वित्तीय वर्ष 2027-2028 से राज्य के बजट (आय-व्ययक) में व्यय की "मानक मदों" की नई व्यवस्था।
उत्तर प्रदेश शासन के वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1 ने 01 सितम्बर, 2026 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2027-2028 से राज्य के बजट (आय-व्ययक) में व्यय की "मानक मदों" (Object Heads) की एक नई व्यवस्था लागू की जाएगी। यह आदेश अपर मुख्य सचिव, वित्त एवं वित्त आयुक्त, श्री दीपक कुमार द्वारा जारी किया गया है और यह प्रदेश के समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव तथा सभी विभागाध्यक्षों एवं प्रमुख कार्यालयाध्यक्षों को भेजा गया है।
यह आदेश आम नागरिकों के लिए सीधा कोई नकद लाभ या योजना नहीं है, बल्कि यह सरकारी बजट-लेखांकन की प्रक्रिया से जुड़ा एक प्रशासनिक बदलाव है। फिर भी यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे प्रदेश के सभी विभागों में बजट तैयार करने और व्यय दर्ज करने का तरीका बदल जाएगा, जिसका सीधा असर वित्त, लेखा, कोषागार और बजट-निर्माण से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों पर पड़ेगा।
नीचे इस आदेश को सरल भाषा में समझाया गया है — यह क्यों जारी हुआ, किसके लिए है, क्या बदलाव होगा और आगे क्या करना होगा।
एक नजर में महत्वपूर्ण जानकारी
बिंदु | विवरण |
|---|---|
शासनादेश का विषय | वित्तीय वर्ष 2027-2028 से मानक मदों (Object Heads) की नई व्यवस्था लागू किये जाने के सम्बन्ध में। |
विभाग | वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन |
शासनादेश संख्या | 20/2026/बी-1-1610/दस-2026-15/2003 |
शासनादेश दिनांक | 01 सितम्बर 2026 |
लागू होने की तारीख | वित्तीय वर्ष 2027-2028 से |
जारीकर्ता अधिकारी | दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव, वित्त एवं वित्त आयुक्त |
संबंधित पक्ष | सभी अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, समस्त विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख कार्यालयाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश। |
मुख्य बदलाव | राज्य के प्रचलित मानक मदों की जगह CAG द्वारा निर्धारित नई, केंद्र-राज्य समान मानक मद व्यवस्था लागू होगी। |
इस शासनादेश में क्या कहा गया है?
आदेश के अनुसार, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने वित्तीय वर्ष 2027-2028 से केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों में व्यय की मानक मदों की एक समान व्यवस्था लागू करने के लिए 11 नवम्बर, 2025 को एक कार्यालय-ज्ञाप जारी किया था। इसी क्रम में महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), प्रयागराज ने 08 दिसम्बर, 2025 के अर्द्धशासकीय पत्र के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार से अपेक्षा की कि प्रदेश में भी वित्तीय वर्ष 2027-2028 से यह नई व्यवस्था लागू की जाए।
इस अपेक्षा के अनुपालन में राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि वित्तीय वर्ष 2027-2028 से व्यय की मानक मदों की नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही, वर्तमान में प्रचलित मानक मदों और नई मानक मदों की "मैपिंग" (यानी कौन-सी पुरानी मद किस नई मद में समाहित होगी) तथा महालेखाकार की टिप्पणियों सहित एक विस्तृत सूची (हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में) पत्र के साथ संलग्न की गई है। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2027-2028 के आय-व्ययक (बजट) में इन्हीं नई मानक मदों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
नई व्यवस्था की संरचना
संलग्न सूची के अनुसार नई मानक मदों को आठ मुख्य श्रेणियों (Object Classes) में बाँटा गया है:-
• श्रेणी-I: कर्मचारियों को प्रतिकर — वेतन, मजदूरी, महंगाई भत्ता, पुरस्कार, चिकित्सा उपचार
• श्रेणी-II: कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा — पेंशन प्रभार
• श्रेणी-III: वस्तु और सेवाएं — भत्ते, अवकाश यात्रा रियायत, प्रशिक्षण व्यय, आउटसोर्सिंग/संविदात्मक सेवाएं, घरेलू व विदेश यात्रा व्यय, कार्यालय व्यय, किराया, मुद्रण-प्रकाशन, ईंधन-स्नेहक, विज्ञापन-प्रचार, लघु सिविल कार्य, व्यावसायिक सेवाएं, मरम्मत-रखरखाव, बैंक प्रभार, अवार्ड-पुरस्कार आदि
• श्रेणी-IV: सहायता — सहायता अनुदान, अंशदान, सब्सिडी, छात्रवृत्ति, पूंजीगत परिसंपत्तियों हेतु अनुदान
• श्रेणी-V: विविध राजस्व व्यय — सामाजिक सुरक्षा व्यय, गुप्त सेवा व्यय, विनिमय हानि, ब्याज भुगतान, अन्य राजस्व व्यय
• श्रेणी-VI: गैर-वित्तीय परिसंपत्तियां — मोटर वाहन, मशीनें-उपकरण, ICT उपकरण, भवन-संरचनाएं, अवसंरचनात्मक परिसंपत्तियां, फर्नीचर, भूमि आदि
• श्रेणी-VII: वित्तीय परिसंपत्तियां — निवेश, ऋण एवं अग्रिम, उधार की अदायगी आदि
• श्रेणी-VIII: लेखा समायोजन — उचंत, अवक्षयण, आरक्षितियां, अंतर्लेख अंतरण आदि
किसे इस आदेश का पालन करना है ?
यह आदेश सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश शासन के निम्नलिखित पक्षों पर लागू होता है:-
• प्रदेश के समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव
• समस्त विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख कार्यालयाध्यक्ष
• वित्त नियंत्रक, मुख्य/वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी
• वित्त विभाग के व्यय-नियंत्रण अनुभाग तथा सचिवालय के समस्त अनुभाग
• महालेखाकार कार्यालय, कोषागार निदेशालय, वित्तीय सांख्यिकी निदेशालय जैसे संबंधित लेखा प्रतिष्ठान
अर्थात् यह आदेश प्रदेश के हर उस अधिकारी के लिए है, जो वित्तीय वर्ष 2027-2028 के लिए बजट (आय-व्ययक) तैयार करने या व्यय का लेखा रखने के काम से जुड़ा है।
किसे इस आदेश से कोई सीधा लाभ नहीं मिलेगा ?
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह शासनादेश किसी कर्मचारी, पेंशनर या आम नागरिक को कोई नई नकद राशि, वेतन-वृद्धि या योजना का लाभ नहीं देता। इसका सीधा संबंध केवल बजट में व्यय के वर्गीकरण (accounting classification) से है। उपलब्ध आदेश में वेतन, भत्ते, पेंशन या किसी अन्य राशि में वृद्धि अथवा कटौती का कोई उल्लेख नहीं है।
पहले क्या व्यवस्था थी और अब क्या बदलेगा?
अभी तक उत्तर प्रदेश में व्यय की मानक मदें राज्य के अपने प्रचलित क्रमांक और नामों के अनुसार दर्ज होती थीं (जैसे 01-वेतन, 02-मजदूरी, 42-अन्य व्यय आदि)। CAG के निर्देश पर अब केंद्र सरकार और सभी राज्यों में एक जैसी, समान क्रमांकित मानक मदें अपनाई जाएंगी, ताकि पूरे देश में सरकारी व्यय की तुलना और निगरानी आसान हो सके।
संलग्न सूची में हर पुरानी मद के सामने यह स्पष्ट किया गया है कि वह किस नई मद में "पूर्ण रूप से" (Full) या "आंशिक रूप से" (Partial) समाहित होगी, साथ ही महालेखाकार की टिप्पणी भी दी गई है कि किन परिस्थितियों में कौन-सी नई मद प्रयोग की जाए।
उदाहरण से समझिए
उपलब्ध सूची के अनुसार कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:-
1- वेतन: वर्तमान मद "01-वेतन" अब नई मद "01-Salaries" के अंतर्गत आएगी, परंतु "07-मानदेय" को अलग से पूर्ण रूप से इसी नई मद में शामिल किया जाएगा। साथ ही महालेखाकार की टिप्पणी है कि बोनस से संबंधित प्रावधान अब "05-पुरस्कार" शीर्ष में दर्ज होगा, न कि वेतन मद में।
2- महंगाई भत्ता: वर्तमान मद "03-महंगाई भत्ता" और "50-महंगाई वेतन" दोनों मिलकर नई मद "03-Dearness Allowance (DA)" में समाहित होंगी।
3- कार्यालय व्यय: वर्तमान की कई अलग-अलग मदें — "08-कार्यालय व्यय", "09-विद्युत देय", "10-जलकर", "12-कार्यालय फर्नीचर एवं उपकरण", "13-टेलीफोन पर व्यय", "22-आतिथ्य व्यय" — अब एक साथ नई मद "13-Office Expenses" में समाहित होंगी, बशर्ते वे आंशिक (Partial) या पूर्ण (Full) रूप से इस मद से मेल खाती हों।
4- ईंधन-स्नेहक: पुरानी मद "15-गाड़ियों का अनुरक्षण और पेट्रोल आदि की खरीद" का पेट्रोल-डीजल संबंधी अंश अब नई मद "24-Fuels and Lubricants" में जाएगा, जबकि गाड़ियों के अनुरक्षण से जुड़ा व्यय मद "29-अनुरक्षण" (Repair and Maintenance) में दर्ज होगा।
इससे स्पष्ट है कि कई पुरानी मदें अब विभाजित होकर अलग-अलग नई मदों में बंटेंगी, इसलिए बजट बनाने वाले अधिकारियों को हर मद के लिए दी गई "Full/Partial" टिप्पणी को ध्यान से देखना होगा।
विभागों और अधिकारियों पर क्या असर पड़ेगा ?
• बजट-निर्माण की प्रक्रिया में अधिकारियों को पुरानी आदत से हटकर नई मानक मदों के अनुसार व्यय का वर्गीकरण सीखना और अपनाना होगा।
• जिन पुरानी मदों को कई नई मदों में विभाजित किया गया है (जैसे "42-अन्य व्यय" जो "05-पुरस्कार" और "49-अन्य राजस्व व्यय" दोनों में बंटी है), वहां लेखा तैयार करते समय अतिरिक्त सावधानी आवश्यक होगी।
• चूंकि यह व्यवस्था केंद्र सरकार तथा अन्य राज्यों के साथ समान होगी, इससे प्रदेश के व्यय आंकड़ों की राष्ट्रीय स्तर पर तुलना और निगरानी अधिक पारदर्शी हो सकेगी।
• वित्तीय वर्ष 2027-2028 का आय-व्ययक (बजट) तैयार करते समय यह नई प्रणाली अनिवार्य रूप से अपनानी होगी।
महत्वपूर्ण शर्तें और सावधानियां
उपलब्ध आदेश और संलग्न सूची के अनुसार कुछ बिंदु विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं:-
• कई मदों की मैपिंग "आंशिक" (Partial) है, यानी पुरानी मद का पूरा व्यय नई मद में नहीं, बल्कि केवल उसका एक हिस्सा ही उस नई मद में जाएगा — शेष हिस्सा किसी अन्य नई मद में दर्ज होगा। इसलिए हर मद के लिए महालेखाकार की टिप्पणी अवश्य देखनी होगी।
• कुछ मदों के लिए स्पष्ट निर्देश है कि "संदर्भित विवरण के अनुसार प्रयोग करें" — अर्थात संलग्न सूची में दिए गए विस्तृत विवरण (अंग्रेजी/हिंदी परिभाषा) के आधार पर ही सही वर्गीकरण तय करना होगा।
• कार्यालय उपकरण, फर्नीचर, कंप्यूटर हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर जैसी मदों के लिए एक लाख रुपये या तीन वर्ष की उपयोगी अवधि (जो भी हो) की सीमा का उल्लेख किया गया है, जिसके आधार पर तय होगा कि व्यय राजस्व व्यय होगा या पूंजीगत व्यय।
• यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है, इसलिए इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है। इसकी प्रामाणिकता वेबसाइट https://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।
अब क्या करना होगा?
उपलब्ध आदेश के अनुसार संबंधित विभागों और अधिकारियों को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:-
1- वित्त विभाग द्वारा पत्र के साथ संलग्न की गई पुरानी-नई मानक मदों की मैपिंग सूची (हिंदी एवं अंग्रेजी) का अध्ययन करें।
2- वित्तीय वर्ष 2027-2028 के आय-व्ययक (बजट) की तैयारी के दौरान इन्हीं नई मानक मदों का उपयोग सुनिश्चित करें।
3- जहां किसी पुरानी मद की मैपिंग "आंशिक" (Partial) बताई गई है, वहां महालेखाकार की टिप्पणी के अनुसार सही नई मद का चयन करें।
4- जिन मदों के लिए "संदर्भित विवरण के अनुसार प्रयोग करें" लिखा है, वहां संलग्न सूची के विस्तृत (अंग्रेजी) विवरण के आधार पर वर्गीकरण करें।
5- किसी भ्रम की स्थिति में संबंधित वित्त नियंत्रक/लेखाधिकारी या वित्त विभाग से मार्गदर्शन लें।
महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
1. यह नई मानक मद व्यवस्था कब से लागू होगी?
उत्तर- उपलब्ध आदेश के अनुसार यह व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-2028 से लागू की जाएगी।
2. यह आदेश किसने और कब जारी किया?
उत्तर- यह आदेश दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव, वित्त एवं वित्त आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन ने 01 सितम्बर, 2026 को जारी किया है।
3. यह बदलाव क्यों किया जा रहा है?
उत्तर- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा केंद्र सरकार और सभी राज्यों में व्यय की मानक मदों की एक समान व्यवस्था लागू करने के निर्देश (कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 11 नवम्बर, 2025) के अनुपालन में यह बदलाव किया जा रहा है।
4. क्या इस आदेश से कर्मचारियों के वेतन, भत्ते या पेंशन में कोई बदलाव होगा?
उत्तर- उपलब्ध आदेश में वेतन, भत्ते या पेंशन की राशि में किसी बदलाव का उल्लेख नहीं है। यह आदेश केवल बजट में व्यय के वर्गीकरण (लेखा प्रणाली) से संबंधित है।
5. नई मानक मदों की पूरी सूची कहां देखी जा सकती है?
उत्तर- आदेश के अनुसार नई मानक मदों की पूरी सूची (पुरानी-नई मैपिंग एवं महालेखाकार की टिप्पणी सहित, हिंदी एवं अंग्रेजी में) इस पत्र के साथ संलग्नक के रूप में जारी की गई है।
6. क्या यह आदेश सभी सरकारी विभागों पर लागू होगा?
उत्तर- हां, यह आदेश उत्तर प्रदेश शासन के समस्त अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव तथा समस्त विभागाध्यक्षों एवं प्रमुख कार्यालयाध्यक्षों को संबोधित है।
7. क्या पुरानी मानक मदों का उपयोग जारी रखा जा सकता है?
उत्तर- आदेश में स्पष्ट निर्देश है कि वित्तीय वर्ष 2027-2028 के आय-व्ययक में नई मानक मदों का उपयोग सुनिश्चित किया जाय, इसलिए पुरानी व्यवस्था की जगह नई व्यवस्था अपनानी होगी।
8. इस आदेश की प्रामाणिकता कैसे सत्यापित करें?
उत्तर- आदेश के अनुसार इसकी प्रामाणिकता वेबसाइट https://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है। यह आदेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है, इसलिए इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, उत्तर प्रदेश शासन ने CAG के निर्देश पर वित्तीय वर्ष 2027-2028 से राज्य के बजट में व्यय की मानक मदों (Object Heads) की नई, केंद्र-राज्य समान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यह आदेश किसी नागरिक या कर्मचारी को सीधा नकद लाभ देने वाला नहीं है, बल्कि प्रदेश के बजट-निर्माण और व्यय-लेखांकन की प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान बनाने की दिशा में एक प्रशासनिक कदम है। संबंधित सभी विभागों, वित्त अधिकारियों और लेखाधिकारियों को सबसे पहले संलग्न मैपिंग सूची का बारीकी से अध्ययन कर, अगले वित्तीय वर्ष का बजट इन्हीं नई मदों के आधार पर तैयार करना होगा।
आधिकारिक स्रोत
यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन, वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1 द्वारा जारी शासनादेश संख्या 20/2026/बी-1-1610/दस-2026-15/2003, दिनांक 01 सितम्बर, 2026 (विषय: वित्तीय वर्ष 2027-2028 से मानक मदों की नई व्यवस्था लागू किये जाने के सम्बन्ध में) पर आधारित है। इस शासनादेश की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट https://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है। पूर्ण एवं सटीक जानकारी के लिए मूल शासनादेश तथा उसके साथ संलग्न नई मानक मदों की सूची अवश्य देखें।