम्स दरों से तुलना विभागीय अधिकारियों द्वारा भौतिक रूप से

पोर्टल द्वारा स्वतः (ऑटोमेटेड) तुलना और धनराशि निर्धारण।

दावों के निस्तारण में विलंब व विसंगतियां

डिजिटल, समयबद्ध (कुल अधिकतम 45 कार्यदिवस) व मानकीकृत प्रक्रिया।

कागजी पत्राचार (फॉरवर्डिंग लेटर आदि)

जनहित स्वास्थ्य पोर्टल व मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से पेपरलेस उपलब्धता

मैनुअल दावा भी स्वीकार्य

मैनुअल/भौतिक रूप से प्रस्तुत दावा मान्य नहीं

(यह तुलना केवल शासनादेश में उल्लिखित तथ्यों पर आधारित है। पुरानी प्रक्रिया के अन्य विवरण अलग से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।)


कर्मचारियों/लाभार्थियों पर क्या असर पड़ेगा?

• अब कर्मचारियों को अपना चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा जनहित स्वास्थ्य पोर्टल पर सिटीजन लॉगिन बनाकर ऑनलाइन ही प्रस्तुत करना होगा।

• जिन कर्मचारियों का EHRMS कोड सक्रिय है, उनके व्यक्तिगत व सेवा-संबंधी विवरण मानव संपदा पोर्टल से स्वतः (API लिंकेज के जरिए) जनहित पोर्टल पर आ जाएंगे, जिससे फॉर्म भरना आसान होगा।

• दावे की राशि के अनुसार यह तय होगा कि आवेदन किसे अग्रसारित होगा — पचास हजार रुपये से कम राशि के दावे जनपद स्तरीय/विशिष्ट चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक या मुख्य चिकित्साधिकारी को, और पचास हजार रुपये या उससे अधिक राशि के दावे सीधे मुख्य चिकित्साधिकारी/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को अग्रसारित होंगे।

• दावे की धनराशि को दस निर्धारित मदों (जैसे कमरे का शुल्क, सर्जरी शुल्क, दवा शुल्क, इम्प्लांट शुल्क आदि) में विभाजित कर अपलोड करना होगा।

• कार्यालयाध्यक्ष (रिपोर्टिंग अधिकारी) को फॉरवर्डिंग लेटर अधिकतम 15 दिन में अपलोड करना अनिवार्य होगा, चाहे वे दावे से सहमत हों या असहमत — असहमति की स्थिति में कारण स्पष्ट रूप से बताना होगा।

• चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को संतोषजनक फॉरवर्डिंग लेटर मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर दावे का निस्तारण करना होगा।


उदाहरण से समझिए

शासनादेश में दी गई प्रक्रिया के अनुसार, मान लीजिए किसी सेवारत कर्मचारी का इलाज समाप्त होने के बाद उसे 45,000 रुपये का चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा प्रस्तुत करना है।

• चूंकि यह राशि 50,000 रुपये से कम है, आदेश के बिन्दु 1.5 के अनुसार यह दावा उसके तैनाती जनपद के जनपद स्तरीय/विशिष्ट चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अथवा मुख्य चिकित्साधिकारी को अग्रसारित किया जाएगा।

• कर्मचारी को इलाज प्रारम्भ होने के 30 दिन के भीतर अपने विभाग को सूचना देनी होगी और इलाज समाप्त होने के 90 दिन के भीतर जनहित स्वास्थ्य पोर्टल पर दावा ऑनलाइन प्रस्तुत करना होगा।

• कार्यालयाध्यक्ष अधिकतम 15 कार्यदिवस में फॉरवर्डिंग लेटर पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

• इसके बाद पोर्टल स्वतः दावे की तुलना SGPGI/एम्स दरों से करेगा और चिकित्सा विभाग बिन्दु 3 व 4 के अनुसार अधिकतम 30 कार्यदिवस में देय धनराशि की संस्तुति नोडल अधिकारी को देगा।

• यदि सब कुछ त्रुटिरहित रहा, तो दावा प्रस्तुत करने से लेकर भुगतान-योग्य राशि की संस्तुति तक कुल अधिकतम समय 45 कार्यदिवस होगा।

(ध्यान दें: यह केवल आदेश में दी गई समयसीमा और प्रक्रिया को समझाने के लिए एक उदाहरण है। वास्तविक स्वीकृत/देय राशि SGPGI या एम्स की दरों और दावे की वास्तविक मदवार जानकारी पर निर्भर करेगी, जिसकी जानकारी शासनादेश में नहीं दी गई है।)


महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां

• समयसीमा का पालन जरूरी: इलाज प्रारम्भ होने के 30 दिन के भीतर सूचना और इलाज समाप्त होने के 90 दिन के भीतर दावा प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इसके बाद प्रस्तुत आवेदन को पोर्टल द्वारा विलंबित के रूप में चिन्हित किया जाएगा और विलंब के कारण का औचित्य बताना होगा।

• मैनुअल दावा मान्य नहीं: भौतिक रूप से प्रस्तुत किया गया कोई भी चिकित्सकीय दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

• EHRMS कोड का महत्व: यदि EHRMS कोड उपलब्ध नहीं है या कार्यशील नहीं है, तो आवेदक को पोर्टल पर सभी प्रविष्टियां स्वयं भरनी होंगी।

• मदवार सही वर्गीकरण: दावे की राशि को सही मद (जैसे रूम चार्ज, सर्जरी चार्ज, दवा चार्ज आदि) में ही अंकित करना चाहिए; गलत मद में अंकन होने पर सुधार की सुविधा पोर्टल पर उपलब्ध है, परन्तु सही जानकारी देना आवेदक की जिम्मेदारी है।

• आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता: आश्रित प्रमाण-पत्र, चिकित्सा अग्रिम स्वीकृति आदेश, OPD/IPD बाउचर्स, चिकित्सक द्वारा सत्यापित प्रपत्र, प्रेस्क्रिप्शन/डिस्चार्ज समरी आदि दस्तावेज दावे के साथ अपलोड करना अनिवार्य है।


अब क्या करना होगा?

सेवारत/सेवानिवृत्त कर्मचारी के लिए:-

• जनहित स्वास्थ्य पोर्टल https://janhit.dgmhup.in पर सिटीजन लॉगिन बनाएं।

• लॉगिन कर सिटीजन डैशबोर्ड पर "Payment of Medical Reimbursement" विकल्प चुनें।

• संभव हो तो अपना EHRMS कोड दर्ज करें ताकि व्यक्तिगत/सेवा संबंधी विवरण स्वतः भर जाएं; अन्यथा सभी जानकारी स्वयं भरें।

• दावे की राशि को दस निर्धारित मदों में विभाजित कर अपलोड करें और आवश्यक प्रमाण-पत्र/बिल संलग्न करें।

• इलाज प्रारम्भ होने के 30 दिन में सूचना और इलाज समाप्ति के 90 दिन में दावा अवश्य प्रस्तुत करें।


कार्यालयाध्यक्ष (रिपोर्टिंग अधिकारी) के लिए:

• मानव संपदा पोर्टल पर अपने EHRMS कोड से लॉगिन कर अधीनस्थ कर्मियों के प्राप्त आवेदन देखें।

• आवेदन की जांच कर अधिकतम 15 दिन के भीतर हस्ताक्षरित फॉरवर्डिंग लेटर पोर्टल पर अपलोड करें, चाहे सहमति हो या असहमति (असहमति पर कारण स्पष्ट लिखें)।


विभागों के लिए:

• समस्त कर्मियों के सेवा अभिलेख मानव संपदा पोर्टल पर अद्यतन/त्रुटिरहित रखें।

• आश्रितों की सूची समय-समय पर अद्यतन करें।

• समस्त कर्मियों को सही EHRMS कोड उपलब्ध कराएं।


महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)

1. चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा अब कहां प्रस्तुत करना होगा?

उत्तर- शासनादेश के अनुसार अब दावा जनहित स्वास्थ्य पोर्टल (https://janhit.dgmhup.in/) पर सिटीजन लॉगिन के माध्यम से ऑनलाइन ही प्रस्तुत करना होगा।

2. क्या अब भी मैनुअल/कागजी दावा स्वीकार किया जाएगा?

उत्तर- नहीं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी अधिकारी/कर्मचारी द्वारा भौतिक रूप से प्रस्तुत किया गया चिकित्सकीय दावा मान्य नहीं होगा।

3. दावा प्रस्तुत करने की समयसीमा क्या है?

उत्तर- इलाज प्रारम्भ होने के 30 दिन के भीतर विभाग को सूचना देनी होगी और इलाज समाप्त होने के 90 दिन के भीतर पोर्टल पर दावा प्रस्तुत करना होगा।

4. दावे की राशि किन दरों से तय होगी?

उत्तर- पोर्टल पर अपलोड की गई SGPGI (लखनऊ) या एम्स, नई दिल्ली की मान्य दरों से दावे की धनराशि की स्वतः तुलना कर देय राशि तय होगी।

5. दावे के निस्तारण में कुल कितना समय लगेगा?

उत्तर- यदि दावे में कोई त्रुटि न हो, तो दावा प्रस्तुत करने से लेकर भुगतान-योग्य राशि की संस्तुति सम्बन्धित विभाग के जनपदीय नोडल अधिकारी तक पहुंचने तक की कुल अधिकतम समयावधि 45 कार्यदिवस है।

6. यदि EHRMS कोड सक्रिय नहीं है तो क्या करें?

उत्तर- ऐसी स्थिति में आवेदक को जनहित स्वास्थ्य पोर्टल पर सभी आवश्यक प्रविष्टियां स्वयं भरनी होंगी।

7. दावे की राशि के आधार पर आवेदन किसे भेजा जाएगा?

उत्तर- 50,000 रुपये से कम राशि के दावे तैनाती जनपद के जनपद स्तरीय/विशिष्ट चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक/मुख्य चिकित्साधिकारी को, और 50,000 रुपये व उससे अधिक राशि के दावे मुख्य चिकित्साधिकारी/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को अग्रसारित होंगे।

8. यह नई व्यवस्था कब से लागू होगी?

उत्तर- आदेश में समस्त प्रशासकीय विभागों को निर्देशित किया गया है कि निर्देशों के समयबद्ध अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए 15 दिन के भीतर प्रदेश के समस्त सरकारी कर्मियों हेतु चिकित्सा प्रतिपूर्ति की समस्त प्रक्रिया ऑनलाइन की जाए। सटीक प्रभावी तिथि आदेश में अलग से उल्लिखित नहीं है।


निष्कर्ष

09 सितम्बर 2026 के इस शासनादेश के जरिए उत्तर प्रदेश के सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों की प्रक्रिया को जनहित स्वास्थ्य पोर्टल व मानव संपदा पोर्टल से जोड़कर पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब मैनुअल रूप से प्रस्तुत किया गया दावा मान्य नहीं होगा, और दावे को इलाज समाप्ति के 90 दिन के भीतर पोर्टल पर ही प्रस्तुत करना होगा। पूरी प्रक्रिया की एक समयबद्ध सीमा (अधिकतम 45 कार्यदिवस) तय की गई है, जिससे कर्मचारियों को अपने दावे की स्थिति का बेहतर अंदाजा रह सकेगा।


आधिकारिक स्रोत

यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, चिकित्सा अनुभाग-6 द्वारा 09 सितम्बर 2026 को जारी शासनादेश संख्या 220/2026/आई0/1456607/2026-5-6099/93/2026-6 पर आधारित है, जिस पर अपर मुख्य सचिव श्री अमित कुमार घोष एवं विशेष सचिव श्री रवि रंजन के हस्ताक्षर/आज्ञा दर्ज हैं। इस शासनादेश की प्रामाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.nic.in पर सत्यापित की जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए जनहित स्वास्थ्य पोर्टल https://janhit.dgmhup.in पर भी जाया जा सकता है।

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