उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण विभाग ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना से जुड़े आवेदकों के लिए एक राहत भरा फैसला लिया है। अब तक शहरी क्षेत्रों में रहने वाले जिन आवेदकों के पास मृतक का हाईस्कूल प्रमाण-पत्र या परिवार/कुटुंब रजिस्टर उपलब्ध नहीं होता था, उन्हें आयु साबित करने में काफी दिक्कत आती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए शासन ने अब पांच अतिरिक्त दस्तावेजों को भी आयु प्रमाण के रूप में मान्यता दे दी है। आगे जानिए यह शासनादेश किस पर लागू होता है, कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे और इसका लाभ लेने के लिए क्या करना होगा।
शासनादेश की महत्वपूर्ण जानकारी
विवरण | जानकारी |
|---|---|
विभाग/अनुभाग | समाज कल्याण अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन |
शासनादेश संख्या | 5/2026/1177/26-2-2026/1729773 |
जारी होने की तिथि | 11 अगस्त 2026 |
जारीकर्ता | अनुराग यादव, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
प्राप्तकर्ता | समस्त मंडलायुक्त एवं समस्त जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश |
विषय | राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजनांतर्गत नगरीय क्षेत्र के आवेदकों के लिए मृतक की आयु के प्रमाण हेतु अनुमन्य अभिलेख |
संदर्भित पूर्व शासनादेश सं0- | 1360/26-2-2024क0नं0-1729773, दिनांक 25.10.2024 |
प्रमाणिकता | https://shasanadesh.up.gov.in पर सत्यापित की जा सकती है |
पहले क्या व्यवस्था थी?
25 अक्टूबर 2024 को जारी शासनादेश के जरिए राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवेदन, स्वीकृति और वितरण की पूरी प्रक्रिया इंटरनेट आधारित प्रणाली से किए जाने के दिशा-निर्देश दिए गए थे। उसी शासनादेश में मृतक की आयु प्रमाणित करने के लिए मुख्य रूप से दो तरह के दस्तावेज मान्य किए गए थे — परिवार/कुटुंब रजिस्टर की प्रमाणित प्रति, या ऐसा शैक्षिक प्रमाण-पत्र जिसमें जन्मतिथि दर्ज हो।
समस्या यह थी कि शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर परिवार/कुटुंब रजिस्टर बनाया ही नहीं जाता, जिसके चलते नगरीय क्षेत्र के आवेदकों को योजना के लिए आवेदन करने में परेशानी होती थी।
अब शासनादेश में क्या नया निर्णय लिया गया?
इसी कठिनाई को दूर करने के मकसद से शासन ने फैसला किया है कि जिन वार्ड/नगरीय क्षेत्रों में आवेदक के पास हाईस्कूल स्तर का शैक्षिक प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं है, और उस क्षेत्र में परिवार/कुटुंब रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं है, वहां आयु सत्यापन के लिए 25 अक्टूबर 2024 के शासनादेश में तय दस्तावेजों के अतिरिक्त निम्न पांच दस्तावेज भी मान्य होंगे:-
1- राशन कार्ड
2- मतदाता पहचान पत्र
3- ड्राइविंग लाइसेंस
4- पासपोर्ट
5- पैन कार्ड
यानी अब इन दस्तावेजों में से किसी एक के जरिए भी मृतक की आयु साबित की जा सकेगी, बशर्ते ऊपर बताई गई दोनों शर्तें पूरी होती हों।
किन आवेदकों को मिलेगा इसका लाभ?
यह सुविधा हर आवेदक के लिए नहीं है। शासनादेश के मुताबिक इसका लाभ सिर्फ उन्हीं नगरीय क्षेत्र के आवेदकों को मिलेगा जिनके पास:-
• हाईस्कूल स्तर का शैक्षिक प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं है, और
• संबंधित नगरीय क्षेत्र में परिवार/कुटुंब रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं है।
दोनों शर्तें एक साथ पूरी होने पर ही आवेदक इन पांच वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक का उपयोग आयु प्रमाण के रूप में कर सकेगा।
ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों पर लागू नहीं होगी यह व्यवस्था
शासनादेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यह व्यवस्था केवल नगरीय क्षेत्र के आवेदकों के लिए ही मान्य होगी। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों को यह नहीं मान लेना चाहिए कि उन पर भी यह सुविधा अपने आप लागू हो जाएगी।
स्व-घोषणा पत्र देना अनिवार्य
सिर्फ वैकल्पिक दस्तावेज दिखा देना ही काफी नहीं है। शासनादेश के अनुसार आवेदक को निर्धारित प्रारूप में एक स्व-घोषणा पत्र भी देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह बताना होगा कि उसके पास हाईस्कूल स्तर का शैक्षिक प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं है और संबंधित क्षेत्र में परिवार/कुटुंब रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं है।
शासनादेश के साथ संलग्न स्व-घोषणा पत्र के प्रारूप के अनुसार, आवेदक को इसमें अपना नाम, पिता का नाम और मकान नंबर व पिन कोड सहित पूरा आवासीय पता भरना होगा। साथ ही यह भी दर्शाना होगा कि आयु प्रमाण के लिए वह ऊपर बताए गए पांच दस्तावेजों में से कौन-सा दस्तावेज संलग्न कर रहा है।
इस बदलाव से आवेदकों को क्या फायदा होगा?
इस संशोधन से खासतौर पर उन परिवारों को राहत मिलेगी जो नगरीय क्षेत्र में रहते हैं और जिनके पास मृतक की उम्र साबित करने के लिए परंपरागत दस्तावेज (परिवार रजिस्टर या हाईस्कूल प्रमाण-पत्र) मौजूद नहीं थे। अब वे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले पहचान दस्तावेजों के जरिए भी राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिससे आवेदन प्रक्रिया में आने वाली एक बड़ी बाधा दूर हो सकेगी।
ध्यान रखने योग्य बातें
• यह बदलाव केवल राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना से जुड़ा है।
• अतिरिक्त दस्तावेजों की सुविधा सिर्फ नगरीय क्षेत्र के पात्र आवेदकों के लिए है।
• लाभ लेने के लिए हाईस्कूल प्रमाण-पत्र और परिवार/कुटुंब रजिस्टर, दोनों के अनुपलब्ध होने संबंधी स्व-घोषणा देना जरूरी है।
• राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और पैन कार्ड — इन पांच में से कोई एक दस्तावेज संलग्न किया जा सकता है।
• यह आदेश 25 अक्टूबर 2024 के शासनादेश को इस सीमा तक संशोधित करता है।
• यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है, इसलिए इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है।
• इसकी प्रमाणिकता आधिकारिक वेबसाइट shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।
इस आदेश की प्रतिलिपि निदेशक (समाज कल्याण/जनजाति विकास), समस्त मुख्य विकास अधिकारियों, समस्त मंडलीय उप निदेशक/जिला समाज कल्याण अधिकारियों तथा राज्य सूचना विज्ञान केंद्र को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत उत्तर प्रदेश के नगरीय क्षेत्र में रहने वाले उन आवेदकों के लिए यह शासनादेश काफी उपयोगी साबित होगा, जिनके पास मृतक का हाईस्कूल प्रमाण-पत्र और परिवार/कुटुंब रजिस्टर उपलब्ध नहीं है। अब ऐसे आवेदक राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या पैन कार्ड में से किसी एक दस्तावेज और निर्धारित स्व-घोषणा पत्र के जरिए भी आयु प्रमाणित कर सकेंगे। हालांकि यह सुविधा केवल नगरीय क्षेत्र तक सीमित है, इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता और जरूरी शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
यह जानकारी उत्तर प्रदेश शासन के समाज कल्याण अनुभाग-2 द्वारा जारी शासनादेश संख्या 5/2026/1177/26-2-2026/1729773, दिनांक 11 अगस्त 2026 पर आधारित है। योजना से जुड़ी अंतिम एवं सटीक जानकारी के लिए संबंधित विभाग या आधिकारिक वेबसाइट shasanadesh.up.gov.in पर उपलब्ध मूल शासनादेश को ही प्राथमिकता दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. यह शासनादेश किस विषय से संबंधित है?
उत्तर- यह शासनादेश राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत नगरीय क्षेत्र के आवेदकों के लिए मृतक की आयु प्रमाणित करने हेतु अनुमन्य अभिलेखों से संबंधित है।
2. अब आयु प्रमाण के लिए कौन-कौन से नए दस्तावेज मान्य होंगे?
उत्तर- राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और पैन कार्ड — ये पांच दस्तावेज अब अतिरिक्त रूप से मान्य किए गए हैं।
3. यह सुविधा किसे मिलेगी?
उत्तर- यह सुविधा केवल उन नगरीय क्षेत्र के आवेदकों को मिलेगी जिनके पास हाईस्कूल स्तर का शैक्षिक प्रमाण-पत्र और परिवार/कुटुंब रजिस्टर, दोनों उपलब्ध नहीं हैं।
4. क्या ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों पर भी यह व्यवस्था लागू होगी?
उत्तर- नहीं, शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था केवल नगरीय क्षेत्र के आवेदकों के लिए मान्य है।
5. क्या सिर्फ दस्तावेज दिखाने से काम हो जाएगा?
उत्तर- नहीं, आवेदक को निर्धारित प्रारूप में स्व-घोषणा पत्र भी देना अनिवार्य है, जिसमें नाम, पिता का नाम और पूरा आवासीय पता भरना होगा।
6. यह शासनादेश किस पुराने आदेश को संशोधित करता है?
उत्तर- यह शासनादेश दिनांक 25 अक्टूबर 2024 को जारी शासनादेश (सं0-1360/26-2-2024क0नं0-1729773) को इस सीमा तक संशोधित करता है।
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