पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में वेतन निर्धारण: उत्तर प्रदेश शासन का महत्वपूर्ण शासनादेश।
शासनादेश का संक्षिप्त परिचय
यह शासनादेश वेतन समिति, उत्तर प्रदेश (2016) के प्रथम प्रतिवेदन (भाग-1 से भाग-4) में की गई सिफारिशों पर लिए गए निर्णयों की अगली कड़ी है। इससे पहले संकल्प संख्या-62/2016 (दिनांक 16 दिसंबर, 2016) तथा शासनादेश संख्या-65/2016 (दिनांक 20 दिसंबर, 2016) के माध्यम से 01 जनवरी 2016 से प्रभावी नई, पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स को स्वीकृति दी जा चुकी थी। अब इसी क्रम में यह शासनादेश उस पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स के अनुसार वास्तव में कर्मचारियों का वेतन किस प्रक्रिया से तय किया जाएगा, इसका पूरा खाका प्रस्तुत करता है। महामहिम राज्यपाल की स्वीकृति से यह वेतन निर्धारण प्रक्रिया लागू की गई है।
महत्वपूर्ण जानकारी
विभाग | वित्त (वेतन आयोग) अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन |
शासनादेश संख्या | 67/2016/वे0आ0-2-1447/दस-04(एम)/2016 |
जारी होने की तिथि | 22 दिसंबर 2016 |
विषय | पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में वेतन निर्धारण। |
प्रभावी तिथि | 01 जनवरी, 2016 (पूर्वव्यापी प्रभाव से) |
हस्ताक्षरकर्ता | श्री अजय अग्रवाल, सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
प्राप्तकर्ता | समस्त प्रमुख सचिव/सचिव तथा समस्त विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख कार्यालयाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश। |
शासनादेश में क्या निर्णय लिया गया?
इस शासनादेश के माध्यम से यह तय किया गया कि प्रत्येक वह कर्मचारी, जो 01 जनवरी 2016 को राज्य सरकार की पूर्णकालिक सेवा में था, उसका वेतन नई पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। हालांकि, कर्मचारियों को यह छूट भी दी गई कि वे चाहें तो अपनी अगली वेतनवृद्धि, पदोन्नति या पद रिक्त होने तक मौजूदा वेतन बैंड और ग्रेड वेतन में बने रहने का विकल्प चुन सकते हैं। यानी नई व्यवस्था अपनाना अनिवार्य नहीं था, बल्कि कर्मचारी की सुविधा अनुसार एक विकल्प चयन की प्रक्रिया रखी गई।
किसे लाभ/प्रभाव होगा?
यह शासनादेश सीधे तौर पर निम्नलिखित पर लागू होता है:-
• वे सभी राज्य सरकारी कर्मचारी जो 01 जनवरी 2016 को स्थायी अथवा स्थानापन्न रूप से सेवा में कार्यरत थे
• ऐसे कर्मचारी जो 01 जनवरी 2016 को अवकाश, अध्ययन अवकाश या निलंबन की स्थिति में थे
• 01 जनवरी 2016 को अथवा उसके बाद सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले कर्मचारी
• ऐसे कर्मचारी जिनका निधन 01 जनवरी 2016 को अथवा उसके बाद हुआ, उनके आश्रित
• चिकित्सा अधिकारी, विशेष रूप से जिन्हें प्रैक्टिस बंदी भत्ता प्राप्त होता है
• विभिन्न विभागों के राजकीय एवं सहायता प्राप्त शिक्षण/प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी/अधिकारी (यूजीसी, एआईसीटीई तथा आईसीएआर के वेतनमानों से आच्छादित पदों को छोड़कर)
मुख्य बिंदु
विकल्प चयन की प्रक्रिया: कर्मचारियों को अपना विकल्प निर्धारित प्रारूप पर लिखित रूप में शासनादेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर संबंधित कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष अथवा नियुक्ति प्राधिकारी को देना होगा। जो कर्मचारी अवकाश पर, प्रतिनियुक्ति पर या विदेश सेवा में हैं, उनके लिए भारत लौटने या पदभार ग्रहण करने की तारीख से तीन माह की अवधि मान्य होगी। यदि तय समय सीमा में विकल्प नहीं दिया गया, तो यह मान लिया जाएगा कि कर्मचारी ने 01 जनवरी 2016 से लागू पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स अपनाने का विकल्प चुन लिया है। एक बार दिया गया विकल्प अंतिम माना जाएगा।
वर्तमान परिलब्धियों की गणना
किसी कर्मचारी की "वर्तमान परिलब्धियां" का अर्थ है 01 जनवरी 2016 को उसके मूल वेतन और उस पर देय महंगाई भत्ते का योग।
वेतन निर्धारण की गणना पद्धति: सामान्य मामलों में मौजूदा मूल वेतन को 2.57 के गुणांक (फिटमेंट फैक्टर) से गुणा किया जाएगा और इस प्रकार प्राप्त राशि को नई वेतन मैट्रिक्स के संबंधित लेवल में तलाशा जाएगा। यदि वह राशि किसी कोष्ठिका में सीधे उपलब्ध हो तो वही राशि नया वेतन होगी; अन्यथा उससे ठीक अगली ऊंची कोष्ठिका की राशि को नया मूल वेतन माना जाएगा।
चिकित्सा अधिकारियों के लिए विशेष प्रावधान: जिन चिकित्सा अधिकारियों को प्रैक्टिस बंदी भत्ता मिल रहा है, उनके मामले में मूल वेतन को 2.57 से गुणा करने के बाद, संशोधन-पूर्व प्राप्त प्रैक्टिस बंदी भत्ते पर महंगाई भत्ते के बराबर राशि जोड़ी जाएगी। इस प्रकार निर्धारित मूल वेतन और प्रैक्टिस बंदी भत्ते का योग रु0 2,37,500 से अधिक नहीं होगा।
वेतनवृद्धि की नई तिथियां
अब वार्षिक वेतनवृद्धि केवल 01 जुलाई को न होकर वर्ष में दो तिथियों — 01 जनवरी और 01 जुलाई — पर दी जाएगी। जिस कर्मचारी की नियुक्ति, पदोन्नति या वित्तीय स्तरोन्नयन 02 जनवरी से 01 जुलाई के बीच हुआ है, उसे वेतनवृद्धि 01 जनवरी को मिलेगी, और जिनकी नियुक्ति/पदोन्नति 02 जुलाई से 01 जनवरी के बीच हुई है, उन्हें वेतनवृद्धि 01 जुलाई को मिलेगी।
पदोन्नति पर वेतन निर्धारण: पदोन्नति की स्थिति में मौजूदा लेवल में एक वेतनवृद्धि दी जाएगी, और उसके बाद प्राप्त राशि के समतुल्य राशि नए (उच्चतर) पद के लेवल में तलाशी जाएगी।
वरिष्ठ-कनिष्ठ वेतन विसंगति का समाधान: यदि किसी वरिष्ठ कर्मचारी का वेतन पुनरीक्षित मैट्रिक्स में उसके कनिष्ठ कर्मचारी से कम निर्धारित होता है, तो निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर वरिष्ठ कर्मचारी का वेतन कनिष्ठ के बराबर किया जाएगा।
अवशेष (एरियर) भुगतान की प्रक्रिया
इस शासनादेश में एरियर भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था दी गई है:
नई वेतन मैट्रिक्स के अनुसार वेतन एवं महंगाई भत्ता 01 जनवरी 2017 से नकद भुगतान किया जाएगा (भुगतान 01 फरवरी 2017 को देय)
01 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक के अवशेष (बकाया) का भुगतान दो बराबर किश्तों में किया जाएगा — 50 प्रतिशत वित्तीय वर्ष 2017-18 में और शेष 50 प्रतिशत वित्तीय वर्ष 2018-19 में, दोनों वर्षों में अक्टूबर माह से पहले नहीं
इन दोनों वित्तीय वर्षों में देय अवशेष का 80 प्रतिशत भाग कर्मचारी के भविष्य निर्वाह निधि खाते में जमा किया जाएगा और शेष 20 प्रतिशत में से आयकर काटकर नकद भुगतान होगा
जिन कर्मचारियों का भविष्य निर्वाह निधि खाता नहीं है, उनका अवशेष उनकी इच्छा अनुसार एनएससी या पीपीएफ खाते में जमा किया जाएगा
नई पेंशन योजना से आच्छादित कर्मचारियों के मामले में अवशेष राशि के 10 प्रतिशत के बराबर राशि टियर-1 पेंशन खाते में जमा होगी, जिसके बराबर अंशदान राज्य सरकार भी देगी; शेष 90 प्रतिशत एनएससी अथवा पीपीएफ खाते में जमा किया जाएगा।
कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
व्यावहारिक रूप में देखें तो यह शासनादेश कर्मचारियों को दो बातों का स्पष्ट मार्गदर्शन देता है — पहला, उनका नया वेतन किस गणना पद्धति से तय होगा, और दूसरा, यदि वे तुरंत नई व्यवस्था नहीं अपनाना चाहते तो उनके पास मौजूदा व्यवस्था में बने रहने का विकल्प भी मौजूद है। साथ ही, जिन कर्मचारियों का 2016 के दौरान बकाया वेतन एकमुश्त नहीं मिलेगा, उनके लिए किश्तों में भुगतान की व्यवस्था और भविष्य निर्वाह निधि में राशि जमा करने का प्रावधान भी स्पष्ट कर दिया गया है, जिससे वित्तीय योजना बनाने में सुविधा होगी।
जरूरी शर्तें या निर्देश
• विकल्प शासनादेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर, निर्धारित प्रारूप (संलग्नक-2) में लिखित रूप से देना अनिवार्य है।
• विकल्प के साथ एक वचनबंध (अंडरटेकिंग) भी संलग्नक-3 के प्रारूप पर देना होगा, जिसमें यह स्वीकार किया जाएगा कि यदि वेतन निर्धारण में कोई त्रुटि पाई जाती है तो अधिक भुगतान की गई राशि वापस की जाएगी।
• कार्यालय प्रमुख/वेतन निर्धारण करने वाला अधिकारी वचनबंध प्राप्त किए बिना वेतन निर्धारण नहीं करेगा।
• वचनबंध को संबंधित कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में सुरक्षित रखना अधिकारी का दायित्व होगा।
निष्कर्ष
यह शासनादेश उत्तर प्रदेश सरकार के लाखों कर्मचारियों के लिए वेतन पुनर्निर्धारण की एक व्यवस्थित और पारदर्शी प्रक्रिया प्रस्तुत करता है। वेतन समिति, उत्तर प्रदेश (2016) की सिफारिशों के आधार पर तैयार की गई यह वेतन मैट्रिक्स प्रणाली 01 जनवरी 2016 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू की गई है, और इससे जुड़ी विकल्प चयन, वेतन निर्धारण की गणना पद्धति एवं एरियर भुगतान की पूरी प्रक्रिया इस शासनादेश में स्पष्ट कर दी गई है। कर्मचारियों को चाहिए कि वे अपने कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए संलग्नकों (विशेष रूप से संलग्नक-1 की वेतन मैट्रिक्स तालिका) का अवलोकन कर अपनी स्थिति के अनुसार सही विकल्प का चयन तय समय सीमा में करें।
मूल शासनादेश/Official Document
यह शासनादेश (संख्या-67/2016/वे0आ0-2-1447/दस-04(एम)/2016, दिनांक 22 दिसंबर 2016) उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है और इसकी प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट http://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: यह शासनादेश किस तिथि से प्रभावी है?
उत्तर: यह पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स 01 जनवरी 2016 से लागू मानी जाएगी, हालांकि शासनादेश स्वयं 22 दिसंबर 2016 को जारी हुआ है।
प्रश्न: क्या मौजूदा वेतन बैंड में बने रहने का विकल्प उपलब्ध है?
उत्तर: हां, कर्मचारी अपनी अगली वेतनवृद्धि, पदोन्नति या पद रिक्त होने तक मौजूदा वेतन बैंड एवं ग्रेड वेतन में बने रहने का विकल्प चुन सकते हैं।
प्रश्न: विकल्प देने की अंतिम तिथि क्या है?
उत्तर: शासनादेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर निर्धारित प्रारूप में विकल्प देना होगा।
प्रश्न: यदि कर्मचारी निर्धारित समय में विकल्प नहीं देता तो क्या होगा?
उत्तर: ऐसी स्थिति में यह मान लिया जाएगा कि उसने 01 जनवरी 2016 से लागू पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स अपनाने का विकल्प चुन लिया है।
प्रश्न: बकाया (एरियर) राशि का भुगतान कब और कैसे होगा?
उत्तर: बकाया राशि दो बराबर किश्तों में वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 में दी जाएगी, जिसमें से अधिकांश हिस्सा भविष्य निर्वाह निधि खाते में जमा होगा और शेष हिस्सा नकद भुगतान किया जाएगा।
प्रश्न: क्या यह शासनादेश शिक्षकों पर भी लागू होता है?
उत्तर: हां, राजकीय एवं सहायता प्राप्त शिक्षण/प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों/अधिकारियों पर भी यह वेतन निर्धारण व्यवस्था लागू होती है (कुछ विशेष वेतनमानों से आच्छादित पदों को छोड़कर)।
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