शासनादेश की मूल जानकारी
विवरण | जानकारी |
|---|---|
जारीकर्ता विभाग | कृषि विभाग |
जारीकर्ता अनुभाग | कृषि अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन |
शासनादेश संख्या | 47/2026/424/2026/1828514/12-2099/125/2024 |
शासनादेश का दिनांक | 11 अगस्त 2026 |
विषय | उ.प्र. बीज विकास निगम के नियमित कार्मिकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ प्रदान किए जाने के सम्बन्ध में। |
स्थान | लखनऊ |
प्रेषक | रवीन्द्र, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
प्राप्तकर्ता | प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम, लखनऊ |
लाभ की प्रभावी तिथि | 01 अप्रैल 2026 |
यह शासनादेश निगम द्वारा भेजे गए पत्र (संख्या यूपीसीड/4511/प्र0नि0का0/2026, दिनांक 30 मार्च 2026) के संदर्भ में जारी किया गया है, जिसमें निगम ने अपने नियमित कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने के लिए आवश्यक कार्यवाही का अनुरोध किया था।
शासनादेश में क्या निर्णय लिया गया है?
राज्यपाल की स्वीकृति से यह तय किया गया है कि उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के नियमित कार्मिकों को सातवें वेतनमान का लाभ 1 अप्रैल 2026 से दिया जाएगा।
हालांकि यह मंजूरी बिना शर्त नहीं है, शासनादेश में साफ लिखा है कि यह लाभ कुछ निर्धारित शर्तों के अधीन ही मिलेगा। यानी सिर्फ आदेश जारी हो जाने से कर्मचारियों को स्वतः पैसा नहीं मिलने लगेगा, बल्कि निगम को पहले इन शर्तों को पूरा करना होगा।
किन कर्मचारियों को यह लाभ मिलेगा?
इस शासनादेश का दायरा साफ है, इसका लाभ केवल उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के नियमित कार्मिकों तक सीमित है। संविदा, आउटसोर्स या अन्य किसी श्रेणी के कर्मचारियों का इसमें कोई उल्लेख नहीं है। इस शासनादेश का लाभ उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के नियमित कार्मिकों के लिए है। आदेश में 7वें वेतनमान का लाभ दिए जाने की स्वीकृति इन्हीं नियमित कार्मिकों के संबंध में प्रदान की गई है।
लाभ मिलने से पहले पूरी करनी होंगी ये पांच शर्तें
शासनादेश में सातवें वेतनमान का लाभ देने से पहले निगम को जिन शर्तों का पालन करना होगा, वे इस प्रकार हैं:-
1. पिछले तीन वर्षों के लेखों का ऑडिट जरूरी
वित्तीय वर्ष 2026-27 से तीन वर्ष पूर्व तक के निगम के लेखे महालेखाकार से ऑडिट हो चुके होने चाहिए, और निगम की वार्षिक आम बैठक (AGM) में उन्हें स्वीकार किया जा चुका होना चाहिए।
2. निगम की वित्तीय क्षमता की पुष्टि
वेतनमान का लाभ देने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि निगम, वेतन पुनरीक्षण से बढ़ने वाले खर्च को वहन करने की स्थिति में है। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि इस अतिरिक्त खर्च को निगम को अपने ही स्रोतों से वहन करना होगा — राज्य सरकार की तरफ से इसके लिए कोई अलग शासकीय अनुदान नहीं दिया जाएगा।
3. 2017 के शासनादेश की शर्तों का पालन
सातवें वेतनमान का पुनरीक्षण सार्वजनिक उद्यम अनुभाग-1 के 3 जनवरी 2017 के शासनादेश (संख्या 1/2017/1415/44-1-2016-53/2016) में तय शर्तों और प्रतिबंधों को पूरा करने के बाद ही लागू किया जाएगा।
4. एरियर को लेकर स्पष्ट स्थिति
1 अप्रैल 2026 से पहले की अवधि के लिए किसी तरह के एरियर की मांग नहीं की जाएगी। एरियर से जुड़ा कोई भी फैसला अलग से, एक सुविचारित प्रस्ताव के जरिए किया जाएगा।
5. महंगाई भत्ते का निर्धारण पुराने नियम के अनुसार
महंगाई भत्ते का निर्धारण सार्वजनिक उद्यम अनुभाग-1 के 11 सितंबर 2009 के शासनादेश (संख्या 1090/44-1-2009-2 उवेरी/98) में तय व्यवस्था के मुताबिक ही किया जाएगा।
यह आदेश किस आधार पर जारी हुआ?
शासनादेश में यह भी बताया गया है कि यह आदेश वित्त विभाग की अशासकीय सहमति (संख्या E-1-104-X-2026-27, दिनांक 29 जुलाई 2026) मिलने के बाद जारी किया गया है। इससे स्पष्ट है कि इस फैसले से पहले वित्त विभाग की भी सहमति ली जा चुकी है।
कर्मचारियों के लिए इसका व्यावहारिक मतलब क्या है?
निगम के नियमित कर्मचारियों के लिए यह खबर उम्मीद जगाने वाली जरूर है, लेकिन इसे तुरंत मिलने वाला लाभ समझना जल्दबाजी होगी। सातवां वेतनमान लागू होने की तारीख भले ही 1 अप्रैल 2026 तय कर दी गई हो, पर असल भुगतान तभी शुरू होगा जब निगम अपने ऑडिट पूरे करा ले, अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर आश्वस्त हो जाए, और 2017 के शासनादेश की शर्तों का पालन सुनिश्चित कर दे। साथ ही, पुरानी अवधि के एरियर के लिए फिलहाल इंतजार करना होगा, क्योंकि उस पर फैसला बाद में अलग से आएगा।
शासनादेश की मुख्य बातें एक नजर में
विभाग | कृषि अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन |
|---|---|
शासनादेश की तारीख | 11 अगस्त 2026 |
संबंधित संस्था | उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम |
लाभार्थी | निगम के नियमित कार्मिक |
लाभ | सातवां वेतनमान |
प्रभावी तिथि | 01 अप्रैल 2026 |
अतिरिक्त व्ययभार | निगम स्वयं अपने स्रोतों से वहन करेगा। |
राज्य सरकार का अनुदान | इस मद में देय नहीं |
1 अप्रैल 2026 से पहले का एरियर | मांग नहीं की जाएगी, अलग प्रस्ताव आएगा। |
महंगाई भत्ता | 11 सितंबर 2009 के शासनादेश के अनुसार तय होगा। |
हस्ताक्षरकर्ता | रवीन्द्र, प्रमुख सचिव |
शासनादेश की प्रमाणिकता कहां जांचें | आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है, इसलिए इस पर अलग से हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है। इसकी प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट https://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है। |
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश शासन का यह शासनादेश बीज विकास निगम के नियमित कर्मचारियों के लिए सातवें वेतनमान की राह जरूर खोलता है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ निगम द्वारा तय शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करेगा। जब तक ऑडिट, वित्तीय स्थिति और पूर्व शासनादेशों की शर्तों का पालन सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक यह लाभ व्यावहारिक रूप से लागू नहीं माना जा सकता। कर्मचारियों को सलाह है कि वे निगम प्रशासन की ओर से आगे जारी होने वाले कार्यान्वयन आदेश पर भी नजर बनाए रखें, क्योंकि एरियर से जुड़ा फैसला अभी शेष है।
महत्वपूर्ण
वेतनमान, एरियर या अन्य वित्तीय लाभ से जुड़े अंतिम और सटीक विवरण के लिए संबंधित शासनादेश तथा निगम द्वारा आगे जारी होने वाले कार्यान्वयन आदेश को ही आधार मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1 : उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान कब से मिलेगा?
उत्तर: शासनादेश के अनुसार यह लाभ 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
प्रश्न 2 : क्या यह लाभ सभी कर्मचारियों को मिलेगा?
उत्तर: नहीं, यह लाभ केवल निगम के नियमित कार्मिकों के लिए है।
प्रश्न 3: क्या 1 अप्रैल 2026 से पहले का एरियर मिलेगा?
उत्तर: नहीं, शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि 1 अप्रैल 2026 से पहले की अवधि के लिए एरियर की मांग नहीं की जाएगी। इस पर अलग से प्रस्ताव लाया जाएगा।
प्रश्न 4: सातवें वेतनमान का अतिरिक्त खर्च कौन वहन करेगा?
उत्तर: वेतन पुनरीक्षण से बढ़ने वाला अतिरिक्त व्ययभार निगम को अपने स्वयं के स्रोतों से वहन करना होगा; राज्य सरकार की ओर से इसके लिए कोई अनुदान नहीं दिया जाएगा।
प्रश्न 5: क्या इस लाभ के लिए कोई शर्तें भी रखी गई हैं?
उत्तर: हां, निगम को पिछले वर्षों के ऑडिट पूरे कराने, अपनी वित्तीय क्षमता सुनिश्चित करने और 2017 के संबंधित शासनादेश की शर्तों का पालन करने के बाद ही यह लाभ अनुमन्य होगा।
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